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वित्‍तीय स्थिति का सेहत पर कैसे पड़ता है असर

By:Meera Roy, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Aug 03, 2015
कहने की जरूरत नहीं है कि हमारी बेहतर वित्तीय स्थिति न सिर्फ हमें आत्मविश्वास से भरती है बल्कि हमें खुश भी रखती है। साथ ही हमारे स्वास्थ्य पर भी वित्तीय स्थिति का गहरा प्रभाव पड़ता है। आइए विस्‍तार से जानते हैं।
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    मनी मैनेजमेंट है जरूरी

    कहने की जरूरत नहीं है कि हमारी बेहतर वित्तीय स्थिति न सिर्फ हमें आत्मविश्वास से भरती है बल्कि हमें खुश भी रखती है। साथ ही हमारे स्वास्थ्य पर भी वित्तीय स्थिति का गहरा प्रभाव पड़ता है। विशेषज्ञों की मानें तो जिनकी वित्तीय स्थिति अच्छी होती है, उनके पास खुश रहने की सैकड़ों वजहें निकल आती हैं। जबकि इसके विपरीत खराब वित्तीय स्थिति हमें हमेशा तनाव से भरा रखती है। ...और तनाव बीमारियों की असली वजह है। सवाल उठता है कि ऐसा क्या किया जाए ताकि वित्तीय स्थिति का हमारे स्वास्थ्य पर कम से कम प्रभाव पड़े। आइये इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

    मनी मैनेजमेंट है जरूरी
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    मनी मैनेजमेंट यानी स्वास्थ्य मैनेजमेंट

    हम अकसर वित्तीय मैनेजमेंट बेहतरीन जीवनशैली के लिए करते हैं। लेकिन शायद आपको इस बात का अंदाजा ही नहीं है कि मनी मैनेज करने से हमारा स्वास्थ्य भी मैनेज होता है। दरअसल जब हम सही तरीके से रूपया व्यय करते हैं उसका सीधा सीधा असर हमारे मानसिक स्थिति पर होता है, जिससे अस्वस्थ होने की आशंका कम हो जाती है।

    मनी मैनेजमेंट यानी स्वास्थ्य मैनेजमेंट
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    ज्यादा आय, बेहतर स्वास्थ्य

    सामान्यतः देखा जाता है कि लोग अपनी ख्वाहिशों को पूरा करने की बजाय पैसा जमा करके रखने को तरजीह देते हैं। जाहिर है जब बैंक अकाउंट में कुछ पैसे हों तो दिल भी खुश रहता है और दिमाग भी संतुष्टि का एहसास करता है। लेकिन आपको इस तथ्य से भी वाकिफ कराना जरूरी है कि जब हम ख्वाहिशों को कुचलकर पैसे जमा करने की सोचते हैं तो उन पैसों के प्रति हमारी चाहत, हमारा सम्मान कम हो जाता है। कहने का मतलब यह है कि संभव हो तो आय का जरिया बढ़ाएं, अपने खर्चों में कटौती न करें। बढ़ी हुई आय बेहतर स्वास्थ्य की सौ फीसदी गारंटी है।

    ज्यादा आय, बेहतर स्वास्थ्य
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    मनी सेक्‍यूरिटी यानी सुकून की नींद

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रति व्यक्ति को प्रतिदिन नियमित 8 घंटे की नींद लेना आवश्यक है। लेकिन वित्तीय स्थिति में अस्थिरता हमारे दिन का चैन और रात की नींद उड़ा देती है। सवाल है ऐसी स्थिति में क्या किया जाए? मनी सिक्युरिटी इसका बेहतरीन जवाब है। अस्थिर वित्तीय स्थिति हमारी मनःस्थिति को गहरे तक प्रभावित करती है जिस कारण नींद न आने की समस्या पनपने लगती है। नींद न आने के कारण सैकड़ों बीमारियां हमें अपने चपेट में ले लेती है। सो, बेहतर होगा कि मनी सिक्युरिटी का इंतज़ाम करें।

