हेवी वेट लिफ्टिंग बनाम लाइट वेट

By:Shabnam Khan , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 06, 2014

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वेट लिफ्टिंग, मसल्स यानी मांसपेशियों के लिए खास व्यायाम है। इससे मांसपेशियों को मजबूती मिलती है और शरीर को सही आकार। वेट लिफ्टिंग को लेकर पुरुष खासतौर पर अधिक जुनूनी होते हैं। वेट लिफ्टिंग कैसी हो, हैवी या लाइट, यह पूरी तरह आपकी जरूरत और शारीरिक क्षमताओं पर निर्भर करता है।
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    मसल्स के स्वास्थ्य के लिए वेट लिफ्टिंग

    वेट लिफ्टिंग यानी भार वहन से आपकी मसल्स मजबूत होती हैं। आपका शरीर आकर्षक दिखता है और उम्र बढ़ने पर मसल्स संबंधी जो परेशानियां होती हैं, उनसे बचाव होता है। वेट लिफ्टिंग से मांसपेशियों पर तनाव आता है और उन्हें शक्ति मिलती है। वेट ट्रेनिंग बार्बेल, डंबल और वेट मशीन की मदद से की जाती है। वेट लिफ्टिंग के शरीर पर परिणाम देखने के लिए आपको नियमित रूप से वेट लिफ्टिंग करनी चाहिए। कुछ लोग हफ्ते में दो बार वेट लिफ्टिंग करते हैं। अपनी जरूरत और लक्ष्य के हिसाब से आप लाइट वेट लिफ्टिंग या हेवी वेट लिफ्टिंग में से चुन सकते हैं। लेकिन इस चुनाव से पहले आपको दोनों के बारे में जानना जरूरी है।

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    हेवी वेट लिफ्टिंग और लाइट वेट लिफ्टिंग

    लाइट वेट लिफ्टिंग को ज्यादा समय तक करना आपकी मांसपेशियों को वही फायदा देता है जितना हेवी वेट लिफ्टिंग कम समय तक करना। लेकिन, आप जितना वजन उठाते हैं वो आपकी मांसपेशियों के फाइबर को प्रभावित करता है। वेट लिफ्टिंग का वजन इस बात का निर्धारण करता है कि आप किस तरह की शक्ति प्राप्त कर रहे हैं। हेवी लिफ्टिंग से मांसपेशियों का अधिक विकास होता है और आपका शरीर वसा को खत्म करने वाले हार्मोन का स्राव बढ़ा देता है।

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    मसल्स फाइबर

    आपकी मसल्स यानी मांसपेशियां दो प्रकार के मसल्स फाइबर से बनी होती हैं। स्लो ट्विच और फास्ट ट्विच फाइबर। स्लोट-ट्विच मसल्स फाइबर स्थिरता देते हैं और लंबे वक्त तक रहते हैं और फास्ट मसल्स फाइबर तेज संकुचन करते हैं लेकिन जल्दी थक जाते हैं। आपकी मसल्स में दोनों प्रकार होते हैं लेकिन एक्सरसाइज के दौरान जिस प्रकार का फाइबर सक्रिय होता है वह आपके श्रम के स्तर पर निर्भर करता है। इतनी हेवी लिफ्टिंग करना जिसे आप 10 से ज्यादा बार नहीं कर सकते, उसके लिए फास्ट ट्विच की जरूरत पड़ती है। 20 से ज्यादा बार लाइट वेट लिफ्टिंग के लिए स्लो ट्विच मसल्स फाइबर का इस्तेमाल होता है।

