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अति संवेदनशील लोगों को मदद कर सकते हैं ये टिप

By:Bharat Malhotra, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Mar 22, 2014
कोई भी चीज जब अधिक हो जाए तो वह आपको नुकसान पहुंचा सकती है। संवेदनशीलता भी इसका अपवाद नहीं। अति संवेदनशीलता से ग्रस्‍त लोगों को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आप इनका सामना मानसिक दृढ़ता और कुछ अन्‍य उपायों के जरिये कर सकते हैं।
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    संवेदनशीलता सही, पर अति है बुरी

    संवेदनशीलता शारीरिक और मानसिक दोनों हो सकती हैं। संवेनदशील होना अच्‍छा है, लेकिन इसकी अति बहुत बुरी होती है। शारीरिक रूप से अति संवेदनशील व्‍यक्ति जहां बार-बार बीमार पड़ता रहता है, वहीं मानसिक संवेदनशीलता से ग्रस्‍त व्‍यक्ति को भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जानें, कैसे इनसे छुटकारा पाया जा सकता है और कैसे खुद को स्‍वस्‍थ रखा जा सकता है।

    संवेदनशीलता सही, पर अति है बुरी
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    दुनिया में काफी लोग हैं सेंसेटिव

    एक अनुमान के अनुसार दुनिया में करीब 15 से 20 फीसदी लोग हाईली सेंसेटिव पर्सनेलिटी से ग्रस्‍त हैं। आज के इस चुनौतीपूर्ण माहौल में ऐसे लोगों के लिए रहना जरा मुश्किल हो जाता है। वे बहुत जल्‍दी तनाव में आ जाते हैं और ऐसे में उनके नर्वस सिस्‍टम पर बुरा असर पड़ता है। हालांकि, ऐसे रास्‍ते मौजूद हैं, जिनका इस्‍तेमाल कर एचएसपी से प्रभावित लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जी सकते हैं।

    दुनिया में काफी लोग हैं सेंसेटिव
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    होती हैं बड़ी मुश्किलें

    अति संवेदनशील लोगों को आम लोगों के मुकाबले अधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ऐसे लोगों को किसी भी चीज से संवेदनशीलता हो जाती है। वे जल्‍दी बीमार पड़ जाते हैं और उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर होती है। उन्‍हें भीड़ में जाने, मौसम में हल्‍के से बदलाव और यहां तक कि लोगों के हल्‍के से संपर्क में आते ही संवेदनशीलता हो जाती है।

    होती हैं बड़ी मुश्किलें
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    भीड़ में जाने से पहले इन बातों का रखें ध्‍यान

    यह एक मानसिक क्रिया है। इसका इस्‍तेमाल आपको शक्ति देता है और आप खुद को अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं। आपको चाहिए कि अपने आसपास रोशनी के एक घेरे को महसूस करें। ऐसा मानें कि यह घेरा आपको तमाम परेशानियों से बचाने में मदद करेगा। इस घेरे को सकारात्‍मकता का एक पुंज मानिये और महसूस कीजिए कि सारी नकारात्‍मकता आपसे दूर है।

    भीड़ में जाने से पहले इन बातों का रखें ध्‍यान
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    अपने व्‍यक्तित्‍व के हिसाब से चुनें करियर

    यदि आप बहुत अधिक संवेदनशील हैं, तो आपको ऐसा करियर चुनना चाहिए जो आपके व्‍यक्तित्‍व के साथ मेल खाता हो। यदि आप घर से ही काम कर सकें तो यह बहुत बढि़या विकल्‍प रहेगा। इससे आपको भीड़, ट्रेफिक और बेकार के शोर-शराबे का सामना नहीं करना पड़ेगा। आप ऑनलाइन बिजनेस को विकल्‍प के रूप में चुन सकते हैं।

    अपने व्‍यक्तित्‍व के हिसाब से चुनें करियर
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    अपने स्‍वभाव के अनुसार बढ़ायें शौक

    आपको ऐसे शौक अपनाने चाहिए जो आपके संवेदनशील स्‍वभाव के साथ सही बैठते हों। आप पेंटिंग, पढ़ना, लिखना, संगीत सुनना, म्‍यूजियम जाना (व्‍यस्‍त दिनों में न जाएं), गार्डनिंग या फिर कोई भी ऐसा काम चुन सकते हैं, जो आपको आकर्षित करता हो।

    अपने स्‍वभाव के अनुसार बढ़ायें शौक
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    ध्‍यान है जरूरी

    आपको ध्‍यान और स्‍व-सम्‍मोहन ऐसे लोगों को काफी मदद कर सकता है। इससे आपको शांत और सकारात्‍मक रुख अपनाने में मदद मिलेगी। इस दौरान आप इस बात पर ध्‍यान केंद्रित कर सकते हैं कि आप नकारात्‍मक ऊर्जा से सुरक्षित हैं।

    ध्‍यान है जरूरी
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    लोगों को बतायें कि आप एचएसपी हैं

    आप दूसरे लोगों को बता सकते हैं कि आप एचएसपी हैं। आप लोगों को संक्षेप में अपने संवेदनशील नर्वस सिस्‍टम के बारे में बता सकते हैं। अपनी इस कमी के बारे में शर्म अथवा झिझक महसूस करने की जरूरत नहीं है। आप जैसे हैं उसे स्‍वीकार कीजिए और उसका आनंद उठाइए।

    लोगों को बतायें कि आप एचएसपी हैं
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    भावनात्‍मक संवेदनशीलता

    कई लोग भावनात्‍मक रूप से काफी कमजोर होते हैं। वे जरा सी बात दिल पर लगा लेते हैं। ऐसे लोगों को भी जीवन में बहुत परेशानी होती है। ऐसे लोग बहुत जल्‍द तनाव में आ जाते हैं और परेशान रहते हैं। छोटी सी बात पर वे रोने लग जाते हैं।

    भावनात्‍मक संवेदनशीलता
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    डर निकालें

    जहां डर है, वहां दर्द है। जहां दर्द है वहीं पर गुस्‍सा, दुख और परेशानी होती है। तो सबसे पहले अपने भीतर छुपे डर को समाप्‍त कीजिए। आपका डर ही आपकी सभी समस्‍याओं की जड़ है। किसी को खोने का डर, किसी के जाने का डर, कोई बात पता लगने का डर और भी जाने क्‍या-क्‍या। यह डर ही आपको चिंता और फिक्र देता है। सबसे पहले इसे अपने भीतर से निकालिये।

    डर निकालें
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    कोई और नहीं है जिम्‍मेदार

    जिम्‍मे‍दारियां लेना शुरू कीजिए। अपने जीवन के लिए किसी दूसरे को जिम्‍मेदार म‍त ठहराइये। आप खुद अपनी हालत के जिम्‍मेदार हैं और इसका दोष किसी दूसरे के सिर मत मढि़ये। जब आप ऐसा करना शुरू करते हैं, तो जीवन से डर समाप्‍त हो जाता है और डर समाप्‍त होते ही सभी चिंतायें मिटने लगती हैं।

    कोई और नहीं है जिम्‍मेदार
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