एचआईवी/एड्स जागरुकता फैलाते विज्ञापन

By: ओन्लीमाईहैल्थ लेखक, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Apr 22, 2013

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विज्ञापन का मकसद होता है लोगों को जागरूक करना। आइए हम आपको ऐसे ही विज्ञापनों के बारे में बताते है जिनसे एचआईवी को जागरूकता मिली हैं।
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    डर से आंकड़ों के जरिए लड़ें जंग

    सन् 1980 में शुरू हुए इस विज्ञापन का मकसद लोगों को एचआईवी के बारे में जानकारी देना था। यह कैम्‍पेन लोगों के भ्रम को तोड़ने के इरादे से ही शुरू किया गया था। उस समय तक कई लोग यह सोचते थे कि एचआईवी हाथ मिलाने से भी फैल सकता है।

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    कण्‍डोम हमेशा

    हालांकि यह विज्ञापन एड्स को केंद्र में रखकर नहीं बनाया गया था, लेकिन इसमें कण्‍डोम के इस्‍तेमाल और सुरक्षित सेक्‍स के बारे में बात की गई थी। असुरक्षित सेक्‍स एचआईवी वायरस के फैलने का सबसे बड़ा कारण है। इसके बाद संक्रमित सुइयों का नंबर आता है।

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    जो बोला वही सिंकदर

    इस विज्ञापन को जन आंदोलन की शक्‍ल दी गई। बीबीसी ट्रस्‍ट की ओर से साल 2007 में लॉन्‍च किए गए इस विज्ञापन में भारतीयों को कण्‍डोम के बारे में खुलकर बात करने के लिए प्रोत्‍साहित किया गया था। इस विज्ञापन में एक हरे तोते के जरिए यह बात कही गयी थी 'जो बोला वही सिंकदर'। यह विज्ञापन काफी समय तक चलता रहा।

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    कण्‍डोम बिंदास बोल

    यह विज्ञापन भारत में वर्ष 2006 में लॉन्‍च किया गया था। यह विज्ञापन विशेष रूप से उत्तर भारत के बाजार को खयाल में रखते हुए बनाया गया था। इसमें कण्‍डोम खरीदने के लिए लोगों के मन में बैठी झिझक को दूर करने का प्रयास किया गया था। इस विज्ञापन में कई परिस्थितियों को ऐसे हल्‍के-फुलके दिखाया गया था, जो व्‍यक्ति को सार्वजनिक रूप से कण्‍डोम शब्‍द का इस्‍तेमाल करने के लिए प्रोत्‍साहित करती थीं। इस विज्ञापन के जरिए कण्‍डोम शब्‍द के इस्‍तेमाल को लेकर लोगों के मन में बैठी झिझक को दूर करने के प्रयास किए गए थे।

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