भारत में दिल की समस्‍या से जुड़े इन 6 तथ्‍यों के बारे में जानें

By:Gayatree Verma , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Sep 22, 2015

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दिल की बीमारियां पूरी दुनिया में एक जैसी नहीं होती हैं, भारत में दिल से जुड़ी बीमारियों के बारे में हैरान कर देने वाले इन तथ्‍यों के बारे में जरूर पढ़ें।
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    दिल की बीमारी

    हमारे ऊपर पूरी तरह से हावी हो चुके शहरीकरण और पूरी तरह से बदल चुकी दिनचर्या का सबसे अधिक असर दिल पर पड़ता है और इसके कारण कम उम्र में ही दिल की बीमारियां होने लगी हैं। ऑफिस में काम करके अगर आप सोचते हैं कि शरीर को आराम मिल रहा है तो आप गलत हैं। इसका बुरा असर आपके दिल पर हो रहा है। भारत जैसे युवा बहुल इस देश में दिल के मरीजों की संख्‍या लगातार बढ़ रही है। आइए हम आपको दिल की समस्‍या से जुड़े कुछ चौंकाने वाले तथ्‍यों के बारे में बताते हैं।

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    भारत में दिल के मरीज सर्वाधिक

    दिल देने के मामले में भारतीय झंडे गाड़ रहें है कि नहीं, इसका तो पता नहीं, लेकिन दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले में भारतीयों ने पूरी दुनिया को पीछे छोड़ दिया है। पूरी दुनिया में सबसे अधिक दिल के मरीज भारत में हैं। इसी साल जारी हुए रजिस्ट्रार जनरल आफ इंडिया और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के एक सर्वे के अनुसार दुनिया के 60 प्रतिशत दिल के मरीज भारत में हैं। भारत में 25 से 69 साल के 25 प्रतिशत लोगों की मौत हार्ट अटैक यानी दिल की बीमारी से होती है।

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    70% शहरी भारतीयों को दिल की बीमारी का खतरा

    एक नई स्टडी के मुताबिक स्थानबद्ध जीवन मतलब ऑफिस में काम करने वाले जीवन अर्थात ऑफिस में 9 से 12 घंटे बैट कर काम करने के कारण दिल से जुड़ी बीमारियों के खतरे साल दर साल बढ़ रहे हैं। यह स्टडी भारत के 12 शहरों के ऊपर की गई है, जिसके अनुसार शहरी जीवन के हाई-फाई शहरी ऑफिस में बैठकर नौ से बारह घंटे काम करने वाले को लोगों को दिल से जड़ी बीमारी होने का खतरा बढ़ा गया है। 70 प्रतिशत शहरी निवासी दिल की बीमारी से पीड़ित हैं।

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    कम उम्र में भी दिल हो रहा बीमार

    अगर किसी युवा को आज बोलो की, वाह तुम्हारी लाइफ तो कितनी बिज़ी और हैप्पनिंग है, तब उस युवा का सीना फूलकर चौड़ा हो जाता है। लेकिन उस युवा को ये नहीं पता होता कि उनकी ये हैप्पनिंग लाइफस्टाइल लाइफ स्टाइल का उनके दिल को अनहैप्पनिंग कर रहा है। बिज़ी लाइफ मतलब दिन में चार से पांच घंटे सोना, खाने में अक्सर अत्यधिक कॉलेस्टरॉल और ट्रांस फैट वाला जंक फूड खाता और तनाव मुक्त रहने के लिए शराब और सिगरेट का सेवन, तो दिल तो बीमार पड़ेगा ही। पिछले 10 सालों में 40 साल से कम उम्र के लोगों में दिल के दौरे पड़ने की संख्या 25 प्रतिशत से बढ़ कर 30 से 40 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

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    ऑफिस-ऑफिस यानी दिल की बीमारी

    एक ही स्थान पर बैठकर घंटों तक काम करने वाला लाइफस्टाइल दिल की बीमारी का कारण है जो एक दिन आपकी मौत के साथ ही खत्म होगी। अगर आप फीजिकली काम नहीं करते हैं औऱ शरीर थोड़ा भी मेहनत नहीं करता है तो कर्डियोवास्कुलर, टाइप 2 डायबीटिज, हाई ब्लड प्रेशर, ऑब्सिटी आदि कई बीमारियों का शरीर घर बन जाता है जो अंत में दिल की बीमारी बन जाते हैं। सामान्य जीवन  के लिए रोज कम से कम आधा घंटा व्यायाम करना जरूरी माना जाता है।

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    दो लाख नवजात झेल रहे दिल की बीमारी

    देश में हर साल लगभग दो लाख बच्चे जन्मजात दिल के रोगों के साथ पैदा हो रहे हैं जिस में से मुश्किल से ढाई हजार बच्चों के ही ऑपरेशन होते हैं। पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च और राममनोहर लोहिया अस्पताल के डा. दिनेश कुमार एवं नरेन्द्र बागड़ी के शोध पत्र के अनुसार हरसाल 1.80-2.0 लाख बच्चे दिल के रोगों के साथ जन्म लेते हैं। यदि इनका उपचार किया जाए तो इनमें से 75 फीसदी बच्चे ठीक होकर सामान्य जीवन जी सकते हैं। लेकिन इनमें प्रतिवर्ष 2500 से ज्यादा आपरेशन नहीं हो पाते हैं। बाकी बच्चों की या तो मृत्यु हो जाती है या वे रोग के साथ बड़े होते हैं।

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    डायबीटिज और हायपरटेंशन से बढ़ खतरा

    मधुमेह और हायपरटेंशन की बीमारी दिल से जुड़े मरीजों में दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। भारत में 50.8 मीलियन लोग मधुमेह की बीमारी से ग्रस्त है जो कि इंटरनेशनल डायबीटिज फेडरेशन के अनुसार पूरी दुनिया में सबसे अधिक है। शहर में यह बीमारी 6-8% लोगों को है जबिक ग्रामीण जीवन में केवल 2-3% लोग इस बीमारी से ग्रस्त है।

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