गर्भावस्‍था में सीने में जलन दूर करने के 10 तरीके

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 18, 2014

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सीने में जलन गर्भावस्‍था के दौरान होने वाली सामान्‍य समस्‍याओं में से एक है। यह समस्‍या विशेष रूप से तीसरी तिमाही यानी 6 महीने के बाद आम हो जाती है। सीने और गले में जलन, मुंह में खट्टा और अम्‍लीय स्‍वाद, आदि इसके लक्षण हैं।
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    गर्भावस्‍था में सीने में जलन

    गर्भावस्‍था महिला के जीवन का सबसे खुशनुमा समय होता है। गर्भावस्था के नौ महीनों में कई तरह की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं से महिलाओं को जूझना पड़ता है, इन समस्‍याओं का उपचार न किया जाये तो इसका असर गर्भ में पल रहे बच्‍चे पर भी पड़ सकता है। सीने में जलन इस दौरान होने वाली सामान्‍य समस्‍याओं में से एक है। यह समस्‍या विशेष रूप से तीसरी तिमाही यानी 6 महीने के बाद आम हो जाती है। सीने और गले में जलन, मुंह में खट्टा और अम्‍लीय स्‍वाद, आदि इसके लक्षण हैं। आगे की स्‍लाइड में सीने की जलन दूर करने के तरीकों के बारे में जानिये।
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    थोड़े-थोड़े अंतराल पर खायें

    एक समय में बहुत अधिक मात्रा में भोजन लेने की जगह, कम मात्रा में कई बार खायें। ज्‍यादा देर भूखे रहने से खाने की इच्‍छा प्रबल होती है और इसके कारण आप अधिक मात्रा में खा लेते हैं। खाने के प्रति ज्‍यादा प्रोत्‍साहित होने के कारण ही सीने में जलन की समस्‍या होती है।
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    खाने को अच्‍छे से चबायें

    अपने हर निवाले को निगलने से पहले इसे 32 बार चबायें, इससे खाने को पचाने के लिए पेट को अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ेगी और खाना आसानी से पच भी जायेगा। यह सीने की जलन से भी बचाव करता है।
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    उत्‍तेजना वाले आहार से बचें

    कार्बोनेटेड पेय, कैफीन, खट्टे फल, मसालेदार, वसायुक्त भोजन, जंक फूड, प्रोसेस्‍ड मीट को गैस्ट्रोइंटेस्टिनल ट्रैक्ट के दुश्मनों के रूप में जाना जाता है। इसलिए हर गर्भवती महिला को इस तरह के खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए।  
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    अपने शरीर की सुने

    आपको अपने शरीर से अच्‍छे और बुरे दोनों तरह के संकेत मिलते है। अगर कोई निश्चित भोजन से आपको मिचली या हार्टबर्न की समस्‍या होती है तो कम से कम कुछ दिनों के लिए अपने मेनू में इन चीजों को शामिल न करना बेहतर होता है। कई महिलाओं को हार्टबर्न की समस्‍या लंच या डिनर के बाद एक विशेष समय पर होती है। ऐसे में खाने के बाद टहलने की आदत डालें। डिनर सोने से 2-3 घंटे पहले करें।
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    तरल और ठोस एक साथ न लें

    गर्भावस्‍था के दौरान आठ से दस गिलास पानी पीना बहुत अच्‍छा रहता है, लेकिन भोजन के साथ पानी ना पिये। भोजन के साथ और बाद पानी पीना पाचन क्रिया को धीमा कर देता है। भोजन के साथ किसी भी तरल पदार्थ के सेवन की बड़ी राशि से बचें। अगर पानी के बिना काम न चल पाये तो कम मात्रा में पानी पियें।
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    नियमित व्‍यायाम है जरूरी

    गर्भावस्‍था के दौरान स्‍वस्‍थ रहने के लिए नियमित रूप से व्‍यायाम करना बहुत जरूरी है, इस समय चिकित्‍सक की सलाह के अनुसार रोज व्‍यायाम करें। इससे वजन नहीं बढ़ेगा और गर्भावस्‍था की सामान्‍य समस्‍यायें नहीं होंगी।  
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    सोने की मुद्रा का ध्‍यान रखें

    भारी भोजन करने के बाद आप अपने शरीर को थोड़ा ऊंचा करके सोयें ताकि पेट का एसिड आसानी से ऊपर आकर हार्टबर्न का कारण न बनें। फिलाडेल्फिया में हुए एक शोध के अनुसार, जिन महिलाओं को रात में सोने के समय एसिडिटी की समस्या है, अगर वह बायीं करवट से सोएं तो उन्हें आराम मिलेगा। सीधे व कमर के बल सोने पर एसिड वापस फिसलकर इसोफैगस में आ जाता है। सिर के नीचे थोड़ा ऊंचा तकिया रख सोने पर एसिड को इसोफैगस में जाने से रोक सकते हैं।
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    गलत आदतों से बचें

    गर्भवती को धूम्रपान या शराब का सेवन करने से बचना चाहिए। क्‍योंकि इन आदतों से दूर रहकर आप हार्टबर्न के लक्षणों से राहत पा सकते हैं,  और साथ ही इससे आपके आने वाले बच्‍चे का स्‍वास्‍थ्‍य भी ठीक रहता है।
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    ढीले कपड़े पहनें

    अगर आप गर्भावस्‍था के दौरान भी तंग कपड़े पहनती है तो डिलिवरी तक इससे बचें। क्‍योंकि तंग कपड़ों से पेट का दबाव बढ़ सकता है, और वास्‍तव में आपको हार्टबर्न के लिए अतिसंवेदनशील बना सकता है। इसके अलावा, हमेशा सीधे बैठने की कोशिश करें क्‍योंकि यह पेट अम्‍ल को नीचे रखता है।  
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    पानी का खूब सेवन करें

    कई एक बार, डिहाइड्रेशन सीने में जलन का कारण बन सकता है। इसलिए खुद को हाइड्रेटेड रखने के लिए दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पीना चाहिए। लेकिन खाने के साथ पानी ना लें। इसके अलावा एक साथ बहुत सारा पानी पीने से बचें। क्‍योंकि ज्‍यादा पानी ग्रासनलीय संवरणी पर दबाव डालकर सीने में जलन का कारण बन सकता है।  
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