अकेले ट्रेवेल करने से बहुत कुछ सिखती है महिला

By:Meera Roy, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 09, 2015

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अकेले यात्रा करने का अपना अलग ही अनुभव है, अगर कोई महिला अकेले कहीं ट्रेवेल करती है तो वह कई बातें सीखती हैं जो उसके जीवन से जुड़ी हैं, आइए इस स्‍लाइडशो में उन बातों के बारे में जानते हैं।
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    अकेले ट्रेवेल के फायदे

    बहुत कम ही ऐसी महिलाएं देखी जाती हैं जो अपनी नीरस जि़ंदगी में हलचल भरने के लिए अकेले सफर पर निकल पड़े। निश्चित रूप से महिलाओं को ऐसा करने के लिए हिम्मत चाहिए। लेकिन जब वे अकेले किये हुए अपने इस सफर से घर की ओर लौटती हैं, तब वे अकेली नहीं होतीं। उनके साथ बहुत कुछ आता है। सिर्फ अनुभव कहना सही नहीं होगा। यह एक अकेला किया गया सफर उन्हें एक नए सांचें में ढाल देता है।

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    आंतरिक ताकत

    अकेले किये गए सफर से जो सबसे बड़ा लाभ हासिल होता है, वह है कि आंतरिक ताकत। जबकि अन्य महिलाओं में आतंरिक ताकत की काफी कमी होती है। आंतरिक ताकत उन्हें न सिर्फ आत्मविश्वास से भरता है बल्कि अजनबियों पर भरोसा करना भी सिखाता है और अनजानों को पहचानने की कला में माहिर भी करता है।

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    चुनौतियों को समझना

    अकेले घूमने से ही पता चलता है कि जिंदगी चुनौतियों का दूसरा नाम है। अकसर किसी पर आश्रित रहना या किसी का साया हमेशा सिर पर होना, हमें आत्मर्भिर बनाने से रोकता है। चुनौतियों को परखने की समझ विकसित नहीं होने देता है। जबकि अकेले किये सफर की बदौलत हम इस खूबी से वस्ता हो जाते हैं। चुनौतियों को कबूल करने लगते हैं। उनका सामना करने की हिम्मत भी हासिल कर लेते हैं।

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    अजनबियों की कहानियां


    अकेले किये गए सफर में असंख्य अजनबियों से मुलाकात होती है। जिन अजनबियों पर हम भरोसा करने से भी डरते हैं, अजनबियों की मदद तक लेना पसंद नहीं करते। अकेले किये गए सफर के कारण यह हिचक, यह अटकन जीवनभर के लिए समाप्त हो जाती है। मन में अजनबियों के लिए बैठा भय जैसे छूमंतर हो जाता है। यहां तक कुछ ऐसे लोग भी सफर के दौरान मिल जाते हैं जिन्हें हो सकता है आप ताउम्र किसी कहानी के रूप में याद रखें।

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    ‘मेरा गम’ बहुत कम

    अकेले सफर से ही इस बात का पता चलता है कि यह दुनिया विभिन्न किस्म की परेशानियों से जूझ रही है। हर व्यक्ति के पास अपनी परेशानी है। सामान्यतः लड़कियां छोटी छोटी वजहों से घर में कलह का माहौल पैदा कर देती हैं । लेकिन अकेले घूम कर आयी महिला इस तरह की कलह से बचने की कोशिश करती है। दरअसल इनकी सोच का मापदण्ड बदल चुका है।

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    प्राथमिकताएं पता होती है

    आमतौर पर लड़कियों की प्राथमिकता उसका परिवार, जाब, माता-पिता, बच्चे आदि होते हैं। लेकिन जब वह अकेले किसी सफर पर होकर आती है तब उसे यह चीजें छुटपुट लगती हैं। वह इन्हें प्राथमिकता नहीं देती वरन वे अपने नए सपने गढ़ती हैं। उनका पीछा करना ही उसका लक्ष्य बन जाता है। वह अकेले घूमना चाहती है, दुनिया को जानना चाहती है, लोगों से मिलना चाहती है, प्रकृति को पहचानना चाहती है। ये सब उसकी प्राथमिकता बन जाती है।

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    ‘प्यार’ और ‘आज़ादी’ के मायने समझना

    अकेले सफर करने से यह भी पता चल जाता है कि आज़ादी किसे कहते हैं? सही मायनों में आज़ादी एक जिम्मेदारी है, इसका पता चल जाता है। इसे संभालना एक चुनौती है, एहसास हो जाता है। इतना ही नहीं अकेला किया सफर प्यार को और भी करीब से महसूस करना सिखा देता है। दरअसल सफर के दौरान घर बहुत याद आता है, जो नज़दीक जाने के बाद एहसास को दुगना कर देता है।

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