    मनी सेक्‍यूरिटी यानी सुकून की नींद
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    सोचो कम, करो ज़्यादा

    हम जितना सोचते हैं, उतना ही तनाव से घिर जाते हैं। यह बात यदि वित्तीय स्थिति पर लागू की जाए तो हालात और भी गंभीर नज़र आएंगे। दरअसल जब हम मूसलसल एक ही विषय में सोचते हैं तो तनाव हमें अपने घेरे में ले लेता है। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि तनाव, डिप्रेशन, स्टेªस आदि समस्याओं की जड़ है। हद तो तब हो जाती है जब व्यक्ति विशेष सोचते सोचते आत्महत्या करने तक की सोचने को बाध्य हो जाता है। यही कारण है कि वित्तीय विषय के जानकार कहते हैं कि सोचने से उपाय नहीं निकलते। कुछ करना आवश्यक है।

    सोचो कम, करो ज़्यादा
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    घुटन से उबारती वित्तीय स्थिति

    जहां एक ओर पैसों की अव्यवस्था और अस्थिरता हमें परेशानियों में डाल देती हैं, वहीं दूसरी ओर ढह चुकी वित्तीय स्थिति हमारा गला घोट देती है। यह स्थिति हमें घुटन से भर देती है। जरूरी है कि अपनी वित्तीय को इस तरह संभालें ताकि इस घुटन से मुक्ति मिल सके। याद रखें कि घुटन जीवन में नकारात्मकता के अलावा और कुछ नहीं परोसते।

    घुटन से उबारती वित्तीय स्थिति
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    पैसों की कमी नहीं, घर में कलेश नहीं

    ‘मुझे पैसा नहीं बस तुम्हारा प्यार चाहिए’ इस तरह के जुमले अकसर प्यार में सुने और बोले जाते हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि बिन पैसे न तो प्यार मिलता है और न ही सुकून। सम्बंध विशेषज्ञों की मानें तो जिन घरों की आय बेहतर होती है, वहां कलेश बहुत कम या कहें न के बराबर होता है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि हम अपनी चाहत अनुसार खर्च कर सकते हैं, एक दूसरे की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। जब हम एक दूसरे के लिए फिक्रमंद होते हैं तो अंदर से खुशी का एहसास होता है जो कि हमें स्वस्थ रखता है। कहने का मतलब यह कि पैसों की कमी नहीं है तो बीमारी भी छूमंतर है।

    पैसों की कमी नहीं, घर में कलेश नहीं
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    पैसों का आघात बन सकता है हृदयाघात

    क्या आप जानते हैं कि हृदयाघात किन्हें होता है? उन्हें जो अकसर तनाव से भरे रहते हैं। पैसों का आघात तनाव की एक बहुत बड़ी वजह है। जीवन में ठगा जाना कोई हैरानी की बात नहीं है। यह जीवन चक्र है। किसी को आप ठगते हैं और कोई आपको ठगता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इस विषय में चिंता शिरोमणि में तब्दील हो जाएं और किसी गंभीर बीमारी को न्यौता दे डालें। शोध अध्ययनों से पता चला है कि पैसों का आघात अकसर हृदयाघात में बदल जाता है। ऐसी स्थिति में मजबूत होना जरूरी है।

    पैसों का आघात बन सकता है हृदयाघात
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    क्या करें, क्या न करें

    पैसों की व्यवस्था करते वक्त एक सूची इसकी भी बनाएं कि क्या करना है और क्या नहीं। दरअसल हमारे मनी मैनजमेंट में सबसे बड़ी खामी यह होती है कि हम क्या करें, तो जान जाते हैं मगर क्या न करें, इस पर गौर नहीं करते। जबकि जो नहीं करना चाहिए, उन्हें करके वित्तीय किल्लत से रूबरू होना पड़ता है। फिर स्थिति वहीं स्वास्थ्य से आकर टकराती है। सो, बेहतर होगा कि क्या न करें कि भी सूची अपने बेहतर स्वास्थ्य के लिए बनाएं।

    क्या करें, क्या न करें
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