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छुट्टियों में सामाजिक चिंता से बचने के तरीके

By:Nachiketa Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 02, 2015
छुट्टियों का मौसम उन लोगों के लिए चिंता का कारण बन सकता है जो सामाजिक चिंता विकार से ग्रस्‍त होते हैं, क्‍योंकि ऐसे लोग दूसरे लोगों से आसानी घुल-मिल नहीं पाते हैं।
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    छुट्टियों में सामाजिक चिंता

    छुट्टियों का मौसम सभी के लिए खुशियां लेकर आता है, क्‍योंकि इस वक्‍त आपके पास काम नहीं होता और आप सबकुछ भूलकर आराम फरमाते हैं। लेकिन वहीं दूसरी तरफ छुट्टियों के मौसम में कुछ लोगों को चिंता और तनाव भी होता है, क्‍योंकि वे लोग सामाजिक नहीं होते हैं और नये लोगों से आसानी से घुल-मिल नहीं पाते हैं। इसे सामाजिक चिंता विकार या सोशल फोबिया भी कहते हैं। ऐसे लोग छुट्टियों का मजा नहीं ले पाते हैं। लेकिन अगर कोशिश की जाये तो सामाजिक जिंता से आसानी से बचाव किया जा सकता है।

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    छुट्टियों में सामाजिक चिंता
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    क्‍यों होती है सामाजिक चिंता

    सामाजिक चिंता एक प्रकार का डर है जो लोगों से बात करते समय लगता है खासकर ऐसे मौके पर जब आप उन लोगों को नहीं जानते हैं जिससे आप बात करते हैं। यह जीवन को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है। कई बार लोग किसी खास परिस्थिति में भी इसके शिकार हो जाते हैं। सामाजिक चिंता को शर्माने का नाम नहीं दिया जा सकता है, यह इससे कहीं अधिक होता है। जो लोग इस समस्या से ग्रस्त होते हैं वे अकसर यह सोचते रहते हैं कि लोग उनके बारे में क्या सोचते होंगे।

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    क्‍यों होती है सामाजिक चिंता
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    कार्यक्रम की दिशा तय करें

    छुट्टियों के समय आप किसी पार्टी में जाने से परहेज करते हैं, क्‍योंकि आपको लगता है कि आप वहां असहज हो जायेंगे। इनसे बचना इसका हल नहीं है, बल्कि अगर आप पार्टी में जाने से बचेंगे तो और मुश्किल हो सकती है, इसके कारण तनाव और अवसाद भी हो सकता है। इससे बचने के लिए खुद से ही किसी पार्टी या कार्यक्रम की दिशा और दशा तय कीजिए। सबसे पहले यह सोचिये कि आप पार्टी में आखिर क्‍यों जाते हैं, पार्टी में लोगों से मिलना आपके लिए इतना मुश्किल क्‍यों है, इन सवालों का जवाब पाने के लिए ऐसे कार्यक्रम में जायें जहां पर आप एक बार लोगों से मिल चुके हैं। अपने दोस्‍तों के दोस्‍तों और रिश्‍तेदारों को बुलाकर पार्टी कीजिए और आखिरी तक पार्टी में रुके रहिये।

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    कार्यक्रम की दिशा तय करें
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    स्थिति को समझें

    सामाजिक चिंता तब और बढ़ जाती है जब आप यह सोचने लगते हैं कि लोग आपके बारे में क्‍या सोच रहे हैं। ऐसे में असहज होने से अच्‍छा है परिस्थिति को समझने की कोशिश कीजिए, मन को शांत कीजिए और वर्तमान स्थिति का आकलन कीजिए। जिस स्‍थान या जिन लोगों से आपको समस्‍या से हो उससे बचने की कोशिश करें।

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    स्थिति को समझें
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    घबराहट हो सकती है

    नर्वसनेस यानी घबराहट एक सामान्‍य स्थिति है जिसका सामना कई लोगों को करना पड़ता है, इस स्थिति में आने वाले आप इकलौते इनसान नहीं हैं। सभी के मन में अच्‍छी और बुरी भावनायें आती हैं और सभी भावनाओं के अधीन हैं। कोई व्‍यक्ति मुखर होता है तो किसी का स्‍वभाव शर्मीला होता है। अगर आप भी लोगों से आसानी से घुल-मिल नहीं पा रहे हैं तो यह कोई बड़ी समस्‍या नहीं है। यह एक सामान्‍य स्थिति है, इसका सामना कीजिए।

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    घबराहट हो सकती है
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    आप भी किसी से कम नहीं

    जब भी किसी पार्टी या किसी कार्यक्रम में आप हों तो लोगों को अपनी महत्‍ता बताइये। किसी पार्टी में आप जो भी हैं वो दिखने की कोशिश कीजिए। लोगों से बात करते वक्‍त नजरे चुराने से अच्‍छा है नजरे मिलाकर बात करें। जब भी आप किसी से नजर मिलाकर बात करते हैं तब आपको समस्‍या नहीं होती है, बल्कि आप अपनी बात आसानी से दूसरे से बोल सकते हैं। तो अगली पार्टी में दिखा दीजिए कि आप भी किसी से कम नहीं हैं।

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    आप भी किसी से कम नहीं
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    नये लोगों से मिलें

    किसी समस्‍या का समाधान तभी हो सकता है जब आप उसे हल करने की कोशिश करते हैं, आप जितना किसी समस्‍या से दूर भागते हैं वह उतना ही आपका पीछा करता है। अगर आप सामाजिक चिंता विकार से ग्रस्‍त हैं तो उससे बचने का तरीका यही है कि इसका सामना कीजिए, सामाजिक कार्यक्रम में हिस्‍सा लें, पार्टी में आये हुए लोगों से बात करने में पीछे न हटें, नये-नये लोगों से मिलें।

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    नये लोगों से मिलें
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    वास्‍तविकता में रहें

    सामाजिक चिंता विकार से ऐसे लोग अधिक ग्रस्‍त होते हैं जिनके मन में नकारात्‍मक भावनायें अधिक आती हैं। ऐसे लोग वास्‍तविकता से परे होते हैं, वे केवल अनुमान के आधार पर स्थिति का आकलन करते हैं। इससे स्थिति सुलझने की बजाय बदतर होती जाती है। इससे बचने का सबसे अच्‍छा तरीका है कि आप यथार्थवादी बनें, वास्‍तविकता में जीने की कोशिश करें।

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    वास्‍तविकता में रहें
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