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खुश रहने वाले लोग इन सात आदतों से रहते हैं दूर

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 28, 2014
खुश रहने के लिए जितना यह जानना जरूरी है कि आखिर क्‍या किया जाए, उतना ही यह जानना भी जरूरी है कि कौन से काम न किये जाएं। तो चलिये जानते हैं कि खुश रहने वाले लोग किन कामों से दूर रहते हैं।
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    हर किसी को है खुशी की चाह

    कौन है जो खुश रहना नहीं चाहता। और जीवन में खुश रहने के लिए क्‍या किया जाए, इस बाबत बहुत से लोग आपको सलाह देंगे। सब बतायेंगे कि आखिर क्‍या किया जाए जिससे कि दुख आपसे दूर रहे और खुश रह सकें। लेकिन, खुश रहने के लिए जितना यह जानना जरूरी है कि आखिर क्‍या किया जाए, उतना ही यह जानना भी जरूरी है कि कौन से काम न किये जाएं। तो चलिये जानते हैं कि खुश रहने वाले लोग किन कामों से दूर रहते हैं।
    image courtesy : getty images

    हर किसी को है खुशी की चाह
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    दूसरों पर दोष नहीं

    जो लोग खुश रहते हैं वे अपनी समस्‍याओं के लिए दूसरों पर दोषारोपण नहीं करते। जब हालात गैरमुफीद होते हैं, तब वे दूसरों को इसके लिए जिम्‍मेदार नहीं ठहराते। वे आगे बढ़कर खुद जिम्‍मेदारी लेते हैं। भले ही इन हालात के लिए काफी हद तक दूसरा व्‍यक्ति ही जिम्‍मेदार क्‍यों न हो। आप यह सोचकर हैरान हो सकते हैं कि समस्‍याओं के लिए खुद को जिम्‍मेदार ठहराने से वे लज्‍जा और आत्‍मग्‍लानि के शिकार हो सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होता।
    क्‍या किया जा सकता है: अगर हम अपनी समस्‍याओं का उत्‍तरदायित्‍व लेते हैं, तो उन्‍हें सुलझाने का दायित्‍व भी हमारा होता है। इससे हम अधिक प्रभावशाली तरीके से अपने जीवन और खुशियों का प्रबंधन कर सकते हैं। इससे हमें समस्‍याओं को सुलझाने का आत्‍मविश्‍वास भी मिलता है।

    दूसरों पर दोष नहीं
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    अधिक प्रतिक्रिया नहीं

    खुशी का मूल है कि आप ओवररिएक्‍ट करने से बचें। किसी परिस्थिति में अतिवादी प्रतिक्रिया हमारी प्रसन्‍नता और आनंद को नुकसान पहुंचा सकती है। कुछ लोग जीवन में आने वाली छोटी सी परेशानियों से ही वे घबरा जाते हैं। उन्‍हें लगता है कि उनके जीवन में सब कुछ बुरा है। वे स्‍वयं को कोसने में ही वक्‍त गंवाते हैं। वहीं खुश रहने वाले लोग अपने गम को खुद पर हावी नहीं होने देते। वे परेशानियों और मुसीबतों का सामना करने में लग जाते हैं और धीरे-धीरे अपनी खुशियों में इजाफा करते हैं।
    क्‍या किया जा सकता है: अगर आप मौजूदा नकारात्‍मक माहौल को स्‍थायी बनाकर बैठ गए हैं, तो स्‍वयं से एक सवाल पूछें कि आप इससे क्‍या सीख सकते हैं। और ये मुश्किल हालात मुझे कैसे बेहतर बना सकते हैं। इन सवालों के जवाब तलाशने से आपका मस्तिष्‍क बेहतर काम करेगा। और आपके लिए इन मुश्किल हालात से निकलना संभव होगा।

    अधिक प्रतिक्रिया नहीं
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    बुरा मत बोलो

    खुश लोग नकारात्‍मक भाषा का प्रयोग नहीं करते। वे न तो दूसरों का अपमान करते हैं और न ही दूसरों को अपना अपमान करने का अवसर ही देते हैं। वे न तो अंतर्मन में किसी का अपमान करते हैं और न ही बाहर ऊंची आवाज में बात करते हैं।
    क्‍या किया जा सकता है:  जब आप नकारात्‍मक भाषा का प्रयोग करते हैं, तो वे नकारात्‍मक भाव कहीं न कहीं आपके मन में बैठ जाती हैं। बेहतर तो यह है कि आप सोचें कि पहले आप इस परिस्थिति से कैसे उबर पायें हैं। इन हालात से कुछ सीखें और खुद को बेहतर इनसान बनाने का प्रयास करें।

