जानें कितने समय तक चलती है दांतों की फिलिंग

By:Aditi Singh , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 13, 2016

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कैविटी हो जाने पर दांतो की भराई की जाती है। ये भराई धातुंओं से लेकर कम्पोजिट औऱ जैव सक्रिय शीशे आदि से की जाती है। ये फिलिंग के बारे में विस्तार से जानने के लिए ये स्लाइडशो पढ़े।
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    दांतों की भराई

    पहले अधिकतर डैंटिस्ट्स चांदी या सोने को फिलिंग के लिए इस्तेमाल किया करते थे। धातु की इन फिलिंग्स का एक नुकसान है कि ये सफेद दांतों के बीच साफ दिखाई देते हैं साथ ही चांदी में मरकरी होने की वजह से ये सेहत को भी नुकसान पंहुचाती है। लेकिन अब कम्पोजिट, सैरेमिक तथा एक्रेलिक फिलिंग मैटीरियल आने लगे हैं जो देखनेमें अच्छे लगते हैं। फिलिंग के बाद जब दांत पूरी तरह से सक्रिय हो जाए तब उसकी कैप बनाते हैं और दांत में कैप को फिट कर देते हैं।
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    क्या होती है कम्पोजिट फीलिंग

    कंपोजिट रेजिन बिल्कुल सुरक्षित होता है। इससे न केवल दांतों में बने गड्ढों (कैविटी) को भरा जाता है, बल्कि दांतों के बीच बने छोटे-छोटे गैप को भी भरा जाता है। इसका रंग भी दांतों के रंग जैसा हीं होता है इसलिए यह उन दांतों के छेद को भरने के काम में लाया जाता है जो दिखलाई देते हों जैसे सामने वाले दांत। ये दाग प्रतिरोधी होते हैं लेकिन थोड़े महंगे होते हैं। ये तकरीबन पांच से सात साल तक चलते है।
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    स्टिक मिश्रित राल

    इसका रंग दांतों के रंग जैसा हीं होता है इसलिए इसे उन दांतों में भरा जाता है जो दांत दिखलाई देते है मसलन सामने वाले दांत लेकिन बहुत ज्यादा गहरा छेद भरने के लिए यह उपयुक्त नहीं माना जाता। इसकी फिलिंग करने के बाद यह 3 से 10 साल तक टिक सकता है ।
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    सोने व चांदी की फिलिंग

    सोना काफी लम्बे समय तक टिकता है।यह 20साल से भी ज्यादा टिक सकता है। कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक फिलिंग के लिए यह सबसे उपयुक्त होता है लेकिन चूँकि यह बहुत महंगा होता है इसलिए हर कोई इसका उपयोग नहीं कर सकता है। सोना के मुकाबले चांदी सस्ती होती है और संघर्षण के लिए भी यह प्रतिरोधी होता है। लेकिन इसका रंग थोडा काला होता है जिसकी वजह से इससे दांतों की सुन्दरता पर प्रभाव पड़ता है। इसी कारण चांदी युक्त मिश्रण को वैसे दांतों में हीं भरा जाता है जो छिपे रहते हैं यानि सामने से दिखलाई न देते हों।
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    जैव सक्रिय शीशे से भराई

    दांतों की भराई में जैव सक्रिय शीशे का इस्तेमाल न केवल बैक्टीरिया द्वारा दांतों को खराब करने से रोकता है, बल्कि यह दांतों को भराई के दौरान नष्ट हो चुके कई खनिजों की दोबारा आपूर्ति करता है। जैव सक्रिय ग्लास सिलिकॉन ऑक्साइड, कैल्शियम ऑक्साइड और फास्फोरस ऑक्साइड के यौगिकों से मिलकर बनाया गया है, जो देखने में शीशे के चूर्ण की तरह लगता है।
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