गुर्दे के कारण होने वाली थकान से कैसे निपटें

By:Aditi Singh , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Mar 27, 2015

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गुर्दे हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग है, इसमें किसी प्रकार की समस्‍या होने पर पूरा शरीर प्रभावित होता है और इसके कारण थकान की समस्‍या होती है, इससे निपटने के लिए कई तरीके हैं।
  • 1

    गुर्दे के कारण थकान

    गुर्दे का काम हमारे शरीर में रक्‍त से पानी और दूसरे टॉक्सिक पदार्थों को अलग करना होता है। यह शरीर में मौजूद रसायन पदार्थों का संतुलन के
    साथ रक्तचाप नियंत्रित करने में सहायता प्रदान करता है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में भी सहायता करता है। इसका एक और कार्य है
    विटामिन-डी का निर्माण करना, जो हड्डियों के लिए बहुत जरूरी है। दीर्घकालिक वृक्कीय रोग सामान्यतः उम्र बढ़ने के साथ पनपता है, यह त‍ब होता है जब शरीर के दूसरे अंग सही तरीके से काम नहीं करते हैं। इस समस्‍या से निपटने के तरीके के बारे में विस्‍तार से जानें।
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  • 2

    हमेशा फिट एवं ऊर्जावान रहें

    नियमित व्यायाम एवं शारीरिक गतिविधियां करें, इससे रक्‍तचाप सही रहेगा और ब्‍लड शुगर भी नियंत्रण में रहेगा। इसके कारण मधुमेह एवं उसके
    कारण क्रोनिक गुर्दे की बीमारी होने का खतरा कम हो जाता है।
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    डायबिटीज पर नियंत्रण

    गुर्दे की बीमारी के लिए जिम्‍मेदार प्रमुख कारकों में से एक है। डायबिटीज तभी होती है जब शरीर में गुगर की मात्रा अधिक हो जाती है,
    यह गुर्दे के लिए भी ठीक नहीं है। ब्‍लड शुगर का स्‍तर अधिक बढ़ने से गुर्दा काम करना भी बंद कर सकता है। इसके कारण हाई ब्लडप्रेशर और शरीर
    में खून की कमी भी हो सकती है।
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    उच्च रक्तचाप पर नियंत्रण

    उच्च रक्तचाप को हमेशा उचित समय में नापकर नियंत्रित रखें, क्योंकि यह क्रोनिक गुर्दो की बीमारियों के लिये जिम्‍मेदार कारकों में से एक है।
    वसायुक्त खाने से शरीर में कोलोस्ट्रॉल बढ़ जाता है जो दिल के साथ गुर्दे के लिए भी ठीक नहीं है।
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    वजन पर नियंत्रण रखें

    संतुलित आहार एवं नियमित व्यायाम से अपने वजन को नियंत्रित रखें। इससे डायबिटीज, हृदय रोग एवं अन्य बीमारियों की रोकथाम में मदद मिलेगी जो क्रोनिक गुर्दा फेल्योर की समस्‍या से बचाव करता है।
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    तम्बाकू एवं धूम्रपान न करें

    धूम्रपान एवं तम्बाकू का सेवन से एक विशेष बीमारी हो सकती है जिसे ऐथेरोस्कलेरोसिस कहते हैं जिससे रक्त नलिकाओं में रक्त का बहाव धीमा पड़ जाता है। गुर्दों में रक्त कम जाने से उसकी कार्यक्षमता घट जाती है।
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    गुर्दो की जांच नियमित करायें

    जिन व्यक्तियों को गुर्दो की बीमारियों का खतरा होता है उन्हें गुर्दो की कार्यक्षमता की जांच प्राथमिकता से करवाना चाहिये। गुर्दो की बीमारियों का
    जल्द निदान आवश्यक है जिससे उचित समय पर इसका उपचार हो सके।
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    डॉक्टर की सलाह के बैगर दवाओं की खरीद से बचें

    दवा दुकान से दवाओं की खरीद एवं उनका स्वयं सेवन जिसमें डा. की सलाह न ली गयी हो कई बार गुर्दोंके लिये खतरनाक हो सकता है। सामान्य
    दवाएं जैसे नाम स्टेरराईट एंडी इन्फेलेमेटरी दवाएं (इब्यूप्रोफेन) आदि नियमित रूप से लेने पर वे गुर्दोंको नुकसान पहुंचा कर पूर्णत: खराब भी कर
    सकती है। दर्द होने पर डा.की सलाह से ही उसका उपचार करायें एवं अपनी गुर्दोंको खतरे में न डालें।
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