कार्यस्‍थल पर यौन और मानसिक उत्‍पीड़न से बचने के तरीके

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 18, 2016

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यदि काम की जगह कोई आपका यौन या मानसिक उत्पीड़न कर रहा है तो चुप रहना या डरना बड़ी बेवकूफी है, हम आपको कुछ टिप्‍स बता रहे हैं जिससे कार्यस्‍थल पर आप उत्‍पीड़न को रोक सकते हैं।
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    यौन और मानसिक उत्पीड़न से बचाव

    "अगर आप खुद को किसी अजीब स्थिति में घिरा पाएं तो, अपने अंतर्मन पर भरोसा करें और सही रणनीति का पालन करें।" दुर्भाग्य से, यौन उत्पीड़न भी एक ऐसी ही दुखद और शर्मसार करने वाली वास्तविकता है, हर रोज इसके अनेकों मामले देशभर से हमारे सामने आते हैं। यौन और मानसिक उत्पीड़न से जूझ रहे इंसान (फिर चाहे वो महिला हो या पुरुष) को बहादुर बनना जरूरी है। यदि काम की जगह कोई आपका यौन या मानसिक उत्पीड़न कर रहा है तो चुप रहना या डरना बड़ी बेवकूफी है। आपको ये ठीक से जान और समझ लेना चाहिये कि आप अकेले नहीं हैं, पूरा एक सिस्टम आपकी मदद के लिये है। जरूरत है तो बस सही जानकारी और सही कदम उठाने की।

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    लोगों के साथ बनायें एक दायरा

    आपको पूरे विवेक और बड्डपन के साथ ये सुनिश्चित करना होगा कि किसी मज़ाक और उत्पीड़न के क्या फर्क है, और आपको इसके तहत एक सीमा रेखा भी खींचनी होगी, ताकि लोगों को हद का अंदाज़ा रहे।

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    कानून और नियमों को ठीक से जानें

    आपके लिये यह जानना बेहद जरूरी है कि इस संबंध में नीतियां (पोलिसी) क्या कहती हैं। ताकि आप उसके अनुसार तैयारी कर पाएं। साथ ही अपने कानूनी अधिकारों को जानें। इससे संबंधिक कानूनों को पढ़ें या किसी कानूनी जानकार से विकल्पों के बारे में जानकारी लें।

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    सबसे पहला कदम ये उठाएं

    उत्पीड़न के मामले में जो सबसे पहला कदम उठाना चाहिये वो ये है कि, आप सीधा जाकर उस व्यक्ति से बात करें जो आपको परेशान कर रहा है। और उसे इस बात का अंदेशा दें कि आप बर्दाश्त करने वाले या चुप रहने वालों में से नहीं हैं। उसे इस संबंध में एक लिखित चेतावनी भी दें। यदि उससे बात कर कोई फायदा न हो, तो अपने सानियर से इसकी शिकायद करें। अपने एचआर (ह्यूमन रीसोर्स) मैनेजर को भी इसमें शामिल करें, ताकि वे आपको आगे की कार्रवाई के बारे में सूचित कर सकें। इस मामले को अब लिखित बनाएं।

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    पीड़ितों और गवाहों को जुटाएं

    इस बात की पूरा संभावना है कि, आपको परेशान कर रहे व्यक्ति ने पहले भी लोगों के साथ उत्पीड़न किया हो, या वो हाल में भी और लोगों के साथ ऐसा करता या करती हो। उन लोगों से बात करें और उन्हें एक साथ जुटाने की कोशिश करें। अपने लिये किसी प्रत्यक्ष गवाह को तैयार करने की कोशिश करें। जितने हो सके सबूत जुटाएं। बाकी पीड़ितों से भी लिखित सूचना या चेतावनी देने का आग्रह करें ताकि आप सभी का केस मजबूत बन पाए। इसके बाद सीनियर मैनेजमेंट से इस संबंध में बात करें। उनके सामने सभी संभव सबूत ले जाएं।

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    उत्पीड़न करने वाले के खिलाफ मुकदमा करें

    अपने विकल्पों का मूल्यांकन करने के लिए वकील से सलाह लें। स्पष्ट रहें और सुनिश्चित कर लें कि आप बदले में क्या चाहते हैं, जैसे मुआवजा या अगर आपको नौकरी से निकाल दिया गया हो, तो अपनी नौकरी में वापसी।

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    निंदकों की बातों पर ध्यान ना दें और अच्छे लोगों में रहें

    याद रखें, इस तरह के कमद को उठाने पर आपको निंदकों का भी सामना करना पड़ेगा। तो खुद को मजबूत बनाएं, निंदकों की बातों को दिल से न लगाएं, आप सही काम कर रही/रहे हैं। यकीनन ये मुश्किल वक्त होगा, इसलिये अपनों के साथ समय बिताएं। ऐसे लोगों के साथ रहें जो आपकी परवाह करते हैं और सच का साथ देने का माद्दा रखते हैं।

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