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    बल्किंग-अप

    अगर आपका लक्ष्य मसल्स का साइज बढ़ाना है तो आप हेवी वेट लिफ्टिंग करना चाहेंगे। इससे मसल्स के विकास संबंधित हार्मोनों का अधिक स्राव होगा, और मसल्स का तीव्र गति से विकास होगा। इससे महिलाओं का शरीर अधिक विशाल नहीं होगा क्योंकि महिलाओं में पुरुषों की तुलना में कम टेस्टोस्टेरोन होते हैं। महिलाओं में मसल्स का विकास करने वाले हार्मोनों के प्रभाव से मसल्स तो नहीं बढ़ेंगी, लेकिन उनकी अपीरिएंस में बदलाव जरूर आएगा। हेवी वेट लिफ्टिंग से जो ऐक्सप्लोसिव पावर आप प्राप्त करेंगे वो जंपिंग, स्प्रिंटिंग और अन्य क्विक मूवमेंट के लिए जरूरी होती है। लाइट वेट लिफ्टिंग अधिक बार करके जो मांसपेशी स्थायित्व आप प्राप्त करते हैं वो लॉन्ग डिस्टेंस रनिंग और साइक्लिंग जैसी कार्डियो गतिविधियों में मदद करता है।

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    फैट खत्म करना

    लाइट वेट लिफ्टिंग की तुलना में हेवी वेट लिफ्टिंग करने से अधिक फैट बर्न किया जा सकता है। जितना भारी वजन आप उठाएंगे उतनी ज्यादा कैलोरी आप कम करेंगे। फास्ट ट्विच फाइबर ऊर्जा के लिए आपके वसा से मांग करते हैं क्योंकि वह ऑक्सीजन की तुलना में जल्दी उपलब्ध हो जाता है। नतीजतन, ऐसे बहुत से फैट-बर्निंग हार्मोन स्रावित होने लगते हैं जो आपके वर्काउट करने के आठ घंटे बाद फैट खत्म करने लगते हैं। वहीं दूसरी तरफ, लाइट-वेट लिफ्टिंग से वर्काउट के सिर्फ एक घंटे बाद ही फैट बर्न होने लगता है।

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    मेटाबॉलिज्म

    कुछ देर के लिए हेवी वेट लिफ्टिंग को शॉर्ट वर्काउट कहा जाता है। इससे आप अधिक मसल्स बना सकते हैं जबकि लाइट वेट लिफ्टिंग अधिक वक्त तक करने से आप तुलनात्मक रूप से कम मसल्स बना पाएंगे। जिसनी मसल मास आपके पास होगी उतना तेज आपका मेटाबॉलिज्म यानी चयापचय होगा। जब आप काम नहीं कर रहे होंगे तब आप अधिक फैट बर्न करेंगे क्योंकि मसल्स अधिक फैट बर्न करते हैं।

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    स्वास्थ्य और वेट लिफ्टिंग

    हेवी वेट लाइट वेट की तुलना में हड्डियों का घनत्व अधिक बढ़ाता है। समय के साथ-साथ आप प्राकृतिक रूप से अधिक हड्डियों का घनत्व खोने लगते हैं। इसलिए ऑस्टियोपिरोसिस से बचाव के लिए हड्डियों का घनत्व अधिक बनाए रखने की जरूरत होती है। खासतौर पर, मीनोपॉज के बाद वाले समय में। वेट लिफ्टिंग से डिप्रेशन भी कम होता है। हेवी वेट को उठाने के लिए कूल्हों या पीठ से झुकने की बजाय घुटने मोड़कर झुकें। हेवी वेट लिफ्टिंग का सबसे सुरक्षित तरीका है कि आप मशीन वेट का इस्तेमाल करें ताकी भारी वजन को हाथ या कंधों पर संभालना न पड़े।

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    सावधानियां

    चाहे आप लाइट वेट लिफ्टिंग करें या फिर हेवी वेट लिफ्टिंग, कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी है। खाली पेट वेट लिफ्टिंग एक्सरसाइज न करें, न ही खाने खाने के तुरंत बाद। एक्सरसाइज के तकरीबन 40 मिनट पहले खाना खा लें। अगर आपको फिर से भूख लगी हो तो दस मिनट पहले हल्का स्नैक ले सकते हैं। इसके अलावा, तुरंत वेट लिफ्टिंग एक्सरसाइज शुरू न कर दें। इससे पहले वॉर्म-अप करना जरूरी है। इससे आपके खून और आपकी मसल्स में अधिक ऑक्सीजन का संचार होने लगेगा। इसके साथ ही, ये आपको वर्काउट के बाद के मांसपेशियों के दर्द से भी बचाता है।

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