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अतीत से निकलें और वर्तमान में जियें

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 31, 2014
जब लोग भूतकाल को पुरुषार्थ मानते हैं तो वह आत्मग्लानि और पश्चाताप से भर जाते हैं और जब वे भविष्य को भाग्य मानते हैं तो सुस्ती और जड़ता उनके ऊपर प्रभावी होने लगती है।
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    अतीत और वर्तमान

    जब लोग भूतकाल को पुरुषार्थ मानते हैं तो वह आत्मग्लानि और पश्चाताप से भर जाते हैं। और जब वे भविष्य को भाग्य मानते हैं तो सुस्ती और जड़ता उनके ऊपर प्रभावी होने लगती है। लेकिन ज्ञानी लोग भूतकाल को भाग्य और भविष्यकाल को पुरुषार्थ मानते हैं। जब आप भूतकाल को नियति मान लेते हैं तो मन और जीवन में और अधिक प्रश्न नहीं उठते हैं और मन को आराम मिल जाता है। तो चलिये भतकाल को भुलाएं और भविष्य में जियें। वो कहते हैं ना-

    जब तक आप अपने अतीत को याद रखेंगे.. भविष्य की योजना कैसे बना पाएंगे
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    अतीत और वर्तमान
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    बेहतर कल की सोच नहीं, बेहतर बनाएं आज

    भूतकाल ही नहीं बेहतर कल की सोच के साथ जीवन जीने से बेहतर है कि वर्तमान में रहकर बेहतर आज के साथ जीवन जीयें। हर दिन सुबह ध्यान करें, सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें। ऐसा कर आपकी हर मुश्किल आसान होने लग जाएगी और आप एक बेहतर आज बना पाएंगे।
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    बेहतर कल की सोच नहीं, बेहतर बनाएं आज
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    इसी क्षण जागो

    इसी क्षण जागिये और देखिये कि आप कौन हैं? क्या आप अपने आप को अपने दिखावे के आधार पर, या जो काम आप करते हैं, उसके आधार पर या फिर लोगों के साथ जो संबंध है उसके आधार पर अपना परिचय देंगे? शायद नहीं...
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    इसी क्षण जागो
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    अपने शरीर से कहीं ज्यादा हैं आप

    इस बात को समझें कि आप अपने शरीर से कहीं ज्यादा हैं, और अपने विचारों और भावों से भी कहीं बड़े हैं। ये सब कुछ बदल रहा है, लेकिन आप वो हैं जो बदल नहीं रहे हैं, जो श्वाश्वत हैं। आप अनंत आत्मा हैं। खुद की वास्तविक्ता को पहचानें और वर्तमान को जीना सीखें।  
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    अपने शरीर से कहीं ज्यादा हैं आप
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    आत्मविश्वास, सहयोग, श्रद्धा और ज्ञान

    क्या आप जानते हैं कि आत्मा की प्रकृति क्या है? आत्मा अनुभव करती है और मूल्यों को बताती है। हमें अनुभव और भावनाओं का मूल्य समझ तो आता है, किन्तु उन्हें शब्दों में न तो व्यक्त किया जा सकता है और न ही शब्दों में इन्हें समझा ही जा सकता है। वे मूल्य जो जीवन शक्ति देते हैं, वे आत्मविश्वास, सहयोग, श्रद्धा और ज्ञान होते हैं।
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    आत्मविश्वास, सहयोग, श्रद्धा और ज्ञान
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    मूल्य आत्मा से प्राप्त होते हैं

    मूल्य हमें आत्मा से ही प्राप्त होते हैं। हमें ऐसा लगता है कि हम भौतिक पदार्थों में सुविधा प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन केवल भौतिकता ही पूर्णं नही है। प्रसन्नता चेतना का गुण होती है। यह भौतिक पदार्थ पर निर्भर तो करती है, लेकिन यह एक स्थान के बाद समझ पर निर्भर करती है। जैसे ही हम आत्मिक मूल्यों को जीना शुरू कर देते हैं, जीवन अपनी प्रचूरता को प्राप्त होने लगता है।
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    मूल्य आत्मा से प्राप्त होते हैं
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    आध्यात्मिक मूल्यों को जीयें

    आध्यात्मिक मूल्यों को जीने से व्यक्तित्व शक्तिशाली बनता है। आध्यात्मिक जीवन अपनेपन का भाव, जिम्मेदारी, करुणा और विश्व की देखभाल का भाव लाता है, पूरी मानव जाति के लिये एक नेक सोच देता है। आध्यात्मिकता ही सही अर्थों में जाति, वर्ण, धर्म और राष्ट्रीयता की सीमाओं को तोड़ सकती है और हमें महसूस करा सकती है कि जीवन सब जगह व्याप्त है। इसी लिये जब मन विश्राम करता है, तो बुद्धी तीक्ष्ण होती है। लेकिन जब मन आकांक्षाओं, ज्वर और इच्छाओं से भरा होता है तो बुद्धी अपनी तीक्ष्णता खो देती है।
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    आध्यात्मिक मूल्यों को जीयें
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    लोभ, घृणा, ईर्ष्या आदि से मुक्ति

    आपको अपने लोभ, घृणा, ईर्ष्या और अन्य अपूर्णताओं से खुद को मुक्त करने की इच्छा रखनी होगी। क्योंकि जब तक मन इन नकारात्मकताओं में उलझा रहेगा, यह शांत और प्रसन्न नही हो पाएगा और आप अपने जीवन को प्रसन्नता से नही जी पाएंगे।
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    लोभ, घृणा, ईर्ष्या आदि से मुक्ति
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    नकारात्मकता भूतकाल का प्रभाव है

    यह जान लें कि यह नकारात्मकता भूतकाल का प्रभाव होती है और अपने भूतकाल को वर्तमान को प्रभावित करने से रोकें। और अपने भूतकाल को क्षमा करें। यदि आप अपने भूतकाल को क्षमा नहीं करेंगे तो आपका भविष्य दयनीय बन जाएगा। भूतकाल को छोड़कर एक ताजा जीवन जीने का संकल्प लें।
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    नकारात्मकता भूतकाल का प्रभाव है
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