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अस्थमा रोगियों को स्मॉग नहीं करेगा परेशान, इन टिप्स से मिलेगा निदान!

By:Devendra Tiwari , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 30, 2015
ठंड का मौसम शुरू होते ही अस्‍थमा रोगियों की मुसीबतें बढ़ जाती हैं। लेकिन ठंड में प्रदूषण का परिणाम यानी स्‍मॉग जानलेवा साबित हो सकता है। इस स्‍लाइड शो में हम बता रहे हैं दमा के रोगी स्‍मॉग से कैसे बचें।
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    स्मॉग और अस्थमा

    ठंड का मौसम शुरू होते ही दमा के रोगियों की मुसीबतें बढ़ जाती हैं। लेकिन वर्तमान में दमा रोगियों की मुसीबतें न केवल बढ़ी हैं बल्कि यह जानलेवा भी हो रही हैं। क्योंकि बढ़ते प्रदूषण के कारण ठंड के मौसम में स्मॉग हावी हो जाता है।  जिसके चलते दमा और सांस के मरीजों को सांस लेना दूभर हो जाता है। स्मॉग स्वस्थ आदमियों को तो बीमार कर ही रहा है साथ ही अस्थमा के रोगियों के लिए तो ये श्राप साबित होता है। स्मॉग में छिपे केमिकल के कण अस्थमा के अटैक की आशंका को और ज्यादा बढ़ा देते हैं। स्मॉग से फेफड़ों तक हवा पहुंचाने वाली ट्यूब में रुकावट, सूजन, रूखापन या कफ आदि के कारण भी समस्या होती है। आइए इसके बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं।

    Image Source : Getty

    स्मॉग और अस्थमा
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    क्या है स्मॉग

    स्मॉग ठंड के समय होता है। जब कोहरा हवा में मौजूद प्रदूषण के संपर्क में आता है तब हवा में बढ़ते प्रदूषण के कारण स्मॉग यानी धूल-कोहरा होता है। स्मॉग में कोहरे के साथ प्रदूषण से निकलने वाले सल्फबर डाईऑक्साकइड, नाइ्ट्रोजन डाइऑक्साइड और कारखानों से निकलने वाले हानिकारक केमिकल जैसे- कॉर्बन-मोनोऑक्साइड सांस के जरिये शरीर में प्रवेश करते हैं और सेहत को काफी नुकसान पहुचाते हैं।

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    क्या है स्मॉग
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    भारत में दमा की स्थिति

    विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट की मानें तो भारत में दमा के रोगियों की संख्या 1.5 से 2 करोड़ के बीच है। जिनमें एक अनुमान के अनुसार 10 से 15 प्रतिशत 5 से 11 वर्ष तक के बच्चे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि उनके शरीर की रोग-प्रतिरोधक प्रणाली पूरी तरह से विकसित नहीं होती। प्रदूषण और कारखानों से निकलने वाले केमिकल में कॉपर, कैडमियम, लैड, मैंग्नीज़, ज़िंक, सोडियम और पोटेशियम जैसे तत्व होते हैं जो बच्चों के विकास को अवरुद्ध कर देते हैं। दमा के जिन रोगियों के एयरवेज हाइपरएक्टिव होते हैं, इन प्रदूषण तत्वों से ब्रांकियल मकोसा को तकलीफ होती है और श्वांस प्रणाली में सूजन आ जाती है।

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    भारत में दमा की स्थिति
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    हवा की गुणवत्ता देखें

    अस्थमा के रोगियों को स्मॉग से बचने के लिए यह बहुत जरूरी है कि वे जिस जगह पर रहते हैं वहां की हवा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी रखें। इसके लिए वे समाचार-पत्रों की मदद ले सकते हैं। अगर आपके इलाके की हवा अधिक प्रदूषित है तो घर के अंदर ही रहने की कोशिश करें और अगर बाहर जाना जरूरी है तो पूरी सतर्कता का पालन करें।

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    हवा की गुणवत्ता देखें
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    घर पर ही व्यायाम करें

    सर्दियों के मौसम में दिन छोटा होता है, ऐसे में अगर आप बाहर व्यायाम के लिए जाना चाहते हैं तो कोशिश करें कि सुबह जल्दी व्यायाम कर लें। क्योंकि सूर्य की किरणों के साथ स्मॉग और भी खतरनाक हो जाता है। ऐसे में घर के अंदर ही व्यायाम करें। घर के बाहर पार्क में जाकर व्यायाम करने से बचें। इसके अलावा जितना हो सके घर के अंदर ही रहें।

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    घर पर ही व्यायाम करें
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    बहुत जरूरी है मास्क

    अस्थमा के रोगियों को खासकर बच्चों को स्मॉग से बचने के लिए मॉस्क पहनायें। अगर वे घर से बाहर जा रहे हैं तो बिना मॉस्क के न जायें। जो बच्चे अस्थमा से पीडि़त हैं उनके लिए यह मौसम अधिक खतरनाक होता है। इसलिए बच्चों को अच्छी गुणवत्ता वाले मास्क पहनायें।

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    बहुत जरूरी है मास्क
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    एअर प्‍यूरीफायर भी है जरूरी

    ठंड के मौसम में अस्थमा के रोगियों के लिए घर के बाहर की ही नहीं बल्कि घर के अंदर की हवा भी सुरक्षित नहीं है। ऐसे में घर के अंदर की हवा साफ करने के लिए एअर फ्रेशनर घर पर लगायें। जब भी खिड़की या दरवाजे खोलें पहले बाहर की हवा की गुणवत्ता जांच लें। अगर जरूरी न हो तो दरवाजे और खिड़की बंद रखें। अगर समस्या अधिक हो रही हो तो चिकित्सक से जरूर संपर्क कर लीजिए।

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    एअर प्‍यूरीफायर भी है जरूरी
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