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सेक्‍सुअल परफार्मेंस की चिंता को कैसे करें दूर

By:Pradeep Saxena, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Apr 07, 2014
सेक्‍सुअल परफॉरमेंस को लेकर डर पुरूष और महिला दोनों को ही सताता है। लेकिन इसको लेकर डरने की जगह इससे बचने के उपाय करने चाहिए। इस स्‍लाइड शो में कुछ ऐसे टिप्‍स हैं जो सेक्‍सुअल परफॉरमेंस की चिंता पर काबू पाने में आपकी मदद कर सकते हैं।
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    सेक्‍सुअल परफॉरमेंस की चिंता

    सेक्‍सुअल परफॉरमेंस को लेकर अक्‍सर लोगों के मन में यह डर बना रहता है कि क्‍या हम अपने पार्टनर की उम्‍मीदों को पूरा कर पायेंगे। यह ऐसा डर है जो पुरूष और महिला दोनों को ही सताता है। लेकिन इस बारे में सोचने और इससे डरने का कोई फायदा नहीं। इस स्‍लाइड शो में कुछ ऐसे टिप्‍स हैं जो आपको सेक्‍सुअल परफॉरमेंस की चिंता पर काबू पाने में मदद कर सकते हैं।

    सेक्‍सुअल परफॉरमेंस की चिंता
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    पार्टनर से बात

    अपनी सेक्‍सुअल परफॉरमेंस से जुड़ी चिंताओं के बारे में अपने पार्टनर से बात करें। उसे बताएं कि आप इसके लिए कितना संघर्ष कर रहे हैं। बात करने से आपकी चिंता कम होती है और इसके संभावित कारणों का भी पता चलता है।

    पार्टनर से बात
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    पॉजिटिव सोचें

    अपने पार्टनर के साथ सेक्‍सुअल होने पर नेगटिव चीजों को दिमाग से निकालकर पॉजिटिव बातों पर ध्‍यान दें। सेक्‍स संबंध बनाते समय उन बातों को ध्‍यान देना चाहिए जो आपको अच्‍छी लगती हैं। इससे सेक्‍सुअल परफॉरमेंस को लेकर चिंता कम हो जाएगी।

    पॉजिटिव सोचें
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    आत्‍मविश्‍वास

    आत्मविश्वास में कमी सेक्‍सुअल परफॉरमेंस में चिंता के आने का सबसे बड़ा कारण है। अगर आप हर समय सेक्‍सुअल परफॉरमेंस को लेकर चिंता में रहेंगे तो सब कुछ ठीक होते हुए भी आपकी परफॉरमेंस कम ही रहेंगी। सेक्‍स तन से ज्‍यादा मन से जुड़ी प्रक्रिया है। इसलिए सबसे पहले आत्‍मविश्‍वास लाएं।

    आत्‍मविश्‍वास
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    फोरप्‍ले को इजॉय करें

    सेक्‍स में फोरप्‍ले के इजॉय पर ध्‍यान देने से भी सेक्‍सुअल परफॉरमेंस की चिंता को कम किया जा सकता है। फोरप्‍ले में आप अपने पार्टनर के साथ इतना खो जाते हैं कि आपको कोई और चिंता नहीं रहती। इस समय आपका लक्ष्‍य साथी के इंजाय करना होना चाहिए न कि सिर्फ संभोग करके साथी के साथ समझौता करना। सफल सेक्स का मतलब सिर्फ चरम तक पहुंचना ही नहीं होता है।

    फोरप्‍ले को इजॉय करें
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    थोड़ा ब्रेक लें

    सेक्‍सुअल परफॉरमेंस को लेकर चिंता होने पर सेक्‍सुअल क्रियाओं के दौरान थोड़ा ब्रेक ले लेना चाहिए। ज्‍यादा समय सेक्‍स न होने से प्रदर्शन के साथ जुड़े दबाव और चिंता से छुटकारा मिल सकता है और अगली बार अंतरंग होना आपको ज्‍यादा उत्‍सुक बना देगा।

    थोड़ा ब्रेक लें
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    डॉक्‍टर से संपर्क करें

    सबसे पहले चेकअप द्वारा शारीरिक समस्‍या के बारे में जानें। चेकअप द्वारा जानें कि आखिर किस कारण ऐसा हो रहा है। अगर आपका पार्टनर भी सेक्‍स के दौरान दर्द का अनुभव करता है, तो यह चेकअप विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है। अपने डॉक्‍टर को अपनी समस्‍या के बारे में सही जानकारी दें, इसमें शरमाने की कोई जरूरत नहीं।

    डॉक्‍टर से संपर्क करें
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    पार्टनर के लिए बेस्‍ट बनें

    सेक्‍स के दौरान अधिकतर लोग यह सोचते रहते हैं कि उनका पार्टनर उनके बारे में क्या सोचेगा या सोच रहा हैं। साथ ही यह भी कहीं वह अपने साथी की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा तो इसका असर उसकी सेक्‍सुअल परफॉरमेंस पर पड़ेगा। ये सब सोचने की जगह उन बातों के बारे में सोचें, जानें और करें, जो आपको आपके पार्टनर के लिए बेस्ट बनाती हैं।

    पार्टनर के लिए बेस्‍ट बनें
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    सेक्‍स को इंजॉय करें

    सेक्‍सुअल परफॉरमेंस को लेकर चिंता बने रहने के कारण अक्‍सर लोग सेक्‍स को इंजॉय नहीं कर पाते। इसलिए जरूरी है कि कुछ और सोचने से ज्यादा सेक्स का पूरा आनंद लें। अगर आप पूरी प्रक्रिया को इंजॉय करेंगे तो आपका साथी भी इसका लुत्‍फ उठा पाएगा और आपकी चिंता भी जाती रहेगी।

    सेक्‍स को इंजॉय करें
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    पार्टनर को संभोग के लिए प्रेरित करें

    अगर आपकी समस्‍या इरेक्शन से जुड़ी हैं तो एक दूसरे को संतुष्‍ट करने के नए तरीके ढूढ़ें। इसके लिए पार्टनर को उत्तेजित करने के लिए उसके प्राइवेट पार्ट को हाथों से छुएं, ओरल सेक्‍स करें या कोई कामुक फिल्‍म देखते समय एक दूसरे का हाथ पकड़ लें। इससे आप संभोग के लिए अपने आप तैयार हो जाएगें। सेक्‍स क्रिया को स्वाभाविक रूप से होने दे इसके लिए कोई टाईम टेबल सेट न करें।

    पार्टनर को संभोग के लिए प्रेरित करें
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    "टॉक थेरेपी"

    अगर आपकी चिंता का समाधान सेल्फ हेल्प तकनीक से नहीं होता है, तो आपको किसी मनोवैज्ञानिक से परामर्श लेना चाहिए। समस्‍या को सही तरीके से बताने से विशेषज्ञ इससे जुड़े विशिष्ट मुद्दों पर काबू पाने में आपकी मदद करेंगे। इसके लिए वह "टॉक थेरेपी" का सहारा लेता हैं। इस थेरेपी के माध्‍यम से वह दोनों पार्टनर को अपनी भावनाओं को बताने को मौका देता हैं जिससे वह बात सकें कि कैसे चिंता उनकी सोच और शारीरिक अंतरंगता को प्रभावित करती हैं।

    "टॉक थेरेपी"
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