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साइकोसेक्सुअल विकार से कैसे निपटें

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 16, 2014
साइकोसेक्सुअल डिसफंक्शन में किसी व्‍यक्ति की सेक्स के प्रति रुचि घट जाती है। यह समस्या शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक होती है।
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    साइकोसेक्सुअल डिसॉर्डर

    साइकोसेक्सुअल डिसफंक्शन में किसी व्‍यक्ति को न सिर्फ अपने साथी में अपितु सेक्स के प्रति ही रुचि घट जाती है। पुरुषों में यह समस्या कम यौन इच्छा, देरी से स्खलन और नपुंसकता के कारण होती है, जबकि महिलाओं में अपर्याप्त स्नेहन, संभोग सुख को प्राप्त करने में असमर्थता और पीड़ादायक संभोग के कारण होता है।

    साइकोसेक्सुअल डिसॉर्डर
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    साइकोसेक्सुअल विकार को समझें

    साइकोसेक्सुअल विकार या डिसॉर्डर एक ऐसी अवस्था है जिसमें कोई व्यक्ति फिजिकल तौर पर यौंन रूप से तो फिट होता है लेकिन मनोवैज्ञानिक व भावनात्मक कारणों की वजह से सेक्स के समय कठिनाई का अनुभव करता है। साइकोसेक्सुअल डिसॉर्डर से ग्रस्त अधिकांश लोग अपनी इस स्थिति को ठीक तरह से समझ नहीं पाते और सोचते हैं कि उनमें कोई शारीरिक कमी है। साइकोसेक्सुअल विकार तीन- सेक्सुअल डिशफंग्शन, सेक्सुअल प्रिवेंशन और जेंडर आइडेंटिटी डिसॉर्डर, प्रकार का होता है।

    साइकोसेक्सुअल विकार को समझें
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    साइकोसेक्सुअल विकार के लक्षण

    इस समस्या से ग्रस्त लोग सेक्सुअल एंग्जाइटी से पीड़ित होते हैं। इनमें से अधिकांश लोग अपने पार्टनर को सेक्सुअली सेटीस्फाइड न करने की समस्या के शिकार होते हैं। इस समस्या से जूझ रहे लोगों को ठीक से नींद नहीं आती, घबराहट होती है और ये लोग अपने पार्टनर के साथ सेक्स करने से डरते हैं।

    साइकोसेक्सुअल विकार के लक्षण
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    क्या हैं कारण

    भागदौ़ड़ भरी जिंदगी, अवसाद, काम का दबाव, पारिवारिक विघटन, पति-पत्नी में तनाव और सामाजिक असमानता ने लोगों में तनाव के स्तर को बहुत बढ़ा दिया है। और तनाव साइकोसेक्सुअल विकार के मुख्य कारणों में से है। देर रात तक जागने वाली जीवनशैली से भी पुरुषों व महिलाओं में साइकोसेक्सुअल विकार जन्म लेता है। नींद पूरी न होने से तनाव जैसी समस्याएं पैदा होती हैं, जो सेक्स में अरुचि, सेक्सुअल डिसफंक्शन का कारण बनते हैं।

    क्या हैं कारण
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    सेक्सुअल डिसफंग्शन

    सेक्सुअल डिशफंग्शन, इच्छा, कामोत्तेजना या संभोग, इन तीन में से किसी यौन गतिविधियों के दौरान होने वाली दुर्बलता के अनुभव को कहा जाता है। काम इच्छा विकार में यौन गतिविधियों में लिप्त होने या कल्पना करने की बहुत कम या कोई इच्छा नहीं होती है। जबकि कामोत्तेजना व्यक्ति की सेक्स करने की इच्छा तो होती है लेकिन वह इसे कर नहीं कर पाता। वहीं यौंन संभोग विकार वाले व्यक्ति को संभोग में चरम प्रप्ति में कठिनाई होती है।

    सेक्सुअल डिसफंग्शन
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    सेक्सुअल प्रिवेंशन

    सेक्सुअल प्रिवेंशन वाले व्यक्ति केवन तब ही यौन उत्तेजना या संभोग सुख का अनुभव करता है, जब वह असामान्य और विकृत और चरम यौन क्रियाओं में लिप्त नहीं होता है। यौन क्रिया के दौरान पीड़ा देने या लेना, विपरीत लिंग की तरह कपड़े पहनना या बर्ताव करना, अन्य लोगों को सेक्स करते देखना, सहमति न रखने वाले व्यक्ति के साथ यौन कृत्य में लिप्त होना तथा किसी निर्जीव वस्तु के लिए आकर्षण, सेक्सुअल प्रिवेंशन के लक्षण होते हैं।

    सेक्सुअल प्रिवेंशन
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    जेंडर आइडेंटिटी डिसॉर्डर

    जेंडर आइडेंटिटी डिसॉर्डर में व्यक्ति अपने लिंग से असंतुष्ट महसूस करता है तथा विपरीत लिंग के साथ अपनी पहचान दर्शाना और बनाना चाहता है। इसमें कोई पुरुष आदमी के शरीर के अंदर फंसे एक औरत की तरह महसूस करता है, जबकि कोई महिला, महिला के शरीर के अंदर फंसे एक आदमी की तरह महसूस करती है।

     जेंडर आइडेंटिटी डिसॉर्डर
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    साइकोसेक्सुअल डिसॉर्डर का उपचार

    साइकोसेक्सुअल विकारों के बारे में शर्म और गलत जानकारियों के चलते लोग उपचार लेने से बचते हैं। नतीजतन वे किसी गलत इलाज का चयन कर बैठते हैं। साइकोएनेलिसिस (मनोविश्लेषण) और हिप्नोथेरेपी जैसी अचेतन मन के साथ काम करने वाली मनोचिकित्सा, साइकोसेक्सुअल डिसॉर्डर के उपचार में प्रभावी साबित होती हैं। साइकोथेरेपी की मदद से अचेतन मानसिक संघर्ष (अन्कान्शस कान्फ्लिक्ट) को समझ कर साइकोसेक्सुअल डिसॉर्डर के लक्षण और प्रभाव को दूर किया जा सकता है।

    साइकोसेक्सुअल डिसॉर्डर का उपचार
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