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डेंगू और मच्‍छरों से होने वाली अन्‍य बीमारियों से कैसे बचें

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 15, 2014
मच्‍छर डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और येलो फीवर जैसी कई बीमारियां फैलाते हैं। कुछ आसान उपाय आजमाकर आप मच्‍छरों से होने वाली इन सामान्‍य बीमारियों से बच सकते हैं।
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    मच्‍छरों से होने वाली बीमारियों से बचाव

    मच्छरों के काटने और उनसे फैलने वाली बीमारियों से हम दुनिया में कहीं भी नहीं बच सकते। क्‍योंकि मच्‍छरों से केवल भारत के ही नहीं बल्कि दुनिया भर के लोग परेशान हैं। मच्‍छर डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और येलो फीवर जैसी कई बीमारियां फैलाते हैं। कुछ आसान उपाय आजमाकर आप मच्‍छरों से होने वाली इन सामान्‍य बीमारियों से बच सकते हैं।
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    मच्‍छरों से होने वाली बीमारियों से बचाव
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    डेंगू

    डेंगू संक्रमित मादा एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। यह काफी दर्दनाक और दुर्बल करने वाली बीमारी है। इसके लक्षण मच्छर के काटने के 4-10 दिन बाद दिखाई देते हैं। इसके लक्षणों में व्यक्ति को तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द और शरीर पर फुंसियां हो जाती हैं। विश्व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के अनुसार, डेंगू होने पर खून में तेजी से संक्रमण फैलता है। इस वजह से मरीज को अस्‍पताल में भर्ती कराना जरूरी हो जाता है। इससे बीमारी को समय रहते नियंत्रित किया जा सकता है। डेंगू के इलाज के लिए अभी तक कोई विशेष इंजेक्‍शन और दवा नहीं है। इसमें व्‍यक्ति को सामान्‍य बुखार की ही दवा दी जाती है। इस बीमारी में व्‍यक्ति को अधिक से अधिक आराम करने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही उसे अधिक से अधिक पानी भी पीने को कहा जाता है।
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    डेंगू
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    मलेरिया

    मलेरिया मादा मच्‍छर एनाफिलिस के काटने से होता है। इसके काटने पर मलेरिया के परजीवी लाल रक्त कोशिकाओं में प्रवेश कर बहुगुणित होते हैं। इससे रक्तहीनता (एनीमिया) के लक्षण उभरते हैं। साथ ही चक्कर आना, सांस फूलना, इत्यादि दिखाई देते हैं। इसके अलावा अविशिष्ट लक्षण जैसे कि बुखार, सर्दी, उबकाई और जुखाम जैसी अनुभूति भी देखे जाते हैं। गंभीर मामलों में मरीज मूर्च्छा में जा सकता है। जैसे-जैसे इनकी संख्या बढ़ती जाती है, व्यक्ति को ठंड, गर्मी और पसीना आने की क्रियाएं एक साथ प्रभावित करती हैं।आमतौर पर मलेरिया बस्तियों, तंग गलियों, ग्रामीण क्षेत्रों और महानगरों में भी साफ-सफाई, गंदे पानी और कचरे की निकासी जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं के अभाव के कारण होता है। मलेरिया बुखार में शरीर का तापमान बहुत जल्‍दी-जलदी घटता बढ़ता है, ऐसा लगातार होने पर रक्त की जांच करवानी चाहिए।
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    मलेरिया
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    चिकनगुनिया

    यह मानव में एडिस मच्छर के काटने से प्रवेश करता है। यह विषाणु ठीक उसी लक्षण वाली बीमारी पैदा करता है जिस प्रकार की स्थिति डेंगू रोग मे होती है। यह एक तकलीफदेह बीमारी है जिसमें तेज बुखार और जोड़ों में दर्द होता है। यह बीमारी शरीर को कमजोर कर देती है। चिकनगुनिया के मामलों में जोड़ों का दर्द कई हफ्तों तक रहता है या इसके संक्रमण की वजह से गठिया भी हो सकता है। इस बीमारी के इलाज के लिए अभी न तो कोई दवा बनी है और न कोई टीका। इससे बचने का सबसे आसान तरीका यह है कि मच्छरों से बचा जाए। इसमें एक अच्छी बात यह है कि एक बार इस बीमारी का शिकार हो जाने के बाद शरीर में इसकी प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है और अगली बार संक्रमण की आशंका नहीं रहती है।
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    चिकनगुनिया
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    पीतज्वर या यलो फीवर

    पीतज्वर या 'यलो फीवर' एक संक्रामक तथा तीव्र रोग हैं, जो ईडीस ईजिप्टिआई (स्टीगोमिया फेसियाटा) जाति के मच्छरों के द्वारा होता है। इससे पीड़ित व्यक्ति में पीलिया के लक्षण दिखाई देते हैं और लीवर में खराबी आने के वजह से उसकी त्वचा और आंखों का सफेद हिस्सा पीला पड़ जाता है। किसी व्यक्ति में इस वायरस का संक्रमण हो जाने के कुछ दिन बाद ही इस बारे में पता चल पाता है। इसमें मृत्युदर 50 फीसदी है। हालांकि इसके लिए दवा और टीका आदि बना हुआ है लेकिन इसे ठीक होने में कुछ दिन लगते हैं। यह रोग कर्क तथा मकर रेखाओं के बीच स्थित अफ्रीका तथा अमरीका के भूभागों में अधिक होता है।
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    पीतज्वर या यलो फीवर
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    ला क्रोसे इंसेफलाइटिस (एलएसी)

    यह काफी दुर्लभ बीमारी है। अमेरिका में हर साल इसके केवल 80-100 मामले सिर्फ बच्‍चों में ही सामने आते हैं। यह वुकेरेरिया वैनक्रोफिट नामक मच्छर के काटने से फैलता है। इससे पीड़ित व्‍यक्ति को बुखार, सिरदर्द, मितली, उल्टी, थकान और सुस्ती होती है। इसके बहुत अधिक गंभीर होने पर कब्ज, बेहोशी और लकवे की शिकायत हो सकती है। इसका शुरुआती स्तर पर इलाज लाभदायक हो सकता है। लेकिन इसके कृमि के वयस्क हो जाने पर उस पर दवाओं का प्रभाव नहीं पड़ता।
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    ला क्रोसे इंसेफलाइटिस (एलएसी)
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    मच्‍छरों से बचें बीमारी से बचें

    इन सब बीमारियों से बचने के लिए मच्‍छरों से बचना बहुत जरूरी है। इसके लिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि मच्‍छर आखिर किस तरह का व्यवहार करते हैं। साथ ही रात में पूरी बांह के कपड़े पहन कर सोना चाहिए। और अगर संभव हो तो दिन के समय भी पूरी बांह के कपड़े पहनें, इससे मच्‍छरों से बचाव होगा।  
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    मच्‍छरों से बचें बीमारी से बचें
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    मच्‍छरों से बचाव के उपाय

    मच्‍छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी और कीटनाशकों का छिड़काव करें साथ ही अपने घर और आस पास का वातावरण साफ-सुथरा और सूखा रखें ताकि मच्छर पनपे नहीं। यदि संभव हो तो घरों की खिड़कियों व दरवाजों पर जाली लगवाएं ताकि मच्छर घर के अंदर न आएं।
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    मच्‍छरों से बचाव के उपाय
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