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प्रत्‍येक पुरुष को कराने चाहिए कुछ जरूरी स्‍क्रीनिंग टेस्‍ट

By:Nachiketa Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:May 03, 2014
स्‍वस्‍थ पुरुषों को भी खतरनाक बीमारी हो सकती है, लेकिन नियमित रूप से जरूरी स्‍क्रीनिंग कराकर इससे आसानी से बचाव किया जा सकता है।
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    क्‍यों जरूरी है स्‍क्रीनिंग

    आपका शरीर अच्‍छे से काम कर रहा है, आपको कोई बीमारी नहीं इसका मतलब यह नहीं कि आप पूरी तरह स्‍वस्‍थ हैं। कई बीमारियां ऐसी भी हैं जिनके लक्षण दिखाई नहीं देते है, जैसे डायबिटीज, थायराइड, आदि। इनका पता लगाने के लिए पुरुषों को जरूरी स्‍क्रीनिंग टेस्‍ट कराना चाहिए, भले ही आप नियमित व्‍यायाम करते हैं, हेल्‍दी आहार का सेवन करते हैं, लेकिन फिर भी ये स्‍क्रीनिंग टेस्‍ट जरूर करायें।

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    क्‍यों जरूरी है स्‍क्रीनिंग
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    प्रोस्‍टेट कैंसर

    पुरुषों में सबसे ज्‍यादा सामान्‍य है प्रोस्‍टेट कैंसर। यह धीरे-धीरे फैलता है, इसके लक्षण देरी से दिखाई देते हैं। प्रोस्‍टेट की स्‍क्रीनिंग के जरिये इसके बारे में आसानी से पता लगाया जा सकता है। अगर कैंसर का पता पहले चरण में चल जाये तो इसके उपचार में आसानी हो सकती है। प्रोस्‍टेट की स्‍क्रीनिंग के लिए डीआरई (डिजिटल रेक्‍टल इग्‍जैम) और पीएसए (प्रोस्‍टेट स्‍पेसिफिक एंटीजन) का पता लगाने के लिए रक्‍त की जांच की जाती है।

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    प्रोस्‍टेट कैंसर
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    टेस्टिकुलर कैंसर

    पुरुषों के टेस्टिकल्‍स में फैलने वाला यह भी एक सामान्‍य कैंसर है। टेस्टिकुलर ग्रंथि पुरुषों के स्‍पर्म उत्‍पन्‍न करती है। 20 से 54 साल के पुरुषों में इस कैंसर के होने की संभावना अधिक होती है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार प्रत्‍येक पुरुष को यह जांच नियमित करानी चाहिए। अगर किसी के परिवार में किसी को यह हो चुका है तो वह इसकी जांच जरूर करायें। कुछ‍ चिकित्‍सक सलाह देते हैं कि पुरुषों को अपने टैस्टिकल्‍स की स्‍वत: जांच करनी चाहिए।

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    टेस्टिकुलर कैंसर
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    कोलोरेक्‍टल कैंसर

    कैंसर के कारण होने वाली मौतों में कोलोरेक्‍टल कैंसर दूसरा सबसे प्रमुख कारण है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों में यह कैंसर फैलने की अधिक संभावना होती है। यह पुरुषों के कोलेन (मलाशय) में फैलता है। धीरे-धीरे यह कैंसर पूरे शरीर में फैलता है। इसके स्‍क्रीनिंग के लिए कोलोनोस्‍कोपी (सीटी स्‍कैन और एक्‍स-रे के जरिये) की जाती है।

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    कोलोरेक्‍टल कैंसर
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    त्‍वचा का कैंसर

    स्किन कैंसर में सबसे घातक मेलानोमा होता है। यह मेलानोसाइट्स सेल्‍स से फैलता जो त्‍वचा के रंग के लिए जिम्‍मेदार हैं। 50 साल की उम्र के बाद इस कैंसर के फैलने की संभावना दोगुनी हो जाती है। धूप के संपर्क में रहने वाले पुरुषों में इस कैंसर के फैलने की संभावना अधिक होती है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी और अमेरिकन एकेडेमी ऑफ डर्माटोलॉजी खुद से त्‍वचा की परीक्षण करने की सलाह देते हैं। अगर त्‍वचा की रंग, आकार में बदलाव हो रहा है तो उसे नजरअंदाज न करें। जल्‍दी पता चलने स्किन कैंसर का उपचार आसानी से हो सकता है।

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    त्‍वचा का कैंसर
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    उच्‍च रक्‍तचाप (हाइपरटेंशन)

