प्रेग्‍नेंसी टालने से हो सकते हैं ये नुकसान

By:Aditi Singh , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Mar 23, 2015

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अधिक उम्र में मां बनना बच्चे और मां दोनों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, क्‍योंकि उम्र बढ़ने के साथ बच्‍चे को सही तरीके से पोषण नहीं मिल पाता और बाद में उसे कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍यायें होने लगती हैं।
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    अधिक उम्र में मां बनना

    आज के बदलते परिवेश में लोगों की प्राथमिकताएं भी बदल गई हैं। इसी के चलते युवक-युवतियां देर से शादी कर रहे हैं और परिवार नियोजन के बारे में भी बाद में सोच रहे हैं। अधिक उम्र में बच्‍चा पैदा करना कई समस्याओं की जड़ है। ये ना सिर्फ महिलाओं के लिए नुकसानदेह होता है, बल्कि पुरूषों में भी प्रजनन की क्षमता को कम करता है। आगे की स्‍लाइड में विस्‍तार से जानिये देर में मां बनने से मां और बच्‍चे को क्‍या-क्‍या समस्‍यायें हो सकती हैं।
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    गर्भधारण में समस्‍या

    देर से शादी होने की वजह से पुरुषों की प्रजनन शक्ति या कहें शुक्राणु सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं। इसके कारण शुक्राणुओं के बनने की संख्‍या कम हो जाती है। इसके कारण गर्भधारण करने में समस्‍या होती है। इसे हर हाल में याद रखने की जरूरत है कि उम्र बढने के साथ-साथ पुरुषों के शुक्राणु व महिला के अंडाणु की गुणवत्ता कमजोर होती चली जाती है।
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    बांझपन का खतरा

    शादी में देरी प्रजजन की क्षमता को दिन-प्रतिदिन कम करती जाती है। आधुनिक जीवनशैली, तनाव और प्रदूषण की वजह से प्रजनन शक्ति पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। अधिक उम्र में शादी बांझपन का बहुत बड़ा खतरा बन कर सामने आ रही है। इससे गर्भ में ठहरे बच्चे में जीन संबंधी विकृतियां ज्यादा होने लगी हैं। साथ ही देर से शादी के बाद गर्भ में ठहरे बच्चे के गिरने का खतरा भी बहुत अधिक रहता है।
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    बच्‍चेदानी में टयूमर और स्तन कैंसर का खतरा

    उम्र बढ़ने के साथ ही पुरुष व महिलाएं उच्च रक्तचाप, मधुमेह व थायरॉयड जैसी बीमारियों की चपेट में आसानी से आ जाते हैं। ये रोग प्रजनन के रास्ते में बड़ी बाधा बन रहे हैं। अब तो अधिक उम्र में शादी से महिलाओं की बच्चेदानी में ट्यूमर भी होने लगे हैं। देरी से स्तनपान, गांठ पैदा कर देता है जो स्तन कैंसर का खतरा बढ़ा देती है।
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    गर्भावस्‍था के दौरान समस्‍यायें

    यदि महिला 40 वर्ष की उम्र के बाद गर्भधारण करती हैं तो उसे व उसके बच्चे को बहुत सी कठिनाईयों का खतरा होता है। 30 से 35 साल के बाद एबनॉर्मल प्रेग्नेंसी की संभावनायें बढ़ जाती हैं। अधिक उम्र होने पर प्रेग्नेंसी के दौरान महिला का ब्लड प्रेशर बढ़ना, डायबिटिज, शुगर होने का खतरा होता है। अधिक उम्र में प्रेग्नेंट होने से नॉर्मल डिलीवरी के चांसेज बहुत कम हो जाते हैं।
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    गर्भधारण का सही समय

    जीवन के प्रत्‍येक पहलू के लिए एक निश्चित समय होता है, प्रेग्‍नेंसी भी उसमें से एक है, अगर उसे नजरअंदाज किया जाये तो कई तरह की समस्‍यायें होने लगती हैं। प्रेग्नेंसी की सही उम्र 25 से 30 वर्ष है। इसके उपरान्त गर्भधारण होने से बच्चा होने के बाद मां के शरीर को संभलने में काफी समय लगता है। शादी की उम्र 35 साल से बढ़ा दिया जाए तो बच्चा होने की संभावना 60 प्रतिशत कम हो जाती है।
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    आईवीएफ की सही उम्र

    आईवीएफ तकनीक से गर्भधारण के मामले इसलिए बढ़ रहे हैं क्‍योंकि लोग देर से शादी कर रहे हैं और बच्‍चा पैदा करने में समर्थ नहीं हैं। बच्‍चे के जन्‍म के लिए स्‍वस्‍थ शुक्राणु व स्‍वस्‍थ अंडाणु के साथ स्‍वस्‍थ्‍य गर्भाशय का होना जरूरी है। सरोगेसी की सहायता तभी ली जा सकती है जब मां बनने वाली महिला के गर्भ की दीवार बेहद कमजोर है या उसके गर्भाशय में कोई और समस्‍या है।
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    मातृत्व में देरी के कारण

    मां बनना हर महिला का सपना जरूर होता है। लेकिन इस सपने से भी ज्यादा जरूरी आज के युवाओँ का करियर हो गया है। मां बननें में देरी की वजह सिर्फ महिलाओं की ही इच्छा पर नहीं निर्भर है, पुरूष भी उतने ही जिम्मेदार हैं। करियर, बिंदास जिंदगी, जिम्मेदारी से भागने के चलते वो कई मुसीबतें सर पर लेते हैं, जिसमें एक ये भी है। अगर लड़किया 30 साल के बाद शादी करती हैं तो उनका शरीर मातृत्व संबंधी दायित्वों का निर्वहन उपयुक्त ढंग से करने में सक्षम नहीं हो पाती हैं। इसलिए गर्भधारण के बारे में वे सही तरीके से न सोच पाती हैं और एक स्‍वस्‍थ बच्‍चा पैदा करने में असफल रहती हैं।
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