टेस्टोस्टेरोन शरीर को कुछ इस तरह करता है प्रभावित

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Oct 09, 2015

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टेस्टोस्टेरोन एक ऐसा मेल हार्मोन है जो शरीर में प्रजनन प्रणाली और कामुकता से लेकर मांसपेशियों और बोन डेंसिटी तक सभी को प्रभावित करता है। इसके प्रभाव के बारे में जानने के लिए यह स्‍लाइडशो पढ़ें।
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    टेस्टोस्टेरोन का शरीर पर प्रभाव

    टेस्टोस्टेरोन एक बेहद जरूरी मेल हार्मोन है। टेस्टोस्टेरोन का स्तर यौवन के दौरान बढ़ता है और युवावस्था के दौरान अधिक होता है। 30 साल की उम्र के बाद किसी पुरुष के टेस्टोस्टेरोन के स्तर में हर साल थोड़ी गिरावट होना सामान्य बात होती है। अधिकांश पुरुषों में पर्याप्त मात्रा से अधिक ही टेस्टोस्टेरोन होता है। लेकिन कई बार ऐसा भी संभव है कि शरीर बहुत कम टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन करने लगे। इससे अल्पजननग्रंथिता (हायपोगोनडिस्म) हो सकता है। जिसका उपचार हार्मोन चिकित्सा से किया जा सकता है। टेस्टोस्टेरोन का स्तर शरीर में प्रजनन प्रणाली और कामुकता से लेकर मांसपेशियों और बोन डेंसिटी तक सभी को प्रभावित करता है। यह कुछ प्रकार के व्यवहार में भी अहम भूमिका निभाता है।
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    त्वचा और बालों पर

    एक पुरुष में बचपन से लेकर युवा होने तक होने वाले बदलावों में, टेस्टोस्टेरोन चेहरे, बगल में और गुप्तांग के आस-पास के बालों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका रखता है। बाल हाथ, पैर, और छाती पर भी विकसित हो सकते हैं। कम टेस्टोस्टेरोन स्तर वाला कोई पुरुष बाल झड़ने की समस्या से भी जूझ सकता है। इससे बचने के लिये टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की जाती है, लेकिन इसके भी कुछ साइडइफेकट हो सकते हैं, जैसे मुंहासे और स्तनों में वृद्धि आदि। टेस्टोस्टेरोन पैच त्वचा में मामूली जलन पैदा कर सकते हैं।
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    एन्डोक्राइन सिस्टम (अंत: स्रावी प्रणाली) पर

    शरीर की अंत: स्रावी प्रणाली में वे ग्रंथियां होती हैं जोकि हार्मोनों का निर्माण करती हैं। मस्तिष्क में स्थित हाइपोथेलेमस (hypothalamus), पिट्यूटरी ग्रंथी (pituitary gland) को बताता है कि शरीर को कितने टेस्टोस्टेरोन की जरूरत है। इसके बाद ही पिट्यूटरी ग्रंथि, अंडकोष को संदेश भेजती है। अधिकांश टेस्टोस्टेरोन का अंडकोष में ही उत्पादन होता है, लेकिन इसकी कुछ मात्रा अधिवृक्क ग्रंथि (adrenal glands) से भी आती है, जोकि ठीक गुर्दे के ऊपर स्थित होती है। महिलाओं में अधिवृक्क ग्रंथि और अंडाशय टेस्टोस्टेरोन की थोड़ी मात्रा उत्पादित करते हैं। यहां तक कि किसी लड़के के पैदा होने से पहले भी टेस्टोस्टेरोन पुरुष जननांगों को बनाने का काम कर रहा होता है। यौवन के दौरान भी टेस्टोस्टेरोन ही पौरुष गुणों, जैसे भारी आवाज़, दाढ़ी, और शरीर के बाल आदि के विकास के लिये उत्तरदायी होता है। साथ ही यह मांसपेशियों और सेक्स ड्राइव को भी बढ़ावा देता है।
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    मांसपेशियों, वसा और अस्थि के विकास में


    टेस्टोस्टेरोन अधिकांश मांसपेशियों और शक्ति के विकास में भी एक मुख्य कारक होता है। टेस्टोस्टेरोन न्यूरोट्रांसमीटर को बढ़ाता है, जोकि ऊतक विकास को प्रोत्साहित करता है। यह डीएनए में परमाणु रिसेप्टर्स के साथ भी सूचना का आदान प्रदान करता है, जो प्रोटीन संश्लेषण (protein synthesis) कराते हैं। टेस्टोस्टेरोन वृद्धि हार्मोन का स्तर बढ़ाता है, जो मांसपेशियों का निर्माण करने के लिए एक्सरसाइज को और कारगर बनाते हैं। टेस्टोस्टेरोन अस्थि घनत्व को बढ़ाता है और अस्थि मज्जा को लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करने के प्रोत्साहित करता है। इसलिये ही जिन पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बहुत कम होता है, उनमें हड्डी टूटने व फ्रैक्चर होने की आशंका अधिक होती है। टेस्टोस्टेरोन वसा के चयापचय में भी भूमिका निभाता है, ताकि पुरुष आसानी से फैट बर्न कर पाएं। टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होने पर शरीर में वसा में वृद्धि हो सकती है।
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    लैंगिकता पर


    यौवन के दौरान, टेस्टोस्टेरोन का बढ़ता स्तर अंडकोष, लिंग और जघन बाल गुप्तांग के आस-पास के बालों के विकास को प्रोत्साहित करता है। इससे आवाज गहरी होने लगती है और मांसपेशियों और शरीर के बालों का विकास होता है। इन परिवर्तनों के साथ-साथ सेक्स की इच्छा भी बढ़ती है। टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होने पर किसी पुरुष की सेक्स के लिए इच्छा कम हो सकती है या खतम भी हो सकती है। हालांकि यौन उत्तेजना और यौन गतिविधि टेस्टोस्टेरोन स्तर में वृद्धि करती है। लंबे समय तक संभोग न करने पर टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है। टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होने पर स्तंभन दोष (erectile dysfunction) भी हो सकता है।
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