    उम्र के साथ उच्‍च रक्‍तचाप की समस्‍या बढ़ती जाती है। इसके लिए सबसे ज्‍यादा जिम्‍मेदार वजन और जीवनशैली है। उच्‍च रक्‍तचाप के कारण दिल और किडनी की समस्‍या हो सकती है। सामान्‍य ब्‍लड प्रेशर 120/80 और उच्‍च रक्‍तचाप 140/90 या उससे अधिक है। इन दोनों के बीच की स्थिति को प्रीहाइपरटेंशन कहते हैं।

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    उच्‍च रक्‍तचाप (हाइपरटेंशन)
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    कोलेस्‍टेरॉल की जांच

    कोलेस्‍ट्रॉल का स्‍तर जांचने के लिए रक्‍त की जांच की जाती है। इसमें एलडीएल (बैड कोलेस्‍टेरॉल), एचडीएल (गुड कोलेस्‍टेरॉल) और ट्रीग्‍लीसीराइड्स (ब्‍लड फैट) की जांच की जाती है। इसकी जांच से दिल की बीमारियों, दिल के दौरे, और डायबिटीज जैसी खतरनाक बीमारी से बचाव किया जा सकता है। 20 साल के बाद प्रत्‍येक 5 साल में और 35 साल के बाद प्रत्‍येक साल कोलेस्‍टेरॉल की जांच करानी चाहिए।

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    कोलेस्‍टेरॉल की जांच
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    टाइप2 डायबिटीज

    केवल अमेरिका की बात करें तो वहां एक-तिहाई लोगों को नहीं पता कि वे टाइप2 डायबिटीज से ग्रस्‍त हैं। डायबिटीज के कारण दिल का दौरा, किड्नी की बीमारियां, नपुंसकता और आंखों की रोशनी जा सकती है। अगर डायबिटीज का पता इसके शुरूआती चरण में चल जाये तो इसे बढ़ने से रोका जा सकता है। इसकी स्‍क्रीनिंग के लिए प्‍लाज्‍मा ग्‍लूकोज टेस्‍ट किया जाता है। इसके अलावा ए1सी जांच (इससे ब्‍लड शुगर के स्‍तर का पता लगाते हैं) की जाती है। स्‍वस्‍थ युवाओं को भी प्रत्‍येक 3 साल पर और 45 साल के बाद नियमित रूप से इसकी जांच करानी चाहिए।

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    टाइप2 डायबिटीज
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    ह्यूमन इम्‍यूनोडिफिसिएंसी वायरस (एचआईवी)

    एचआईवी ऐसा वायरस है जो एड्स के लिए जिम्‍मेदार है, यह संक्रमित खून के जरिये एक व्‍यक्ति से दूसरे में पहुंचता है। इसके अलावा असुरक्षित यौन संबंध बनाने से भी यह संक्रमण फैलता है। अभी भी यह एक लाइलाज बीमारी है। एचआईवी के लिए खून की जांच की जाती है। इसके पहले जांच को एएलआईएसए या ईआईए कहते हैं। अगर आप इससे संक्रमित नहीं हैं फिर भी इसकी जांच अवश्‍य करायें। इससे बचाव के लिए जरूरी है सुरक्षित यौन संबंध बनायें, संक्रमित खून न चढ़वायें।

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    ह्यूमन इम्‍यूनोडिफिसिएंसी वायरस (एचआईवी)
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    आंखों की जांच

    उम्र बढ़ने के साथ आंखों की रोशनी भी कम होती जाती है, लेकिन आंखों की समस्‍या किसी भी उम्र के व्‍यक्ति को हो सकती है। ग्‍लूकोमा यानी मोतियाबिंद से बचाव के लिए जरूरी है समय रहते इसका पता चल जाये नहीं तो आंखों की रोशनी जा सकती है। उच्‍च रक्‍तचाप से ग्रस्‍त व्‍यक्ति के ऑप्टिक तंत्रिका के क्षतिग्रस्‍त होने की संभावना अधिक होती है। इसलिए 40 की उम्र से पहले प्रत्‍येक 2-4 साल में, 40 से 54 के बीच में प्रत्‍येक 1-3 साल में, 55 से 64 के बीच में प्रत्‍येक 1-2 साल में और 65 साल के बाद 6-12 महीने में आंखों की नियमित जांच करानी चाहिए।

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    आंखों की जांच
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    स्‍क्रीनिंग के फायदे

    पुरुषों को समय-सयम पर स्‍क्रीनिंग कराना चाहिए, इससे आप ऐसी कई खतरनाक बीमारियों से बच सकते हैं जिसके लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते हैं। कई बीमारियां ऐसी हैं जिनके लक्षण तब दिखाई देते हैं जब उसका उपचार मुश्किल हो जाता है। इसलिए समय-समय पर स्‍क्रीनिंग कराना बहुत जरूरी है।

     

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    स्‍क्रीनिंग के फायदे
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