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बढ़ा हुआ प्रोस्टेट आपके सेक्स जीवन को कर सकता है प्रभावित

By:Pradeep Saxena, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Apr 09, 2014
प्रोस्‍टेट ग्रंथि को पौरुष ग्रंथि भी कहा जाता है, यदि यह बढ़ जाये तो कई प्रकार की सेक्‍स समस्‍यायें शुरू हो जाती हैं।
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    प्रोस्‍टेट और सेक्‍स

    प्रोस्‍टेट ग्रंथि को पौरुष ग्रंथि भी कहा जाता है, यदि यह बढ़ जाये तो कई प्रकार की सेक्‍स समस्‍यायें शुरू हो जाती हैं। समय से पहले शुक्राणुओं का गिरना और शीघ्रपतन होने जैसी समस्‍यायें प्रोस्‍टेट ग्रंथि के बढ़ने के बाद होने लगती हैं। इसलिए यदि आपका प्रोस्‍टेट सामान्‍य से अधिक है तो इसके कारण आपका सेक्‍स जीवन प्रभावित हो सकता है। आगे के स्‍लाइडशो में जानिए बढ़ा हुआ प्रोस्‍टेट कैसे सेक्‍स संबंधों को प्रभावित करता है।
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    प्रोस्‍टेट और सेक्‍स
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    प्रोस्‍टेट ग्रंथि

    प्रोस्‍टेट ग्‍लेंड पुरुषों में पायी जाने वाली एक ग्रंथि है जो कई छोटी-छोटी ग्रंथियों से मिलकर बनी होती है। यह ग्रंथि पेशाब के रास्‍ते को घेर कर रखती है। जब इस ग्रंथि के ऊतकों में गैर-नुकसानदेह कोशिकाओं का विकास हो जाता है तो प्रोस्‍टेट ग्रंथि का आकार सामान्‍य से अधिक हो जाता है। यदि इसका आकार ज्‍यादा बढ़ जाये तो पेशाब करने में समस्‍या हो सकती है।

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    प्रोस्‍टेट ग्रंथि
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    उम्र और प्रोस्‍टेट

    सामान्‍यतया प्रोस्‍टेट के बढ़ने की समस्‍या 50 की उम्र पार करने वाले पुरुषों में बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया ग्रंथि की समस्‍या होती है। इसे बीपीएच भी कहते हैं। लेकिन इस समस्‍या के शिकार किसी भी उम्र के लोग हो सकते हैं।

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    उम्र और प्रोस्‍टेट
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    सर्दियों में ज्‍यादा होती है समस्‍या

    सर्दियों के मौसम में प्रोस्टेट ग्रंथि की समस्या अन्य मौसमों की तुलना में कुछ ज्यादा बढ़ जाती है। इसका कारण यह है कि सर्दियों में पानी पीने की इच्छा कम होती है, जिसके कारण पेशाब की थैली में एकत्र पेशाब की मात्रा बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति में पेशाब की नली में संक्रमण हो सकता है और पेशाब रुक भी सकती है।

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    सर्दियों में ज्‍यादा होती है समस्‍या
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    सेक्‍स की इच्‍छा में कमी

    बीपीएच की समस्‍या से ग्रस्‍त लोगों की सेक्‍स की इच्‍छा में कमी हो जाती है। हालांकि इसके कारण सेक्‍स की इच्‍छा में कमी के पीछे कोई प्रमुख कारण की पहचान नहीं हुई है, लेकिन 2009 में ''यूरोलॉजी'' में छपे एक शोध के अनुसार इसके पीछे प्रोस्‍टेट के उपचार के दौरान इस्‍तेमाल की जाने वाली दवाओं का साइड-इफेक्‍ट हो सकता है।
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    सेक्‍स की इच्‍छा में कमी
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    स्‍खलन की समस्‍या

    बीपीएच की समस्‍या से ग्रस्‍त लोग स्‍खलन की समस्‍या से प्रभावित हो सकते हैं। इसमें स्‍खलन बाहर होने की बजाय अंदर की तरफ होता है, यानी रिवर्स इजैकुलेशन होता है। ये पदार्थ बाद में मूत्र के साथ बाहर निकल जाते हैं।

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    स्‍खलन की समस्‍या
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    नपुंसकता की समस्‍या

    बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया से प्रभावित व्‍यक्ति को नपुंसकता का सामना करना पड़ सकता है। ''इंपोटेंस रिसर्च'' मैगजीन में 2007 में छपे एक शोध के अनुसार इनलार्ज प्रोस्‍टेट के उपचार के दौरान प्रयोग की जाने वाली दवाओं के अधिक प्रयोग के कारण व्‍यक्ति नपुंसकता का शिकार हो जाता है, जिसके कारण उसकी सेक्‍स के प्रति इच्‍छा समाप्‍त हो जाती है।

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    नपुंसकता की समस्‍या
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    दवाओं का प्रभाव

    प्रोस्‍टेट के बढ़ने के उपचार के दौरान व्‍यक्ति जिन दवाओं का प्रयोग करता है उनके कारण सेक्‍स जीवन पर भी असर पड़ता है। इसके अलावा इन दवाओं का सेवन करने वाले व्‍यक्ति का स्‍पर्म कांउट भी कम हो जाता है। सेक्‍स के प्रति रुचि कम होने जैसे साइड-इफेक्‍ट इन दवाओं के कारण होते हैं।

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    दवाओं का प्रभाव
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    प्रोस्‍टेट की सर्जरी और सेक्‍स लाइफ

    प्रोस्‍टेट ग्रंथि की चिकित्‍सा के लिए सर्जरी की जाती है। इसके लिए दो प्रकार की सर्जरी की जाती है - टीयूआरपी सर्जरी और प्रोस्टेटिक आर्टरी इंबोलाइजेशन सर्जरी। इन सर्जरी के बाद आदमी को कई दिनों तक सेक्‍स से दूर रहने की सलाह दी जाती है। लेकिन सर्जरी के बाद प्रयोग की जाने वाली दवायें सेक्‍स की इच्‍छा को कम कर देती हैं।

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    प्रोस्‍टेट की सर्जरी और सेक्‍स लाइफ
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    गुर्दों को करता है प्रभावित

    प्रोस्‍टेट के बढ़ने के कारण गुर्दों पर भी असर होता है। रोगी की पेशाब मूत्राशय के अंदर देर तक रुकी रहे तो कुछ समय के बाद गुर्दों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगता है। इसके परिणामस्वरूप गुर्दे की पेशाब बनाने की क्षमता कम होने लगती है। जिसके कारण गुर्दे यूरिया को पूरी तरह शरीर के बाहर निकाल नहीं पाते। इस कारण रक्त में यूरिया अधिक बढ़ने लगता है और आदमी तनाव और अवसाद ग्रस्‍त होने लगता है। इसके कारण आदमी सेक्‍स के प्रति उदासीन हो जाता है।

     

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    गुर्दों को करता है प्रभावित
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