    बुरा मत बोलो
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    फंसा हुआ महसूस न करें

    खुशमिजाज लोग स्‍वयं को कभी भी फंसा हुआ महसूस नहीं करते। वे हमेशा मौजूद विकल्‍पों पर ध्‍यान केंद्रित करते हैं। जब बाहृय शक्तियां उनके रास्‍ते में मुश्किलें पैदा करती हैं, वे तब भी मुश्किल हालात से निकलने के रा‍स्‍ते तलाश करते रहते हैं। वे स्‍वयं को हालात का मारा समझने के बजाय उससे लड़ने वाला लड़ाकू समझते हैं। खुद को नियति और परिस्थितियों का गुलाम समझना अप्रसन्‍नता का मूल कारण है।
    क्‍या किया जा सकता है: जब भी आप स्‍वयं को परिस्थितियों के वशीभूत मानें, तो स्‍वयं से सवाल करें कि आखिर कैसे आप स्‍वयं की क्षमताओं का बेहतर प्रबंधन कर सकते हैं।

    फंसा हुआ महसूस न करें
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    सबसे दोस्‍ती

    खुश लोगों के जुनून और रिश्‍तों का दायरा बहुत बड़ा होता है। आमतौर पर उन्‍हें कई शौक होते हैं। उनका सामाजिक दायरा भी बड़ा होता है। उनके कई दोस्‍त होते हैं जिनके साथ वे वक्‍त बिता सकते हैं। अपने धन को भी वे अलग-अलग माध्‍यमों में निवेश करके रखते हैं। इस बहुआयामी व्‍यक्तित्‍व के कारण वे जीवन की छोटी-मोटी क्षति से उन्‍हें अधिक फर्क नहीं पड़ता।  
    क्‍या किया जा सकता है: नये गतिविधियों में संलग्‍न हों, नये समूहों के साथ जुड़ें। नये दोस्‍त बनायें और पुराने दोस्‍तों के साथ संबंधों को मजबूत करें। ऐसे काम करें जिनसे आपको खुशी मिले। मान लीजिये आपको सिर्फ गोल्‍फ पसंद है, तो कंधे में दर्द या चोट के कारण आपका वह शौक खत्‍म हो सकता है, तो बेहतर है कि आप उसके साथ ही शतरंज या किसी अन्‍य खेल को भी अपना शौक बनायें। या फिर घूमने को अपनी आदत बनायें।

    सबसे दोस्‍ती
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    पुरानी नाकामी में न रहना

    नाखुश लोग अपनी पुरानी नाकामियों से बाहर नहीं निकल पाते। इस कारण उनका वर्तमान और भविष्‍य दोनों खराब होते हैं। लेकिन खुश रहने वाले लोग ऐसा नहीं करते। वे अपनी गलतियों को याद तो रखते हैं, लेकिन हमेशा उनका मलाल नहीं करते रहते। वे अपनी गलती से सीखते हैं और भविष्‍य की योजना बनाते हैं।
    क्‍या किया जा सकता है: जब भी आपके दिमाग में कोई पुरानी बात आने लगे, तो इस बारे में विचार करें कि आखिर आपने अपनी गलती से क्‍या सीखा। और आगे से उसे करेन से कैसे बचना है।

    पुरानी नाकामी में न रहना
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    वक्‍त जाया नहीं करते

    खुश रहने वाले लोग किसी काम में उतना ही वक्‍त देते हैं, जितना जरूरी होता हे। वहीं नाखुश लोग वक्‍त की कद्र नहीं करते। खुशी से महरूम लोग काम न करने के बहाने तलाशते हैं और अपना वक्‍त बर्बाद करते हैं। ऐसे लोग खुद तो नाखुश रहते ही हैं साथ ही अपने आसपास का माहौल भी नकारात्‍मक और नाखुशगवार बना देते हैं।
    क्‍या किया जा सकता है: आमतौर पर आपको ऐसे लोगों के साथ वक्‍त न बिताने की सलाह दी जाती है। लेकिन, कुछ वक्‍त इनके साथ जरूर बिताइये। इस पूरी प्रक्रिया को किसी सीख की तरह लें। जानें कि आखिर क्‍या आदतें हैं जो इन दुखी लोगों को वाकई 'दुखी' बनाती हैं। और फिर इन आदतों से दूर रहने का प्रयास करें।

    वक्‍त जाया नहीं करते
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