हेल्‍थ संबंधी जानकारी के लिए सब्‍सक्राइब करें

Like onlymyhealth on Facebook!

जानें वरुण मुद्रा करने का तरीका और इसके फायदे

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:May 27, 2016
वरुण मुद्रा जल की कमी (डिहाइड्रेशन) से होने वाले सभी तरह के रोगों से बचाती है, साथ ही इसके कई और लाभ भी होते हैं। चलिए जानें मुद्रा करने का तरीका और इसके फायदे क्या हैं।
  • 1

    वरुण मुद्रा और इसके लाभ



    वरुण मुद्रा जल की कमी (डिहाइड्रेशन) से होने वाले सभी तरह के रोगों से बचाती है, साथ ही इसके कई और लाभ भी होते हैं। सालों से इस योह मुद्रा का अभ्यास किया जाता रहा है और लोग इससे लाभान्वित होते रहे हैं। कमाल की बात तो ये है कि इस मुद्रा का अभ्यास आप कभी भी और कहीं भी कर सकते हैं। चलिए जानें मुद्रा करने का तरीका और इसके फायदे क्या हैं।
    Images source : © Getty Images

    वरुण मुद्रा और इसके लाभ
  • 2

    क्या होती हैं मुद्राएं


    दरअसल कुंडलिनी या ऊर्जा स्रोत को जाग्रत करने के लिए मुद्राओं का अभ्यास किया जाता है। कुछ मुद्राओं के अभ्यास से आरोग्य और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।  योगानुसार चरम अभ्यस्थता के साथ इसे करने से अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों की प्राप्ति हो सकती है। लेकिन साधारण रूप से इसका अभ्यास करने से भी कई फायदे होते हैं।
    Images source : © Getty Images

    क्या होती हैं मुद्राएं
  • 3

    वरुण मुद्रा करने की विधि


    वरुण मुद्रा दो प्रकार की होती है। सबसे छोटी उंगली (कनिष्का) को अंगूठे के अग्रभाग से मिलाने पर वरुण मुद्रा बनती है। दरअसल हाथ की सबसे छोटी उंगली को जल तत्व का प्रतीक माना जाता है और अंगूठे को अग्नि का। तो जल तत्व और अग्नि तत्व को एक साथ मिलाने से बदलाव होता है। बस आपको करना ये है कि, छोटी उंगली के सिरे को अंगूठे के सिरे से स्पर्श करते हुए धीरे से दबाएं। बाकी की तीन उंगुलियों को सीधा रखें।  
    Images source : © Getty Images

    वरुण मुद्रा करने की विधि
  • 4

    वरुण मुद्रा करने के लाभ


    यह शरीर के जल तत्व के संतुलित बनाए रखती है। आंत्रशोथ तथा स्नायु के दर्द और संकोचन से बचाव करती है। एक महीने तक रोजाना 20 मिनट तक इस मुद्रा का अभ्यास करने से ज्यादा पसीना आने और त्वचा रोग को दूर करने में सहायक होती है। यह साथ ही इसके नियमित अभ्यास से रक्त भी शुद्ध होता है और शरीर में रक्त परिसंचरण बेहतर होता है। शरीर को लचीला बनाने में भी वरुण मुद्रा उपयोग होती है। यह मुद्रा त्वचा को भी सुंदर बनाती है।
    Images source : © Getty Images

    वरुण मुद्रा करने के लाभ
  • 5

    कब करें और कब ना करें


    इस मुद्रा को सर्दी के मौसम में कुछ अधिक समय के लिए न करें। आप गर्मी या दूसरें मौसम में इस मुद्रा को 24 मिनट तक कर सकते हैं। वरुण मुद्रा को अधिक से अधिक 48 मिनट तक किया जा सकता है। जिन लोगों को सर्दी और जुकाम की शिकायद रहती है, उन्हे वरुण मुद्रा का अभ्यास अधिक समय तक नहीं करना चाहिए।
    Images source : © Getty Images

    कब करें और कब ना करें
Load More
X
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
Disclaimer +
Though all possible measures have been taken to ensure accuracy, reliability, timeliness and authenticity of the information; Onlymyhealth assumes no liability for the same. Using any information of this website is at the viewers’ risk. Please be informed that we are not responsible for advice/tips given by any third party in form of comments on article pages . If you have or suspect having any medical condition, kindly contact your professional health care provider.