साइटिका के दर्द को दूर करने के प्रभावी तरीके

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Sep 16, 2014

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उम्र से जुड़ी साइटिका जैसी समस्या को रोक पाना संभव नहीं है। लेकिन सुरक्षात्मक उपाय अपनाकर इसके दर्द को दूर किया जा सकता है।
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    साइटिका का दर्द

    कमर से संबंधित नसों में से अगर किसी एक में भी सूजन आ जाए तो पूरे पैर में असहनीय दर्द होने लगता है, जिसे साइटिका कहा जाता है। यह दर्द रीढ़ की हड्डी से शुरू होकर टांगों के निचले हिस्‍से तक जाता है। image courtesy : getty images

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    साइटिका का आरंभ

    बड़ी उम्र में हड्डियों तथा हड्डियों को जोड़ने वाली चिकनी सतह के घिस जाने के कारण ही व्यक्ति इस समस्या का शिकार बनता है। आमतौर पर यह समस्या 50 वर्ष की उम्र के बाद ही देखी जाती है। लेकिन नि‍ष्क्रिय जीवनशैली और मोटापे के कारण बड़ी संख्‍या में युवा भी इसका शिकार बन रहे हैं। image courtesy : getty images

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    साइटिका के सामान्‍य लक्षण

    कुछ मरीजों को छींकते, खांसते और हंसते समय दर्द होता है। वहीं कुछ लोगों को लगातार खड़े होने या बैठे रहने में भी दर्द होता है। कुछ मरीज पीछे झुकते समय दर्द का आभास करते हैं। वे मरीज जिन्‍हें लंबे समय तक कमर, लोअर बैक या टांगों के अकड़ने की शिकायत हो या फिर मूत्र अथवा शौच असयंम हो उन्‍हें फौरन डॉक्‍टर से संपर्क करना चाहिये।  image courtesy : getty images

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    पैरों में झनझनाहट

    साइटिका में पैरों में झनझनाहट होती है तथा खाल चढ़ने लगती है। पैर के अंगूठे व अंगुलियां सुन्न हो जाती हैं। कभी-कभी कुछ पलों के लिए पैर बिल्कुल निर्जीव से लगने लगते हैं। इस समस्या के लगातार बढ़ते रहने पर यह आंतरिक नसों पर भी बुरा असर डालना प्रारंभ कर देती है।  image courtesy : getty images

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    दर्द को दूर करने के उपाय

    प्रकृति के नियम को कभी बदला नहीं जा सकता। अर्थात् उम्र से जुड़ी ‘सायटिका’ जैसी समस्या को रोक पाना किसी के लिए भी संभव नहीं है। लेकिन इसके लिए सुरक्षात्मक उपाय जरूर अपनाएं जा सकते हैं, जिससे कि समस्या विकराल रूप न धारण कर सके। image courtesy : getty images

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    एक ही जगह पर बैठने से बचें

    लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठने से साइटिका का दर्द बढ़ने लगता है। इसलिए लंबे समय तक एक स्‍थान पर बैठने से बचें। हर आधे-एक घंटे में कुछ देर के लिए खड़े रहने की कोशिश करें। इससे कमर की हड्डियों को आराम मिलता है।  image courtesy : getty images

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    भारी वस्‍तुओं को उठाने से बचें

    झुककर भारी वस्तुओं को उठाने की आदत से भी बचने की कोशिश करें। इससे रीढ़ की हड्डियों के जोड़ों पर अधिक जोर पड़ता है। इसके अलावा भारी वजन उठाकर लंबी दूर तय न करें। अगर ऐसा करना जरूरी हो भी तो बीच-बीच में कहीं बैठकर थोड़ी देर के लिए आराम कर लें। image courtesy : getty images

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    अपना पॉश्‍चर सही रखें

    अगर आपको ऑफिस में लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर कंप्‍यूटर पर काम करना पड़ता है तो कुर्सी में कमर के हिस्से पर एक छोटा सा तकिया लगा लें व सीधे बैठने की कोशिश करें। इसके अलावा मुलायम गद्दों पर ज्‍यादा न सोएं और दर्द वाले जगह पर गर्म पानी की थैली से सिकाई करें।  image courtesy : getty images

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    व्‍यायाम का सहारा लें

    चिकित्सक से सलाह से कमर और रीढ़ की हड्डी से संबंधित व्‍यायाम नियमित रूप से करें। नियमित व्‍यायाम से कमर की मांसपेशियों को मजबूत बनाया जाता है। व्‍यायाम से एंडोरफिन का स्राव भी अधिक होता है। एंडोरफिन कुदरती दर्दनिवारक है।  image courtesy : getty images

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    दवाओं से दर्द से राहत

    शारीरिक आराम, दवाओं व इंजेक्शन की मदद से दर्द पर नियंत्रण में लाया जा सकता है। अगर बहुत ज्यादा दर्द हो रहा हो तो ‘स्टेराइड’ का उपयोग भी करना पड़ता है और कभी-कभी कमर के अंदर तक इंजेक्शन द्वारा दवाओं को पहुंचाना पड़ता है। image courtesy : getty images

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    सर्जरी

    कई बार डिस्‍क को इतना नुकसान पहुंच चुका होता है कि दवाओं के जरिये उसे ठीक कर पाना आसान नहीं होता। ऐसे में सर्जरी का सहारा लिया जाता है। स्लिप या डर्नियेटेड डिस्‍क के लक्षण यदि लगातार बिगड़ रहे हों, तो चिकित्‍सक सर्जरी का सहारा लेता है।  image courtesy : getty images

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