एड्स की गिरफ्त में कैसे आते हैं लोग

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Feb 01, 2014

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एड्स असुरक्षित यौन संबंध, बिना जांच के खून के इस्‍तेमाल, सं‍क्रमित सुईयों के इस्‍तेमाल और सं‍क्रमित मां से बच्‍चों को हो सकता है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़ें हमारा यह स्‍लाइड शो।
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    क्या है एड्स

    एड्स का पूरा नाम एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशियेन्‍सी सिंड्रोम है। यह अतिसूक्ष्म कीटाणु ह्यूमन इम्यूनोडेफीशीयेन्सी सिन्ड्रोम यानि एचआईवी से होता है। यह वायरस मनुष्य की प्रतिरोधी क्षमता को कमज़ोर कर देता है। एड्स स्‍वयं में कोई बीमारी नहीं है लेकिन इसका मनुष्य की प्रतिरोधी क्षमता को कमज़ोर कर देता है।

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    एड्स की शुरूआत

    एचआईवी पाजीटिव होने का मतलब है, एड्स वायरस आपके शरीर में प्रवेश कर गया है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि आपको एड्स है। एचआईवी पाजीटिव होने के एड्स के लक्षण प्रकट होने में आठ से दस साल या अधिक समय भी लग सकता हैं। एचआईवी शरीर में प्रवेश के बाद धीरे धीरे फैलना शुरु करता है। जब वायरस की मात्रा शरीर में बहुत बढ़ जाती है, उस समय बीमारी के लक्षण प्रकट होते हैं।

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    एड्स के लक्षण

    वैसे तो एड्स के लक्षण अन्‍य बीमारियों में होने वाले लक्षणों जैसे ही होते हैं लेकिन फिर भी इसमें अचानक से वजन में कमी, लगातार बुखार बना रहना, काफी समय तक डायरिया, शरीर में गिल्टियों का बढ़ जाना व जीभ पर भी काफी जख्म आदि हो सकते हैं।

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    नौजवानों में ज्‍यादा खतरा

    आमतौर पर नौजवानों को इस उम्र में यौन और नशीले पदार्थों जैसे नये अनुभवों की तलाश अधिक रहती है। इसलिए इस वर्ग के युवाओं को एड्स का खतरा अन्‍य वर्ग की तुलना में ज्‍यादा रहता हैं।

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    असुरक्षित यौन संबंध से

    एड्स के होने का सबसे प्रमुख कारण है असुरक्षित यौन संबंध। यानि संक्रमित व्‍यक्ति के साथ असुरक्षित संभोग करना। इससे एड्स के वायरस एड्स ग्रस्त व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में तुरंत प्रवेश कर जाते हैं।

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    संक्रमित ब्‍लड से

    ब्लड-ट्रांसफ्यूजन के दौरान शरीर में एचआईवी संक्रमित ब्‍लड के चढ़ाए जाने पर एड्स हो सकता है। या‍नि बिना टेस्‍ट किया हुआ ब्‍लड मरीज को देना भी एड्स फैलाने का कारण होता है। ब्‍लड से इसके वायरस सीधे खून में चले जाते हैं और एड्स का कारण बनते है।

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    संक्रमित इंजेक्शन-सुई से

    एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति पर इस्तेमाल की गए इंजेक्शन-सुई का इस्तेमाल दूसरे व्‍यक्ति में करने से भी एड्स की समस्‍या हो सकती हैं। साथ ही ऐसे लोग जो नशीले पदार्थों का सेवन करते समय एक-दूसरे की इंजेक्शन-सुई का इस्‍तेमाल करते हैं, उनमें कई एड्स से पीड़ित होने के कारण बीमारी फैलाते हैं।

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    संक्रमित मां से बच्‍चों को

    यदि महिला एचआईवी संक्रमित होती है तो गर्भावस्था व डिलीवरी के दौरान या फिर स्तनपान कराने से भी नवजात शिशु को एड्स का खतरा हो सकता है।

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    अन्‍य कारण

    इसके अलावा कुछ कारण ऐसे भी है जिनसे एड्स का खतरा हो सकता है। जैसे, ब्लड या शरीर के अन्य द्रव्यों जैसे वीर्य के एक दूसरे में मिल जाने से, दूसरे लोगों के ब्लेड और टूथ ब्रश का इस्तेमाल करने से भी एचआईवी का खतरा रहता है। (शेव या ब्रश के समय लगे कट से आएं ब्‍लड के कारण ऐसा होता है।)

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    एड्स को लेकर भ्रम

    कई लोगों के मन में एड्स को लेकर कई भ्रम है। लेकिन एड्स कोई रोग नहीं बल्कि एक अवस्था है। एड्स का फैलाव छूने, स्पर्श, साथ खाने, उठने और बैठने, एक-दूसरे का कपड़ा इस्तेमाल करने से नहीं होता है। यह बीमारी छुआछूत की नहीं है।  इस बीमारी को लेकर समाज में कई भ्रम हैं जिन्हें दूर करना बहुत जरूरी है।

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