गाइनेकोमेस्टिया में मददगार होते हैं ये घरेलू उपाय

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 06, 2015

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हालांकि सर्जरी, दवाओं और हार्मोन थेरेपी के द्वारा इसका उपचार किया जा सकता है। लेकिन गाइनेकोमेस्टिया के लिए प्राकृतिक उपचार की एक विस्‍तृता विविधता की भी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
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    गाइनेकोमेस्टिया के लिए घरेलू उपाय

    गाइनेकोमेस्टिया की समस्‍या होने पर पुरुषों के स्‍तनों में बढ़ोतरी हो जाती है। यह समस्‍या एक या दोनों स्‍तनों को प्रभावित कर सकती है। पुरुषों में होने वाली यह बीमारी हार्मोन में गड़बड़ी के कारण होती है। जब‍ बच्‍चे बड़े होते हैं यानी युवावस्‍था में आने पर यह समस्‍या होती है। इसके अलावा उम्र के ढलान के समय हार्मोंन में बदलाव के कारण भी पुरुष इसकी गिरफ्त में आ सकते हैं। हालांकि यह कोई गंभीर समस्‍या नहीं है लेकिन इस स्थिति से उबरना मुश्किल होता है। गाइनेकोमेस्टिया के कारण पुरुषों के स्‍तनों में दर्द हो सकता है। हालांकि सर्जरी, दवाओं और हार्मोन थेरेपी के द्वारा इसका उपचार किया जा सकता है। लेकिन गाइनेकोमेस्टिया के लिए प्राकृतिक उपचार की एक विस्‍तृता विविधता की भी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।  
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    अलसी और सोया

    हालांकि अलसी और सोया टेस्टोस्टेरोन की मात्रा को बढ़ाने में मददगार नहीं होते, लेकिन ये शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर कम करने में सक्षम होते हैं। एस्ट्रोजन की मात्रा कम करने के अलावा, अलसी और सोया के अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य लाभों में गाइनेकोमेस्टिया के लक्षणों के उपचार में मदद करना भी शामिल है। अपने दैनिक आहार में अलसी के तेल को शामिल करें और डेयरी मिल्‍क के स्‍थान पर सोया मिल्‍क लें। यह गाइनेकोमेस्टिया के साथ कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में भी आपकी मदद करता हैं।
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    रेड क्‍लोवर

    लाल तिपतिया घास या रेड क्‍लोवर एस्‍ट्रोजन कम करने वाली जड़ी-बूटी है। लाल तिपतिया घास एस्‍ट्रोजन को कम करने वाला एक शक्तिशाली एजेंट है जिसे गेनीस्टीन कहते हैं। इसका इस्‍तेमाल आप चाय के रूप में कर सकते हैं। लेकिन किसी भी हार्मोन सप्‍लीमेंट  या जड़ी-बूटियों के इस्‍तेमाल पर विचार करने से पहले आपको अपने डॉक्‍टर से परामर्श करना चाहिए।
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    हल्दी

    हल्‍दी प्रसिद्ध भारतीय मसाला है। यह अदरक की प्रजाति का पौधा है जिस की जड़ कंद मूल के रूप में प्रयोग की जाती है। यह भारतीय रसोईघर की शान है। इसके अलावा, हल्‍दी पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने के लिए सक्षम माना जाता है। नतीजतन, इसके इस्‍तेमाल से पुरुष गाइनेकोमेस्टिया की समस्‍या से बच सकते हैं।
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    ओमेगा -3 फैटी एसिड और जिंक

    ओमेगा -3 फैटी एसिड गाइनेकोमेस्टिया से पीड़ित रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता हैं। यह टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है। मछली ओमेगा 3 फैटी एसिड का एक समृद्ध स्रोत है। इसके अलावा जिंक का सेवन भी गाइनेकोमेस्टिया के इलाज के लिए उपयोगी होता है। कई अध्‍ययनों के अनुसार, जिंक स्वाभाविक रूप से टेस्टोस्टेरोन को बढ़ता है। नाखूनों के नीचे सफेद धब्बे जिंक की कमी के आम लक्षण हैं। जिंक सप्‍लीमेंट लेने से टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने में मदद मिलती है।
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    गुग्गुल

    गुग्गुल एक वृक्ष है। इससे प्राप्त राल जैसे पदार्थ को 'गुग्गल' कहा जाता है। यह एक प्राचीन औषधीय जड़ी बूटी है। इसका  गाइनेकोमेस्टिया के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है। यह एस्ट्रोजन के स्तर को कम करने और शरीर के अंदर पुरुष हार्मोन का उत्पादन बढ़ाने में सहायक होता है। नियमित आधार पर इस जड़ी बूटी का उपयोग पुरुषों के स्तन के ऊतकों पर वसा का जमाव कम करने में मददगार होता है। गुग्गुल का अर्क बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाता हैं।
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    डेविल क्लॉ (शैतान पंजा)

    डेविल क्‍लॉ एक औषधीय जड़ी बूटी है जो गाइनेकोमेस्टिया के इलाज के लिए बहुत उपयोगी होती है। इस जड़ी बूटी का इस्‍तेमाल पुरुषों में पौरूष को बढ़ाने के लिए प्राचीन काल से किया जाता रहा है। यह टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने में भी सहायक होता है। इस जड़ी बूटी से तैयार चाय गाइनेकोमेस्टिया से पीड़ित रोगियों के लिए फायदेमंद होती है। इस जड़ी बूटी की जड़ लेकर अच्‍छे से उबालकर हर्बल चाय तैयार करें। इस हर्बल चाय को दिन दो बार लेना चाहिए।
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    मिल्‍क थीस्ल

    मिल्‍क थीस्ल गाइनेकोमेस्टिया के इलाज के लिए उपयोगी होता है। मिल्‍क थीस्ल से तैयार चाय भी फायदेमंद होती है। इसे सप्‍लीमेंट के रूप में भी लिया जा सकता है। सिलीमेरिन मिल्‍क थीस्ल का एक सक्रिय घटक है जो गाइनेकोमेस्टिया के उपचार के लिए उपयोगी होता है। यह अल्कोहलिक लीवर और क्रोनिक लीवर डिजीज के इलाज के लिए भी कारगर होता है। यह लीवर डिजीज के कारण होने वाली स्‍तन वृद्धि को दूर करने में भी मददगार होता है।  
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