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आदतें जो बिगाड़ सकती हैं मेटाबॉलिज्‍म

By:Nachiketa Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jul 14, 2014
मेटाबॉलिज्‍म हमारे शरीर के लिए ऊर्जा देने के साथ-साथ सेल्‍स के निर्माण में भी सहयोग करता है, लेकिन हमारी दिनचर्या की कई अस्‍वस्‍थ आदतों के कारण यह धीमा हो जाता है।
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    मेटाबॉलिज्‍म क्‍या है

    मेटाबॉलिज्म को चयापचय भी कहते हैं, यह शरीर में भोजन को एनर्जी, एंजाइम अथवा फैट में परिवर्तित करती है। मेटाबॉलिज्म का चक्र हमारे शरीर में निरंतर चलता रहता है, जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है। यह एनर्जी के साथ सेल्स को बनने में भी मदद करता है। इसकी प्रक्रिया हमारे शरीर में 24 घंटे चलती रहती है। अगर यह प्रकिया रुक जाए तो शरीर की तमाम क्रियाएं भी ठहर सकती हैं। मेटाबॉलिज्म आमतौर पर दो प्रकार का होता है- 'हाई मेटाबॉलिज्म' और 'स्‍लो मेटाबॉलिज्म'। मेटाबॉलिज्म के दोनों प्रकार हमारी सेहत को प्रभावित करते हैं। इसलिए इसका संतुलित होना बहुत जरूरी है।

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    मेटाबॉलिज्‍म क्‍या है
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    आदतें भी हैं जिम्‍मेदार

    मेटाबॉलिज्‍म पर न केवल खानपान और एक्‍सरसाइज का असर पड़ता है बल्कि कई ऐसी सामान्‍य आदते हैं जो सीधे मेटाबॉलिज्‍म को प्रभावित करती हैं। ये आदतें हमारी दिनचर्या का प्रमुख हिस्‍सा होती हैं और इनका सीधा असर हमारे चयापचय पर पड़ता है। अगर हाई मेटाबॉलिज्‍म है तो इससे वजन कम होगा क्‍योंकि इसके कारण कैलोरी बहुत तेजी से जलती है और अगर स्‍लो मेटाबॉलिज्‍म है तो वजन बढ़ेगा क्‍योंकि यह कैलोरी बहुत धीरे-धीरे जलायेगा। इसलिए मेटाबॉलिज्‍म ठीक होना ही हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए ठीक है।

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    आदतें भी हैं जिम्‍मेदार
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    लाल मिर्च का सेवन

    खाने में अगर लाल मिर्च हो तो व्‍यक्ति अपनी भूख से लगभग 30 प्रतिशत कम खाता है, क्‍योंकि लाल मिर्च में 'कैप्‍सेसिन' नामक केमिकल होता है जो भूख को जल्‍दी शांत कर देता है। यह तेजी से कैलोरी जलाने में मदद करता है, यानी यह मेटबॉलिज्‍म को हाई कर देता है। इसलिए खाने में लाल मिर्च का सेवन न करें।

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    लाल मिर्च का सेवन
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    एक जगह बैठना

    अगर आपकी आदत एक ही जगह पर घंटों बैठकर काम करने या फिर घंटों टीवी देखने की है तो यह मेटाबॉलिज्‍म के लिए सही नहीं। एक ही जगह अगर आप लगातार 30 मिनट से ज्‍यादा बैठते हैं तो इसके कारण मेटाबॉलिक सिंड्रोम के उच्‍च होने का खतरा रहता है और इसके कारण डायबिटीज, दिल की बीमारी, मोटापा, ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या हो सकती है।

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    एक जगह बैठना
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    खाने को न धुलना

    खाने में कई प्रकार के केमिकल होते हैं जो हमारे मेटाबॉलिज्‍म पर असर डालते हैं, चाहे वह ताजा और हरी सब्‍जी ही क्‍यों न हो। इन केमिकल के कारण सबसे अधिक मोटापे का खतरा होता है। इसलिए जब भी सब्जियों का प्रयोग करें उन्‍हें अच्‍छे से धो लीजिए।

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    खाने को न धुलना
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    हाथ न साफ करना

    पेनिंगटन बॉयोमेडिकल रिसर्च सेंटर द्वारा किये गये शोध के अनुसार, खाने से पहले हाथ न धोने की आदत हमारे मेटाबॉलिज्‍म के लिए ठीक नहीं। अगर हम बिना हाथ साफ किये खाना खाते हैं तो हमारे वातावरण में मौजूद एडीनोवायरस-36 हमारे शरीर में प्रवेश कर जाता है और यह वजन बढ़ाता है। इसलिए खाने से पहले हाथ साफ करें।

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    हाथ न साफ करना
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    भूखे रहना

    ज्यादा देर भूखे रह कर एकदम खाने पर टूट पड़ना समझदारी नहीं है। हर दो-तीन घंटे के अंतराल पर अगर कुछ हल्का-फुल्का खाते रहेंगे तो शरीर का मेटाबॉलिज्म ठीक रहेगा। थोड़ा खायें और दिन में कई बार खायें।

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    भूखे रहना
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    अधूरी नींद

    खान-पान के साथ अपने आराम पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं देने से मेटाबॉलिज्‍म प्रभावित होता है। अगर रात में ठीक से नींद नहीं आती तो वजन बढ़ने की आशंका अधिक रहती है। सोते समय भी शरीर में ऊर्जा की खपत होती है। साथ ही रात को देर तक जागने से भूख लगने पर शरीर हाई कैलोरी वाली चीजें खाने की ओर आकर्षित होता है। ये चीजें मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती हैं। कम से कम सात घंटे की अच्छी नींद लेना बेहद जरूरी है।

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    अधूरी नींद
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