भारतीय पुरुषों को करवानी चाहिये ये दस रक्‍त जांच

By:Nachiketa Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 03, 2015

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नियमित खून की जांच से ऐसी बीमारियों का भी निदान हो जाता है जिनके लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, इसलिए नियमित रूप से खून की जांच सभी भारतीय पुरुषों को कराना चाहिए।
  • 1

    पुरुषों के खून की जांच

    तीस साल की उम्र के बाद पुरुषों को खून की जांच जरूर करवाना चाहिए। चिकित्‍सक भी सलाह देते हैं कि उम्र के इस पड़ाव तक पहुंचने के बाद नियमित रूप से खून की जांच जरूरी है, इससे पुरुषों से संबंधित बीमारियों जैसे - थॉयराइड, डायबिटीज, ब्‍लड प्रेशर, एचआईवी, आदि का पता चल जाता है। इसके अलावा नियमित ब्‍लड टेस्‍ट कराने से ऐसी बीमारियों का भी पता चला जाता है जो छिपी हुई होती हैं, इन बीमारियों का पता तब चलता है जब ये बहुत खतरनाक हो जाती हैं, थॉयराइड और ब्‍लड कैंसर भी ऐसी ही बीमारी हैं। इसलिए पुरुषों को नियमित रूप से खून की जांच करवानी चाहिए।

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  • 2

    सीबीसी यानी कंपलीट ब्‍लड काउंट

    प्रत्‍येक पुरुष को अपने ब्‍लड में मौजूद कोशिकाओं की गिनती जरूर करानी चाहिए, इसे ही सीबीसी या एफबीई (full blood exam) कहते हैं। इस जांच में व्‍यक्ति के खून में मौजूद कोशिकाओं की जांच की जाती है। अगर किसी व्‍यक्ति के खून में रक्‍त कण कम या अधिक हैं तो उसे स्‍वास्‍थ्‍य संबंधित समस्‍या हो सकती है। इसके अलावा यह व्‍यक्ति की बीमारियों की भी जानकारी भी देता है।

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  • 3

    ग्‍लूकोज टेस्‍ट

    खून में मौजूद ग्‍लूकोज हमारे लिए बहुत जरूरी है, इससे ही हमें ऊर्जा मिलती है। इसकी मात्रा कम और अधिक होने पर नुकसान हो सकता है। ब्‍लड में ग्‍लूकोज की कमी से व्‍यक्ति दिमाग कमजोर होता है और उसकी प्रवृत्ति गुस्‍सैल होती है। इसकी अधिकता से आंखों को नुकसान होता है, इसके साथ ही किडनी, तंत्रिका तंत्र, और रक्‍त धमिनयां क्षतिग्रस्‍त हो सकती हैं।

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  • 4

    कोलेस्‍ट्रॉल की जांच

    पुरुषों को उनके शरीर के कोलेस्‍ट्रॉल की जांच करानी चाहिए, खासकर एचडीएल यानी हाई डेंसिटी लीपोप्रोटीन की। इसकी कमी से दिल की बीमारी होने का खतरा रहता है। अगर जांच में एचडीएल कोलेस्‍ट्रॉल का स्‍तर 60 मिग्रा/डेसीलीटर से अधिक है तब दिल की बीमारी होने की आशंका कम होती है। लेकिन अगर किसी व्‍व्‍यक्ति का एचडीएल स्‍तर 40 मिग्रा/डेसीलीटर से कम है तो दिल की बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है।

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  • 5

    होमोसिस्टीन (Homocysteine)

    यह एक प्रकार का अमीनो अम्ल जिसकी अधिकता से हृदय रोग होने की संभावना बढ़ सकती है, इसलिए इसकी जांच जरूरी है। इसके कारण दिल का दौरा, खून के थक्‍के बनना, और कुछ मामलों में अल्‍जाइमर जैसी बीमारी होने की संभावना रहती है।

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  • 6

    सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्‍ट

    सीआरपी यानी सी-रिएक्टिव प्रोटीन लीवर के द्वारा बनाया जाता है। शरीर में जब किसी प्रकार की सूजन होती है तब इसका स्‍तर बढ़ जाता है। यह रूमेटाइड अर्थराइटिस और ल्‍यूपस जैसी खतरनाक बीमारी से संबंधित है, इसलिए इसकी नियमित जांच कराना जरूरी है।

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  • 7

    पीएसए टेस्‍ट (Prostate Specific Antigen)

    यह एक प्रकार का प्रोटीन है जो पुरुषों की प्रोस्‍टेट ग्रंथि से स्रावित होता है। इसके सही स्‍तर का पता लगाने के लिए खून में मौजूद पीएसए की जांच की जाती है। इस प्रोटीन की कमी के कारण प्रोस्‍टेट कैंसर की समस्‍या हो सकती है।

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  • 8

    डीएचईए टेस्‍ट (Dehydroepiandrosterone)

    डीएचईए का निर्माण एड्रीनॉल ग्रंथि से होता है, यह सेक्‍स हार्मोन इस्‍ट्रोजन और टेस्‍टोस्‍टेरॉन का पूर्वानुभास है। 20 साल की उम्र में इसका स्‍तर सबसे अधिक होता है, उसके बाद यह कम होता जाता है। अगर इसका स्‍तर सही रहे तो इम्यून सिस्‍टम सही रहता है, ह‍ड्डियों का घनत्‍व कम नहीं होता, मूड ठीक रहता है और यौन इच्‍छा में कमी नहीं आती है।

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  • 9

    थॉयराइड जांच

    थॉयराइड एक साइलेंट किलर है, इसके लक्षण तब दिखाई पड़ते हैं जब यह बीमारी बहुत खतरनाक हो जाती है। अनिद्रा, तनाव के साथ खानपान में सोडियम की कमी के कारण थॉयराइड की समस्‍या होती है। थॉयराइड ग्रंथि के अधिक सक्रिय होने से दिल की बीमारी, वजन कम होना, थकान होने जैसी समस्‍यायें होती हैं।

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  • 10

    टेस्‍टोस्‍टेरॉन की जांच

    टेस्‍टोस्‍टेरॉन पुरुषों के टेस्टिस यानी वृषण से संबंधित है, इसके स्‍तर में कमी के कारण यौन इच्‍छा में कमी, इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन, मांसपेशियों का कमजोर होने जैसी समस्‍यायें होती हैं। इसके अलावा पेट की चर्बी का बढ़ना, हड्डियों का घनत्‍व कम होना, तनाव, अल्‍जाइमर के साथ टाइप2 डायबिटीज और एथेरोस्‍क्‍लेरोसिस होने की संभावना बढ़ जाती है।

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  • 11

    एस्पिरिन प्रतिरोध की जांच

    एस्पिरिन प्‍लेटलेट्स के लिए बहुत जरूरी है, यह खून के थक्‍के बनने से रोकता है। दिल के दौरे से ग्रस्‍त मरीजों को एस्पिरिन साथ में रखने की हिदायत दी जाती है। इस दवा के प्रतिरोध के जांच के आधार पर यह भी पता चल जाता है कि अन्‍य दवायें आपके लिए कितनी कारगर हैं। स्‍वस्‍थ दिनचर्या के साथ किसी बीमारी का समय पर निदान होने से सामान्‍य और खतरनाक बीमारी से बचाव किया जा सकता है।

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