पांच साल के बच्‍चों में इन आदतों का विकास होना है जरूरी

By:Devendra Tiwari , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 04, 2016

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बच्‍चों की शुरूआती शिक्षा उनके घर में ही होती है, इसलिए बच्‍चों में शारीरिक वि‍कास के साथ-साथ कुछ आदतों का विकास भी होना बहुत जरूरी है, इस स्‍लाइडशो में जानिये पांच साल के बच्‍चे में किन-किन आदतों का विकास होना जरूरी है।
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    बच्चों की उम्र का बढ़ना

    बच्चे की पहली पाठशाला उसका घर होता है और जन्म के बाद बच्चा स्कूल जाने से पहले जो भी सीखता है अपने परिवार वालों से ही सीखता है खासकर पैरेंट्स से। इसलिए बच्चें के विकास के साथ-साथ उसमें कई तरह की आदतों का विकास हो जाना चाहिए जिससे कि बाद में उसे दिक्कत न हो और वह समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सके। इसलिए आपकी मां-बाप की सबसे अहम जिम्मेदारी है कि उसे समाज के अच्छे और बुरे के बारे में बतायें। इस स्लाइडशो में हम बता रहे हैं कि पांच साल की उम्र तक बच्चे में कौन-कौन सी आदतें विकसित हो जानी चाहिए।

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    र्इमानदारी की बातें

    ईमानदारी खुद के लिए फक्र की बात होती है। इसलिए बच्चा जब थोड़ा समझने और सीखने लायक हो जाये तो उसे ईमानदारी की सीख देनी चाहिए। बच्चे शुरुआत में छोटी-छोटी बातों पर झूठ बोलते हैं लेकिन एक समय के बाद झूठ बोलना उनके व्यवहार में शुमार हो जाता है। ऐसे में अगर आपका बच्चा ईमानदार है तो वो न तो झूठ बोलेगा, न ही चोरी करेगा और न ही वह‍ किसी को धोखा देगा।

  • 3

    न्यायसंगत होना सिखायें

    पांच साल का होने से पहले अपने बच्चे को न्यायसंगत होना सिखाएं। अगर बच्चा न्याय करना जानेगा और उसे स्वीकार करना भी सीख जाएगा तो उसे इसकी इज्जत भी करना आ जाएगा। न्यायसंगत होना मतलब खुद से अच्छे और बुरे की सीख लेना। बच्चे का यह जानना बहुत जरूरी है कि क्या सही है और क्या गलत है। कहानियों के माध्यम से बच्चे में आप ये गुण डाल सकते हैं। इसलिए बच्चों को प्रेरणादायक कहानियां सुनायें।

  • 4

    एकाग्रता के साथ काम करना

    सफलता तभी मिलती है जब आप किसी काम को एकाग्रचित्त और पूरे मन से करेंगे। यह आदत अगर बचपन से ही लग जाये तो बाद में समस्या नहीं होती है। कई बार ऐसा होता है कि सही मार्गदर्शन के अभाव में बच्चे के अंदर हर काम को लापरवाही से करने की आदत पड़ जाती है। ऐसे में बच्चे को काम के महत्व के बारे में विस्तार से समझाएं। इससे वह काम को टालेगा नहीं और हमेशा मन और लगन से अपना काम पूरा करेगा।

  • 5

    दूसरों की मदद करना

    दूसरों की मदद करना बहुत जरूरी है, इससे खुद को सुकून मिलता है और किसी जरूरतमंद की जरूरत पूरी होती है। मदद सिर्फ आर्थिक नहीं होती बल्कि मदद वैचारिक रूप से भी होती है। इसलिए अपने बच्चे को हमेशा दूसरों की मदद करने की सीख दीजिए। उसके अंदर दूसरों के लिए दया और प्रेम की भावना का विकास कीजिए। इससे वह नफरत नहीं बल्कि प्रेम करना सीखेगा।

  • 6

    वाणी का मधुर होना जरूरी

    ‘ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोए, औरन को शीतल करे आपहुं शीतल होए’ कबीर दास का यह दोहा अच्छे शब्दों के प्रयोग की सीख देता है। आपकी वाणी ऐसी होनी चाहिए जिससे दूसरों को बुरा न लगे और आप अंदर से शांत हों। अपने बच्चे को मधुर वाली बोलना सिखायें। उसे भद्र और अभद्र भाषा में अंतर भी बतायें।
    Image Source : Getty

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