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गम नहीं अपनी खुशियों के बारे में करें बात

By:Nachiketa Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 29, 2014
जीवन में सुख और दुख आते रहते हैं, लेकिन अगर गम की बजाय खुशियों को अपना हमसफर बनाया जाय तो तनाव और अवसाद दूर रहेगा और हमेशा आपको सकारात्‍मक ऊर्जा मिलती रहेगी।
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    गम और खुशियां

    व्‍यक्ति का पूरा जीवन दुखों और सुखों से भरा है, कभी गम साथ रहता है तो कभी सुख। गम हमें दुख देता है और इसके कारण मन में नकारात्‍मक विचार आते हैं, जबकि सुख हमें प्रसन्‍नता देता है और सकारात्‍मक भावना का संचार होता है। खुशहाल जीवन की कल्‍पना सभी करते हैं, लेकिन गम से कोई बच नहीं पाता है। परिस्थिति कैसी भी हो आपका व्‍यवहार और आचरण माहौल को आपके अनुकूल कर सकता है। इसलिए अपने व्‍यवहार और बातों से जीवन को खुशियों से भरें। गम के बारे में नहीं बल्कि अपने सुखों के बारे में बात कीजिए।

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    गम और खुशियां
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    शिकायत न करें

    जब भी हम किसी बात, व्‍यक्ति या परिस्थिति की शिकायत करते हैं तभी हमारे मन में हीन भावना पैदा होती है। शिकायत की भावना जहां होती है वहां दुख ही दुख होता है। इसलिए शिकायत न करें, क्‍योंकि सभी को एक जैसा मौका मिलता है और आपके सकारात्‍मक प्रयासों से ही उसका परिणाम आपके हक में आता है। विपरीत परिस्थितियों में भी लोग अपने प्रयासों से सफलता प्राप्‍त करते हैं।

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    शिकायत न करें
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    बात करने का अंदाज बदलें

    इससे पहले हमेशा आप नकारात्‍मक बातें करते थे। आपका बात करने का अंदाज भी नकारात्‍मक ही था। इस तरीके से बात करने से न केवल आपके अंदर बल्कि आप जहां हैं वहां का पूरा माहौल नकारात्‍मक हो जाता है, इसलिए अपने बात करने के अंदाज को बदलिये। सकारात्‍मक नजरिया अपनाइये।

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    बात करने का अंदाज बदलें
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    नकरात्‍मक अनुभव छुपायें नहीं

    ऐसा नहीं है कि हर वक्‍त आपके साथ अच्‍छा ही हुआ हो, जबकि ऐसा बार-बार हुआ होगा कि आपके मन में नकारात्‍मक विचार आये होंगे। उन विचारों को दबाने से असंतोष की भावना पैदा होगी, यह भावना आपकी खुशियों के बीच में दीवार की तरह है। इसलिए इन विचारों को न केवल अपने मन से निकालिये बल्कि इसे निकालने के लिए अपने दोस्‍तों और परिवारजनों का सहारा भी लीजिए।

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    नकरात्‍मक अनुभव छुपायें नहीं
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    कमतर न आंके

    आपकी क्षमता किसी से कम नहीं है, ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे आप नहीं कर सकते हैं। इस दुनिया में आपके लिए असंभवन कुछ भी नहीं, बस जरूरत है पूरे जोश और लगन के साथ मेहनत करने की, इसलिए अपने आपको कमतर न आंके। दूसरों की कामयाबी देखकर दुखी न हों बल्कि उससे प्रेरणा लें।

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    कमतर न आंके
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    जिम्‍मेदारी स्‍वीकारें

    दुख तब आती है जब आप अपनी जिम्‍मेदारियों को स्‍वीकार नहीं करते हैं और उससे भागते हैं। उम्र बढ़ने के साथ अपने ऊपर पड़ने वाली जिम्‍मेदारी से भागने की बजाय उसे स्‍वीकार करें, उसे अच्‍छे से निभायें न कि उससे भागने की कोशिश करें। जिम्‍मेदारियों को स्‍वीकारने के बाद जब भी आप किसी से बात करेंगे तो इसमें शिकायत नहीं बल्कि खुशी नजर आयेगी।

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    जिम्‍मेदारी स्‍वीकारें
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    छोटी-छोटी खुशियों को तलाशें

    बड़ी खुशी से अच्‍छा है कि आप अपने जीवन में छोटी-छोटी खुशियों की तलाश करें। उन पलों का लुत्‍फ उठायें जो आपको खुश करते हों। ये खुशियां आपको हर कदम पर मिलती हैं। दोस्‍तों का साथ हो, परिवार का साथ हो, सह‍कर्मियों का साथ हो, इन मौकों पर जीवन को खुशनुमा बनाने वाले तरीकों की तलाश करें। ऐसे माहौल में अपनी खुशियों की चर्चा करें न कि दुखों की।

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    छोटी-छोटी खुशियों को तलाशें
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    अपना ध्‍यान रखें

    भागदौड़ भरी जिंदगी में आपके पास इतना समय नहीं कि आप खुद का खयाल रख सकें, इसका नतीजा तनाव और अवसाद होता है। जब आप खुद को नजरअंदाज करते हैं तब खुशियों की बजाय गम आपका साथी बन जाता है और आप हमेशा नकारात्‍मक भावना से ग्रस्‍त हो जाते हैं। इसलिए अपने ऊपर ध्‍यान दें, नियमित रूप से व्‍यायाम करें, ध्‍यान और योग को अपनी दिनचर्या बनायें, स्‍वस्‍थ और पौष्टिक आहार का सेवन करें और हमेशा खुश रहें।

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    अपना ध्‍यान रखें
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