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हर महिला को होना चाहिये हृदय से जुड़े इन तथ्‍यों का ज्ञान

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Oct 27, 2014
भारत में हर पांच में से तीन महिलाओं में 35 साल की उम्र से ही हृदय रोग की चपेट में आने का खतरा रहता है। इसलिए हर महिला को हृदय रोग से जुड़े तथ्‍यों के बारे में पता होना चाहिए साथ ही उन पुरुषों को भी जो उनसे प्‍यार करते हैं।
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    हृदय से जुड़े तथ्‍य

    किसी अन्य बीमारी की तुलना में महिलाओं की मौत का सबसे बड़ा कारण हृदय रोग है। एक नए अध्ययन के अनुसार, भारत में हर पांच में से तीन महिलाओं में 35 साल की उम्र से ही हृदय रोग की चपेट में आने का खतरा रहता है। लेकिन ज्यादातर महिलाओं का यही मानना होता है कि कम से कम 50 वर्ष की उम्र तक वह हृदय रोग से सुरक्षित हैं। इसलिए हर महिला को हृदय रोग से जुड़े तथ्‍यों के बारे में पता होना चाहिए साथ ही उन पुरुषों को भी जो उनसे प्‍यार करते हैं। image courtesy : getty images

    हृदय से जुड़े तथ्‍य
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    हृदय रोग से मौत का खतरा

    हर साल पुरुषों की तुलना में काफी अधिक संख्‍या में महिलाएं की मौत हृदय रोग और स्ट्रोक के कारण होती हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में हर 90 सेकंड में एक महिला दिल के दौरे से ग्रस्‍त होती है। महिलाओं के लिए सबसे बड़ी स्वास्थ्य खतरा हृदय रोग का सबसे बड़ा कारण ज्ञान की कमी है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) की रिपोर्ट के अनुसार, 2004 में लगभग 42.1 मिलयन महिलाओं को हृदय रोग था और जिसके परिणामस्‍वरूप 461 हजार मौते भी हुई। image courtesy : getty images

    हृदय रोग से मौत का खतरा
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    हृदय रोग पर नियंत्रण

    40 से 60 की उम्र की लगभग 80 प्रतिशत महिलाओं में एक या एक से अधिक हृदय रोग के जोखिम कारक को नियंत्रित या कम किया जा सकता है। जोखिम कारकों को नमक के सेवन, धूम्रपान, उच्च एलडीएल (बुरे) कोलेस्ट्रॉल के स्तर या कम एचडीएल (अच्छे) स्तर, उच्च रक्तचाप, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, अनियंत्रित मधुमेह और उच्च तनाव के स्तर को नियंत्रित करके कम किया जा सकता है। image courtesy : getty images

    हृदय रोग पर नियंत्रण
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    इलाज की कमी

    पुरुषों की तुलना में महिलाएं सही समय पर हृदय रोग के परीक्षण और इलाज करने की संभावना बहुत कम होती है। जिन  महिलाओं में हृदय रोग का खतरा होता हैं, उनको भी पुरुषों की तरह नैदानिक परीक्षण के लिए नहीं भेजा जाता। image courtesy : getty images

    इलाज की कमी
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    स्‍ट्रोक का खतरा अधिक

    महिला में अधिक दिल के दौर, दिल के दौरे के अधिक बार होने और दिल के दौरे के बाद स्‍ट्रोक का खतरा अधिक होता है, लेकिन वह पहचाना नहीं जाता है। चिकित्सकों के तहत मूल्यांकन और महिलाओं का इलाज हो सकता है, क्‍योंकि उनमें आदमी की तरह उच्‍च जोखिम प्रकट नहीं करते, खासतौर पर अगर वह युवा हैं और स्‍वस्‍थ दिखाई देती है। image courtesy : getty images

    स्‍ट्रोक का खतरा अधिक
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    दिल के दौरे के लक्षण पुरुषों से अलग

