बड़ी उपलब्धियां हासिल करने वालों की खास आदतें

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 11, 2014

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जीवन में सभी सफलता का स्वाद चखना चाहते हैं। लेकिन ऐसा क्या है जो कामयाब लोगों को उच्च उपलब्धियां हासिल करने में मदद करता है और उनको भीड़ से अलग करता है?
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    सफलता की आदत

    जीवन में सभी सफलता का स्वाद चखना चाहते हैं। लेकिन ऐसा क्या है जो कामयाब लोगों को उच्च उपलब्धियां हासिल करने में मदद करता है और उनको भीड़ से अलग करता है? जवाब सफल लोगों के काम करने के तरीके और उनकी सफलता को लेकर प्रतिबद्धता में छिपा है। जिसके चलते जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल करना उनकी आदत बन जाती है। मेहनत काफी लोग करते हैं, लेकिन सफलता और उपलब्धियां कुछ ही हासिल कर पाते हैं, क्योंकि मेहनत करने से ज्यादा जरूरी होता है, सही दिशा में मेहनत करना। वो कहते हैं ना, "हथौड़ा तब मारना चाहिये, जब लोहा गर्म हो", तो चलिये जानें उच्च उपलब्धियां हासिल करने वाले लोगों की खास आदतें जो उन्हें आम लोगों की भीड़ से अलग करके खास बनाती हैं।
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    मिशन कॉन्फिडेंस

    मिशन कॉन्फिडेंस के तहत एक आसान एक्सरसाइज की जाती है, जिसे 'सेल्फ टॉक' भी कहा जाता है। इसमें लोग मन ही मन अपने आप से बातें करते हुए खुद अपना आत्मविश्वास जगाते हैं। लेकिन इसे करते वक्त अपनी ज्यादा गलतियां नहीं निकालनी चाहिये। केवल अपनी किसी एक कमजोरी पर ध्यान केंद्रित करते हुए उसे दूर करने लिए खुद से कहें कि "यह काम मुश्किल नहीं है, मैं इसे खुद करके देखता/देखती हूं या फिर मुझे पूरा विश्वास है कि मैं इसे अच्छे से पूरा कर पाऊंगा/पाऊंगी।"
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    कदम-दर-कदम आगे बढ़ना

    हर इंसान में आत्मविश्वास की कमी के अलग-अलग कारण होते हैं। ऐसे में सेल्फ एस्टीम बढ़ाने के लिए एक्सरसाइज की जाती है। इसके अंतर्गत सीखा जाता है कि कैसे अपने किसी मिशन पर काम करते हुए धैर्य का साथ न छोड़ें। मिसाल के तौर पर यदि आपको दूसरों से नजरें मिला कर बात करने में घबराहट होती है, तो सबसे पहले शीशे के सामने खड़े होकर खुद से नजरें मिलाना सीखें और  खुलकर बात करने की कोशिश करें। एक बार खुद से नज़रें मिला ली, तो दुनिया में ये नज़रें किसी के आगे नहीं झुकेंगी।
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    चेकलिस्ट तैयार करना

    "लो सेल्फ-एस्टीम" अर्थात कम आत्मविश्वास वाले लोगों में एक खास तरह की सोच होती है, जिसे "ऑल ऑर, नन थिंकिंग" कहा जाता है। ये लोग किसी भी विषय के चरमबिंदु पर जाकर सोचते हैं। ये लोग खुद को या तो बेहद अच्छा या बेहद खराब मानते हैं। दुनिया को देखने के लिए भी ये यही नजरिया अपनाते हैं। लेकिन यह प्रवृत्ति उनको आगे बढ़ाने के बजाय पीछे की धकेलती है। सफल लोग खुद को इससे बचाने के लिए एक चेकलिस्ट बनाते हैं। जिसमें वे एक तरफ अपनी अच्छाइयों और दूसरी तरफ खामियों को लिखते हैं। फिर कमियों को दूर कर अच्छाइयों को बढ़ाने का पुरज़ोर प्रयास करते हैं। वे आत्मविश्वासी लोग ऐसा इसलिये कर पाते हैं, क्योंकि आत्मविश्वास से असंभव लगने वाला कार्य भी संभव बनाया जा सकता है।  
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    सोशल स्किल डेवलपमेंट

    सामाजिक व्यवहार में हमेशा संकोच महसूस करना आत्मविश्वास में कमी का एक बड़ा कारण है। आज के दौर में उच्च उपलब्धियां हासिल करने के लिए सामाजिक व्यवहार में निपुण होना आवश्यक होता है। इसके लिए आपका ज्ञान तो काम आता ही है, सोशल होना भी इसमें आपकी बेहद मदद करता है। इसके लिए सोशल स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम भी कर सकते हैं।
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    अल्प प्रयास का नियम

    अल्प प्रयास का नियम इस तथ्य पर आधारित है कि प्रकृति प्रयत्न रहित सरलता और अत्यधिक आजादी से काम करती है। मसलन प्रकृति के काम करने के तरीके पर ध्यान देने पर पता चलता है कि उसमें सब कुछ सहजता से गतिमान है। जैसे घास उगने की कोशिश नहीं करती, वो खुद-ब-खुद उग आती है। मछलियां तैरने की कोशिश नहीं करतीं, खुद ही तैरना सीख जाती हैं, फूल खिलने की कोशिश नहीं करते, खुद-ब-खुद खिलने लगते हैं और पक्षी उड़ने की कोशिश किए बिना स्वयं ही उड़ जाते हैं। यह उनकी स्वाभाविक प्रकृति है। ठीक इसी प्रकार मनुष्य की भी अपने सपनों को बिना किसी कठिन प्रयास के भौतिक रूप दे सकता है, बशर्ते वो मोह पाश से खुद को दुर रख पाए और प्रकृति का नियम ठीक से समझे।
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    उद्देश्य और इच्छा का नियम

    सफलता का एक बढ़ा महत्वपूर्ण आध्यात्मिक नियम है “उद्देश्य और इच्छा का नियम”। यह नियम इस तथ्य पर आधारित है कि प्रकृति में ऊर्जा और ज्ञान हर जगह विद्यमान होता है। वास्तव में तो क्वांटम क्षेत्र में ऊर्जा और ज्ञान के अलावा और कुछ है ही नहीं। यह क्षेत्र विशुद्ध चेतना और सामर्थ्य का ही दूसरा रूप होता है जो कि उद्देश्य और इच्छा से प्रभावित रहता है। बस सफल लोग इस नियम को समझते हैं और इसका अनुसरण करते हैं।
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    कर्म का नियम

    सफलता का तीसरा आध्यात्मिक नियम है, कर्म का नियम। कर्म में क्रिया और उसका परिणाम दोनों ही शामिल होते हैं। स्वामी विवेकानन्द ने भी कहा था, “कर्म मानव स्वतंत्रता की शाश्वत घोषणा है। हमारे विचार, शब्द और कर्म वे धागे हैं, जिनसे हम अपने चारों ओर एक जाल बुन लेते हैं। वर्तमान में जो कुछ भी घट रहा है, वह इंसान को पसंद हो या फिर नापसंद, ये उसी के चयनों का परिणाम हैं जो उसने पहले कभी किये होते हैं। यकीन मानें कर्म, कारण और प्रभाव के नियम की इन बातों पर ध्यान देकर आसानी से अमल किया जा सकता है।
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