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हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी और प्राकृतिक थेरेपी के बीच है ये अंतर

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Apr 11, 2016
महिलाओं की रजोनिवृत्ति के लक्षणों में सुधार लाने के लिए उन्हें हॉर्मोन की खुराक भी दी जाती है, जिसमें पारंपरिक हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी का ज्यादा इस्तेमाल होता है' चलिये जानें हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी व बायोआईडेंटिकल थेरेपी में अंतर।
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    क्या हैं प्राकृतिक और हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी

    एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन प्रजनन हॉर्मोन होते हैं, जिनका स्तर रजोनिवृत्ति के दौरान महिलाओं में बेहद कम हो जाता है। इन हॉर्मोन के घटते स्तर के कारण महिलाओं को कुछ दिक्कतों जैसे, योनि के रूखेपन, मूत्राशय संक्रमण, नींद में कमी, गर्भाशय संक्रमण आदि का सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि महिलाओं की रजोनिवृत्ति के लक्षणों में सुधार लाने के लिए उन्हें हॉर्मोन की खुराक भी दी जाती है। ऐसी स्थिति में पारंपरिक हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी) का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। रजोनिवृत्ति की समस्याओं से बचाव के लिये एचआरटी के अलावा बायोआइडेंटिकल हॉर्मोन थेरेपी या नेचुरल थेरेपी आदि का  इस्तेमाल भी किया जाता है।
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    क्या हैं प्राकृतिक और हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी
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    प्राकृतिक थेरेपी

    बायोआइडेंटिकल अर्थात प्राकृतिक हार्मोन वे हॉर्मोन होते हैं, जो रासायनिक रूप से शरीर के बनाये हॉर्मोन जैसे ही होते हैं। कई बार इन हॉर्मोन की संरचना हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी में प्रयुक्त हॉर्मोन्स जैसी होती है। किसी लैब के बजाए पौधों या जानवरों से मिलने की वजह से इन्हें, प्राकृतिक हॉर्मोन कहा जाता है। हालांकि इनमें से कुछ उत्पादों को बायॉइडेंटिकल बनाने के लिए व्यावसायिक रूप से प्रसंस्कृत (प्रोसेस्ड) करने की जरूरत पड़ती है।
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    प्राकृतिक थेरेपी
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    हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी)

    रजोनिवृत्ति के दौरान महिलाओं में, काफी प्रचलित हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी में भी कुछ प्राकृतिक हॉर्मोन, जैसे ईस्ट्रेस, क्लीमारा और विवेली-डॉट जिनमे एस्ट्रोजन, प्रोमेट्रियम (पौधों से प्राप्त एक प्राकृतिक प्रोजेस्ट्रोन) उपयोग में लाए जाते हैं। हालांकि, प्राकृतिक हॉर्मोन और एचआरटी में प्रयुक्त हॉर्मोन में फर्क होता है।
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    हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी)
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    हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी व बायोआईडेंटिकल थेरेपी

    हर महिला की स्थिति के हिसाब से उनमें बायोआइडेंटिकल हॉर्मोन की मात्रा भिन्न होती है। हालांकि, हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के दौरान हॉर्मोन की एक मानक मात्रा दी जाती है। हॉर्मोन डोज़ को महिला की स्थिति और जरुरत के हिसाब से कम्पाउंडिंग फार्मेसी द्वारा बनाया जाता है। मानक के हिसाब से नहीं होने के चलते एचआरटी के मुकाबले बायोआईडेंटिकल हॉर्मोन में डॉक्टरी जांच ज्यादा होती है। प्राकृतिक हॉर्मोन थेरेपी के नकारात्मक प्रभावों व लक्षणों पर कम असर का जोखिम ना लेने के लिए डॉक्टर अक्सर एचआरटी की सलाह देते हैं। लेकिन आपके लिये सबसे बेहतर है कि आप रजोनिवृत्ति के बाद अपने हॉर्मोन टेस्ट, मेडिकल रिकॉर्ड और डॉक्टरी सलाह के अनुसार ही किसी हॉर्मोन थेरेपी का चुनाव करें।  
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    हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी व बायोआईडेंटिकल थेरेपी
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