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स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर है पिप्‍पली

By:Aditi Singh , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jun 29, 2015
पिप्पली या छोटी पीपल अनेक औषधीय गुणों से संपन्न होने के कारण आयुर्वेद की एक प्रमुख दवा है, आम जनमानस इसे गर्म मसाले की सामग्री के रूप में भी जानते हैं। इसके गुणों के बारे में जानने के लिए यह स्‍लाइड शो पढ़ें।
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    पिप्पली के फायदे

    पिप्पली की कोमल तनों वाली लताऐं 1-2 मीटर तक जमीन पर फैलती है। इसके गहरे रंग के चिकने पत्ते 2-3 इंच लंबे एवं 1-3 इंच चौड़े, हृदय के आकार के होते हैं। इसके पुष्पदंड 1-3 इंच एवं फल 1 इंच से थोड़े कम या अधिक लंबे शहतूत के आकार के होते हैं। कच्चे फलों का रंग हल्का पीलापन लिए एवं पकने पर गहरा हरा रंग फिर काला हो जाता है। इसके फलों को ही छोटी पिप्पली या पीपल कहा जाता है।
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    पिप्पली के फायदे
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    सिर दर्द

    पिप्पली को पानी में पीसकर माथे पर लेप करने से सिर दर्द ठीक होता है। पिप्पली और वच चूर्ण को बराबर मात्रा में लेकर 3 ग्राम की मात्रा में नियमित रूप से दो बार दूध या गर्म पानी के साथ सेवन करने से आधासीसी का दर्द ठीक होता है |
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    सिर दर्द
  • 3

    मोटापा

    पिप्पली का चूर्ण लगभग आधा ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम शहद के साथ प्रतिदिन 1 महीने तक सेवन करने से मोटापा समाप्त होता है।पिप्पली के 1 से 2 दाने दूध में देर तक उबाल लें और दूध से पिप्पली निकालकर खा लें और ऊपर से दूध पी लें। इससे मोटापा कम होता है।
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    मोटापा
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    जुकाम

    पिप्पली,पीपल मूल,काली मिर्च और सौंठ के समभाग चूर्ण को 2 ग्राम की मात्रा में लेकर शहद के साथ चाटने से जुकाम में लाभ होता है |आधा चम्मच पिप्पली चूर्ण में बराबर मात्रा में भुना जीरा तथा थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर छाछ के साथ प्रातः खाली पेट सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है |
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    जुकाम
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    हृदय रोग

    पिप्पली चूर्ण में शहद मिलाकर प्रातः सेवन करने से,कोलेस्ट्रोल की मात्रा नियमित होती है तथा हृदय रोगों में लाभ होता है। पिप्पली और छोटी हरड़ को बराबर-बररबर मिलाकर,पीसकर एक चम्मच की मात्रा में सुबह- शाम गुनगुने पानी से सेवन करने पर पेट दर्द,मरोड़,व दुर्गन्धयुक्त अतिसार ठीक होता है |
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    हृदय रोग
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    संक्रामक रोग

    पिप्पली के 1-2  ग्राम चूर्ण में सेंधानमक,हल्दी और सरसों का तेल मिलाकर दांत पर लगाने से दांत का दर्द ठीक होता है |पिप्पली मे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के निष्चित गुण हैं जिनके कारण टी.बी. एवं अन्य संक्रामक रोगों की चिकित्सा में इसका उपयोग लाभदायक होता है। पिप्पली अनेक आयुर्वेदीय एंव आधुनिक दवाओं की कार्यक्षमता को बढ़ा देती है।
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    संक्रामक रोग
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    वातजनित समस्‍यायें

    5-6 पुरानी पिप्पली के पौधे की जड़ सुखाकर कुटकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की 1-3 ग्राम की मात्रा गर्म पानी या गर्म दूध के साथ पिला देने से शरीर के किसी भी भाग का दर्द 1-2 घंटे में दूर हो जाता है। वृद्धा अवस्था में शरीर के दर्दो में यह अधिक लाभदायक होता है।
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    वातजनित समस्‍यायें
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    सांस फूलना या दमा

    2 ग्राम पिप्पल को कूटकर 4 कप पानी में उबाले और दो कप रह जाने पर उतार कर छान लें। इस पानी को 2-3 घंटे के अंतर पर थोड़ा-थोड़ा दिन भर पीने से कुछ ही दिनों में सांस फूलने की तकलीफ कम हो जायेगी।
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    सांस फूलना या दमा
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