प्रोस्‍टेट सेक्‍स समस्‍या से कैसे बचें

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 24, 2014

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प्रोस्‍टेट के आकार में बढ़ोत्तरी को बीपीएच कहा जाता है। अगर आपके डॉक्‍टर को प्रोस्‍टेट के आकार में असामान्‍य बढ़ोत्तरी महसूस करता है, तो वह इसे रोकने के लिए त्‍वरित कदम उठा सकता है। इस स्‍लाइड शो में इसी के बारे में विस्‍तार से जानकारी दी गई हैं।
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    क्‍या है प्रोस्‍टेट

    पौरुष ग्रंथि यानि प्रोस्‍टेट, पुरुषों के जनानांगों का अहम हिस्‍सा होता है। प्रोस्टेट एक छोटी सी ग्रंथि होती है जो अखरोट के आकार की होती है। यह ग्रंथि सीनम निर्माण में मदद करती है, जिससे सेक्‍सुअल क्‍लाइमेक्‍स के दौरान वीर्य आगे जाता है। इस ग्रंथि में सामान्‍य बैक्‍टीरियल इंफेक्‍शन से लेकर कैंसर जैसे गंभीर रोग हो सकते हैं।

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    प्रोस्‍टेट के कारण

    प्रोस्‍टेट से ग्रस्त होने के कई कारण हैं। जैसे, बढ़ती उम्र, आनुवांशिक और हार्मोनल प्रभाव। इसके अलावा औद्योगिक कारखानों में काम करने वाले लोग जो विभिन्न रसायनों और विषैले तत्वों के सपर्क में रहते हैं, उनमें इस रोग के होने की आशकाएं बढ़ जाती हैं।

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    प्रोस्‍टेट के लक्षण

    जल्दी-जल्‍दी यूरीन आना या यूरीन करने में जोर लगाना, यूरीन देर से होना या फिर रुक-रुक कर होना या उसमें रुकावट होना, यूरीन कर लेने के बाद भी बूंद-बूंद टपकना, यूरीन या वीर्य से रक्त आना और हड्डियों में दर्द आदि। यह सारे लक्षण प्रोस्‍टेट के हो सकते है।

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    प्रोस्‍टेट में परेशानी

    प्रोस्‍टेट में परेशानी आने पर पुरुषों में सामान्‍य तौर पर दो रोग देखे जाते हैं। पहला, प्रोस्‍टेटिक हाईपेथ्रोफी (बीपीएच) होता है और दूसरा प्रोस्‍टेट कैंसर। पहले प्रकार की बीमारी में प्रोस्‍टेट का आकार सामान्‍य से बड़ा हो जाता है, जिस कारण मूत्रमार्ग संकरा हो जाता है। और व्‍यक्ति को पेशाब करने में परेशानी और दर्द हो सकता है। वहीं दूसरी प्रकार की बीमारी यानी प्रोस्‍टेट कैसर में प्रोस्‍टेट ग्रंथि कैंसरग्रस्‍त हो जाती है और अगर सही समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो यह आसपास के अंगों को भी अपनी चपेट में ले लेती है।

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    प्रोस्‍टेट ग्रंथि से कैसे बचें

    प्रोस्‍टेट के किसी भी रोग का इलाज करने की पहली मांग है कि आप प्रोस्‍टेट का आकार बढ़ने पर पूरी नजर रखें। प्रोस्‍टेट के आकार में बढ़ोत्तरी को बीपीएच कहा जाता है। अगर आपके डॉक्‍टर को प्रोस्‍टेट के आकार में असामान्‍य बढ़ोत्तरी महसूस करता है, तो वह इसे रोकने के लिए त्‍वरित कदम उठा सकता है।

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    दवा व इलाज

    प्रोस्‍टेट ग्रंथि में असामान्‍य बढ़ोत्तरी होने पर डॉक्‍टर 5एआरआई (5 अल्‍फा-रेड्यूक्‍टेस इनहिबिटर्स) दवायें दे सकता है। ऐसा माना जाता है कि प्रोस्‍टेट ग्रंथि टेस्टोस्टेरोन में डिहाइड्रोटेस्‍टोस्‍टेरोन (डीएचटी) का स्राव करती है। यही स्राव प्रोस्‍टेट ग्रंथि के अधिक आकार का कारण होता है। 5एआरआई दवायें प्रोस्‍टेट में डीएचटी का स्‍तर कम कर देती हैं, जिससे उनका आकार और बढ़ने से रुक जाता है।

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    दवा

    दूसरी तरह की दवाओं में पुरुषों में पेशाब के समय होने वाले दर्द को कम करने के लिए अल्‍फा ब्‍लॉर्क्‍स दिये जाते हैं। ये दवायें यूरिनेरी ब्‍लैडर की मांसपेशियों को आराम पहुंचाती हैं, जिससे मूत्र, यूरिनेरी ब्‍लैडर से होता हुआ मूत्रमार्ग में आसानी से प्रवाहित हो जाता है। ये दवायें प्रोस्‍टेट के आकार में कोई परिवर्तन नहीं करतीं, बल्कि मूत्र में होने वाले दर्द को कम करने में मदद करती है।

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    सर्जरी

    सुरक्षित सर्जरी के लिए व्‍यक्ति को बीपीएच के लक्षणों को कम करने की जरूरत होती है। कुछ गंभीर मामलों में प्रोस्‍टेट को निकालने की जरूरत पड़ सकती है। और वहीं कुछ अन्‍य मामलों में लिम्‍फ नोड्स को भी पूरा बाहर निकालना पड़ता है। इसके संभावित दुष्‍परिणामों में रक्‍त स्राव, संक्रमण, मूत्र-असंयम और नपुंसकता आदि शामिल हैं।

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    रोबोटिक तकनीक

    सर्जरी की नयी रोबोटिक तकनीक द्वारा छोटे से चीरे से ही इलाज किया जा सकता है। कैंसर को उसकी शुरुआती अवस्‍था में क्रायोसर्जरी के जरिये ठीक किया जा सकता है। इसमें कैंसर कोशिकाओं को फ्रीज और विघटन के जरिये नष्‍ट कर दिया जाता है। इसके साथ ही कैंसर के लिए हार्मोन और रेडिएशन ट्रीटमेंट की भी जरूरत पड़ सकती है।

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    बचाव

    बीपीएच से बचाव के लिए वसायुक्त खाद्य पदार्थों से परहेज करें और शराब पीने से बचें। स्वास्थ्य शोधकर्ताओं के अनुसार, संतुलित आहार प्रोस्टेट को स्वस्‍थ बनाये रखने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। सब्‍िजयां जिन में आइसोथियोसाइनेट अधिक मात्रा में होता जैसे ब्रोकोली, फूलगोभी व मछली प्रोस्टेट के खतरे को कम करने मे सहायक होता है। सोया उत्पाद भी प्रोस्टेट को बढ़ने से रोकने में मदद करते हैं।

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    बचाव के उपाय

    विटामिन ई भी प्रोस्टेट सूजन को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा फेटा हुआ मक्खन, वनस्पति तेल, गेहूं के बीज और साबुत अनाज भी प्रोस्टेट को रोकने और उसको न बढ़ने देने में काफी मददगार सिद्ध होते हैं। प्रोस्टेट के रोगियों को अधिक मात्रा मे तरल पदार्थ का सेवन करना चाहिये।

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