    पुरुषों की तुलना में महिलाओं में दिल के दौरे के लक्षण अलग हो सकते है। महिलाओं सांस, थकान, पेट दबाव, मतली या ईर्ष्या, या जबड़े, गर्दन, पीठ, या ऊपरी कंधे के दर्द की तकलीफ को महसूस करने की संभावना अधिक होती है। image courtesy : getty images

    दिल के दौरे के लक्षण पुरुषों से अलग
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    हृदय रोग को प्रभावित करने वाले कारक

    अक्‍सर महिलाओं को यह मानना हैं कि कोलेस्‍ट्रॉल और रक्तचाप के सामान्‍य होने पर दिल के दौरे के बारे में चिंता करने की कोई जरूरत नहीं होती है। हालांकि कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप दोनों हृदय रोग के कारक योगदान है, लेकिन अन्‍य कारक भी इसे प्रभावित कर सकते हैं। परिवार के इतिहास का प्रमुख महत्व है। इसके अलावा अधिक वजन और रक्त में शर्करा भी जोखिम कारक हो सकते है। image courtesy : getty images

    हृदय रोग को प्रभावित करने वाले कारक
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    युवा महिलाएं भी होती है हृदय रोग से पीड़‍ि‍त

    एस्‍ट्रोजन और अन्‍य हार्मोंन दिल की बीमारी से महिलाओं की रक्षा करते हैं, इसलिए युवा महिलाओं को चिंता करने की जरूरत नहीं हैं। यह सबसे बड़ी गलतफहमी है कि युवा महिलाओं को हृदय रोग से जुड़े जोखिम वाले कारकों के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। न्‍यूयॉर्क सिटी में मोंटेफियोरे मेडिकल सेंटर के कॉर्डियोलॉजिस्‍ट जे जूलिया शिन के अनुसार, युवा महिलाओं में भी हृदय रोगों की समस्‍या होती है और वे अक्‍सर घातक होती है। image courtesy : getty images

    युवा महिलाएं भी होती है हृदय रोग से पीड़‍ि‍त
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    गर्भावस्था के दौरान होने वाली स्वास्थ्य समस्‍याएं

    गर्भावस्था के दौरान होने वाली स्वास्थ्य घटनाओं - जैसे प्रीक्‍लम्पसिया या गर्भावधि मधुमेह के रूप में - जीवन में बाद में हृदय रोग के लिए जोखिम कारक हो सकता है। प्रीक्‍लम्पसिया, गर्भावधि मधुमेह गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप के बारे में हमेशा कहा जाता है कि यह समस्‍याएं बच्‍चे के जन्‍म के बाद दूर हो जाती है। लेकिन इनका प्रभाव हृदय रोग के खतरे को बढ़ा देता है। प्रीक्‍लम्पसिया के कारण एक महिला में मध्‍य आयु में हृदय रोग का खतरा दोगुना बढ़ जाता है। जबकि गर्भावधि मधुमेह जीवन में अक्सर ग्लूकोज असहिष्णुता अन्‍य स्थितियों के लिए मार्ग प्रशस्‍त करता है, और हृदय रोग के लिए मोटापे और अन्य जोखिम कारकों में योगदान देता है। image courtesy : getty images

    गर्भावस्था के दौरान होने वाली स्वास्थ्य समस्‍याएं
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    हॉट फ्लैश हमेशा रजोनिवृति का संकेत नहीं

    हॉट फ्लैश को अक्‍सर रजोनिवृत्ति में होने वाले हार्मोन परिवर्तन के साथ जोड़ा जाता है। लेकिन क्‍या आप जानती हैं कि यह दिल की समस्या का संकेत भी हो सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि यह कब और कैसे होता है। अगर हॉट फ्लैश की समस्‍या टीवी के आसपास या फोन पर बात करते समय होती है, तो यह हार्मोनल होती है। लेकिन परिश्रम के दौरान ऐसा होने पर यह एंजाइना के लक्षण हो सकते हैं। एनजाइना हृदय रोग का एक रूप है कि दिल की मांसपेशी संबंधी समस्या होती है। image courtesy : getty images

    हॉट फ्लैश हमेशा रजोनिवृति का संकेत नहीं
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