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अस्‍थमा कहीं निकाल न दे आपका दम

By:Devendra Tiwari , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jul 27, 2015
अस्‍थमा भले ही सांसों की बीमारी हो लेकिन यह पूरे शरीर को प्रभावित करती है। अगर इसका उपचार न किया जाये तो हार्ट अटैक के साथ मूड में बदलाव, सांस लेने में समस्‍या जैसी कई दिक्‍कतें हो सकती हैं, विस्‍तार से जानने के लिए यह स्‍लाइडशो पढ़ें।
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    अस्‍थमा का उपचार है जरूरी

    अस्‍थमा भले ही सांसों की बीमारी हो लेकिन यह पूरे शरीर को प्रभावित करती है। अगर इसका उपचार न किया जाये तो हार्ट अटैक के साथ मूड में बदलाव, सांस लेने में समस्‍या जैसी कई दिक्‍कतें हो सकती हैं। इसलिए चिकित्‍सक यह सलाह देते हैं कि अस्‍थमा के मरीजों को समय पर इसका उपचार कराना चाहिए और बदलते मौसम में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। अगर अस्‍थमा के मरीजों ने इसका उपचार नहीं किया तो कई समस्‍यायें हो सकती हैं। आइए इनके बारे में विस्‍तार से जानकारी लेते हैं।

    अस्‍थमा का उपचार है जरूरी
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    दिल का दौरा

    अस्‍थमा के रोगियों में हार्ट अटैक का खतरा अधिक रहता है। आम तौर पर लोग मानते हैं कि अस्‍थमा और दिल के दौरे में कोई संबंध नहीं है। यह सांस प्रणाली को प्रभावित करता है इसके अलावा यह दिल के नाड़ीतंत्र पर भी असर डालता है। कई शोधों में यह बात सामने आई है कि जो मरीज दमा से पीड़ित हैं, बिना दमा वालों के मुकाबले, उनमें दिल के दौरे की संभावना 70 प्रतिशत अधिक होती है।

    दिल का दौरा
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    सांस की समस्‍या

    अस्थमा सांस संबंधित बीमारी है। यह सूजन के कारण श्वांस नलिकाओं के सिकुड़ जाने से सांस लेने में तकलीफ के कारण होती है। यह बचपन में होने वाली क्रोनिक बीमारी है। अस्थमा अटैक होने से पहले मरीज को सांस लेने में दिक्‍कत होने लगती है, क्योंकि सांस लेने वाली जगह के आसपास की मांसपेशियां कठोर हो जाती हैं और एयरवे लाइनिंग में सूजन आ जाती है। अधिक म्यूकस बनने के कारण सांस नली ब्लॉक हो जाती है।

    सांस की समस्‍या
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    ठोढ़ी और गले में खुजली

    अस्थमा की बीमारी का अगर उपचार न किया जाये तो इसके कारण गले और ठोढ़ी में खुजली की समस्या हो सकती है। यह समस्या क्यों होती है इसके बारे में कोई निश्चित जानकारी नहीं है। लेकिन इसके कारण खुजली बढ़ती जाती है और समस्‍या गंभीर हो जाती है।

    ठोढ़ी और गले में खुजली
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    मूड का बदलना

    अगर अस्‍थमा का उपचार न किया जाये तो इसके कारण मूड में बदलाव आता है। बोलते-बोलते चुप हो जाना, तनाव और चिंताग्रस्त हो जाना भी अस्थमा अटैक का संकेत हो सकता है।

    मूड का बदलना
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    कफ की समस्‍या

    दमा के मरीजों में कफ की समस्या भी आम मानी जाती है। इसके कारण रोगी की रातों की नींद भी उड़ सकती है। अगर यह समस्‍या अधिक दिनों तक रही तो इसकी वजह से साइनस भी हो सकता है।

    कफ की समस्‍या
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    सीने में जलन

    अस्‍थमा का उपचार न होने पर सीने में जलन भी होती है। धीरे-धीरे यह समस्‍या बढ़ती जाती है। अस्थमा ग्रस्त बच्चों में जब यह समस्या होती तो वो समझ नहीं पाते कि उन्हें क्या हो रहा है।

    सीने में जलन
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    होठों और अंगुलियों का नीला होना

    अस्‍थमा का उपचार न होने पर होठ और उंगलियां भी नीली होने लगती हैं। जब शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाता तो होठों और अंगुलियां नीली दिखाई देने लगती हैं। इस स्थिति को केयानोसिस कहते हैं। यह स्थिति इशारा करती है कि रोगी को तुरंत चिकित्सक के पास ले जाया जाए। इसलिए कोशिश यह करें कि दमा का समय पर उपचार करायें।

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