गोनोरिया का गर्भवती महिला और शिशु पर प्रभाव

By:Bharat Malhotra, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 23, 2014

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आमतौर पर यह अधिक नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन समय पर इलाज न करने पर यह रोग खतरनाक भी हो सकता है। गर्भावस्‍था के दौरान जिन महिलाओं को गोरोनेरा हो जाता है, उन्‍हें गर्भपात का खतरा काफी बढ़ जाता है।
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    गोनोरिया क्‍या होता है

    गोनोरिया एक गंभीर किंतु नैदानिक यौन संक्रमण है। यह यौनिक, मौखिक और गुदा संभोग द्वारा फैलता है। आमतौर पर यह अधिक नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन समय पर इलाज न करने पर यह रोग खतरनाक भी हो सकता है।

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    कैसे फैलता है

    यह संक्रमण असुरक्षित यौन संबंधों के जरिये फैलता है। असु‍रक्षित यौनिक, मौखिक और गुदा संबंध इस संक्रमण के फैलने के मुख्‍य कारण है। इसके साथ ही संक्रमित महिला से यह रोग उसके होने वाले शिशु को भी लग सकता है।

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    कितने समय में फैलता है

    इस बैक्‍टीरिया को विकसित होने में आमतौर पर दो से दस दिन का समय लग सकता है। गोनोरिया काफी जल्‍दी फैलता है, तो यदि आप किसी संक्रमित साथी के साथ संबंध बनाते हैं, तो आपके इससे प्रभावित होने की आशंका काफी अधिक होती है।

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    बड़ी तादाद

    अमेरिका स्थित सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार अकेले अमेरिका में हर वर्ष गोनोरिया के 8 लाख 20 हजार नये मामले सामने आते हैं। इनमें से 13 हजार 200 गर्भवती महिलायें होती हैं।

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    बढ़ जाता है गर्भपात का खतरा

    गर्भावस्‍था के दौरान जिन महिलाओं को गोरोनेरा हो जाता है, उन्‍हें गर्भपात का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके साथ ही एमनियोटिक थैली और फ्लूड में संक्रमण हो सकता है। साथ ही बच्‍चे का जन्‍म समय से पहले भी हो सकता है। हालांकि इलाज के बाद ये खतरे कम हो जाते हैं।

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    यदि न हो इलाज

    यदि गोनोरिया संक्रमण का इलाज न हो तो इससे एचआईवी होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही कुछ अन्‍य यौन संचारित संक्रमण भी हो सकते हैं। इसके साथ ही बच्‍चे का जन्‍म होने के बाद भी आपको गर्भाशय संक्रमण हो सकता है।

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    आपका रोग छीन सकता है बच्‍चे की आंखें

    यदि आपको लेबर के दौरान गोनोरिया हो, तो इससे आपके बच्‍चे को भी बैक्‍टीरिया का खतरा हो जाता है। नवजात शिशुओं में गोनोरिया आमतौर पर आंखों पर असर डालता है। और आखिरकार इससे बच्‍चे की आंखों की रोशनी भी जा सकती है।

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    बच्‍चे का ध्‍यान रखें

    यदि मां को गोनोरिया तो जन्‍म के साथ ही बच्‍चों की आंखों का इलाज करना चाहिए। इससे उसे भविष्‍य में होने वाले संक्रमण व अन्‍य रोगों से बचाया जा सकता है। यदि इस बात का पता न हो कि मां को यह संक्रमण था अथवा नहीं, तो भी बच्‍चे की नेत्र जांच जरूर करनी चाहिए।

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    अन्‍य अंगों पर असर

    कुछ मामलों में यदि गोनोरिया संक्रमण का इलाज न किया जाए तो यह बच्‍चे के अन्‍य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। इससे बच्‍चे को रक्‍त और जोड़ों में गंभीर संक्रमण हो सकता है। इसके साथ ही उसे दिमागी बुखार जैसे खतरनाक रोग हो सकते हैं।

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    गोनोरिया के लक्षण

    कुछ महिलाओं में इसके लक्षण बिलकुल नजर नहीं आते, इसलिए बिना जांच के इस संक्रमण का पता चल पाना बेहद मुश्किल होता है। लेकिन, कई बार संक्रमण के आधार पर ही इसके लक्षण नजर आते हैं। असामान्‍य योनि स्राव, मूत्र त्‍यागते समय दर्द अथवा जलन और संभोग के समय दर्द होना इसके लक्षण हो सकते हैं। इसके साथ ही गुदा में खुजली, और मल त्‍यागते समय दर्द होना भी गोनोरिया का इशारा हो सकता है।

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    अन्‍य लक्षण

    यदि आपको मौखिक संक्रमण हुआ है, तो आपको गले में सूजन और लालिमा जैसे लक्षण हो सकते हैं। और यदि आपकी आंखें इस बैक्‍टीरिया से प्रभावित हैं, तो आपको आंखों में खुजली, लालिमा और संक्रमण हो सकता है।

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    चिकित्‍सीय सलाह

    यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण नजर आए, तो बिना देर किये डॉक्‍टरी सलाह लें। ऐसा करके आप अपने और अपने होने वाले शिशु दोनों को कई स्‍वास्‍थगत समस्‍याओं से बचा सकती हैं।

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