दाद और खुजली हो जाये तो ये घरेलू उपचार आजमायें

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jun 22, 2015

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दाद एक फंगल इन्फेक्शन है जो सर, पैर, गर्दन या किसी अंदरुनी भाग मे कहीं भी हो सकता है। ये लाल या हलके ब्राउन रंग का गोल आकार का होता है। लेकिन डरें नहीं क्‍योंकि घरेलू उपायों की मदद से यह आसानी से ठीक भी हो जाता है।
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    दाद के लिए हर्बल उपचार

    दाद या रिंगवार्म एक फंगल इंफेक्‍शन है, जो त्‍वचा, नाखूनों और स्‍कैल्‍प को प्रभावित करता है। ये लाल या हलके ब्राउन रंग का गोल आकार का होता है। दाद शरीर के जिस भाग पर होता है उस भाग पर खुजली मचती है और जब व्यक्ति इसे खुजलाने लगता है तो यह और भी फैलने लगता है। गीलेपन, नमी और भीड़-भाड़ वाली जगह पर यह ज्‍यादा फैलता है। टिनिआ रिंगवार्म का मेडिकल नाम है। हालांकि यह सोरायसिस की तरह खतरनाक नहीं है। और फार्मेसियों के यहां मिलने वाली दवाओं से इसका इलाज आसानी से हो जाता है। लेकिन आप कुछ घरेलू उपायों द्वारा भी इसका इलाज कर सकते हैं।
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    लहसुन का अर्क

    लहसुन में प्राकृतिक एंटी-फंगल तत्‍व पाये जाते है, जो दाद सहित कई प्रकार के फंगल इंफेक्‍शन को ठीक करने में सहायक होते हैं। लहसुन को छिलकर उसके छोटे-छोटे टुकड़े कर उसका अर्क निकालकर दाद पर लगाने से आराम मिलता है। इस अर्क में जैतून का तेल और शहद मिलाने से यह घरेलू उपाय और अधिक प्रभावी हो जाता है।
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    नारियल का तेल

    नारियल का तेल दाद के लिए सबसे सुरक्षित और प्रभावी उपायों में से एक है, क्‍योंकि कवक के कारण होने वाले त्‍वचा संक्रमण को पूरी तरह से ठीक करने में मदद करता है। नारियल के तेल में जादू संघटक मध्‍यम श्रृंखला चैन फैटी एसिड (MCFA) विशेष रूप से लोरिक एसिड है। यह एसिड दाद संक्रमण के इलाज करने में बहुत मदद करते हैं। दाद वाले हिस्‍से पर थोड़ा सा नारियल तेल लेकर थोड़ी देर मसाज करें। इस उपाय को दिन में 3 से 4 बार करें।
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    टी ट्री ऑयल

    चाय के पेड़ (Melaleuca alternifolia) से निकाले गए उत्कृष्ट एंटी-फंगल और एंटी-सेप्टिक टी ट्री ऑयल दाद के लिए सबसे अच्छा उपचार में से एक है। बस आपको जरूरत है, 100 प्रतिशत शुद्ध तेल का उपयोग की क्‍योंकि अन्य तेलों के साथ मिक्‍स करने से दाद का इलाज नहीं हो सकता।
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    एप्पल साइडर सिरका

    एप्‍पल साइडर सिरका में मौजूद एंटी-फंगल गुण, अत्‍यधिक अम्‍लीय गुणों के कारण जाना जाता है। कवक अत्‍यधिक अम्‍लीय वातावरण में पैदा नहीं हो सकते है। इसलिए इसके नियमित इस्‍तेमाल से दाद को पूरी तरह से समाप्‍त किया जा सकता है।
    दाद होने पर एप्‍पल साइडर सिरके को कॉटन बॉल पर लेकर संक्रमित हिस्‍से पर लगाये। इस उपाय को दिन में 3-4 बार करें। और दाद के पूरी तरह से ठीक होने तक इस उपाय को नियमित रूप से करें।
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    कच्चा पपीता

    कच्चा या हरा पपीता बाहरी परत से पुरानी मृ‍त कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करता है। बाहरी परत त्‍वचा की ऐसी जगह जहां पर दाद कवक बढते है। कच्‍चे पपीते में मौजूद कई प्रकार के एंजाइम जैसे पैपेन और चयमोपैपेन के कारण ऐसा होता है।
    यह एंजाइम वायरस, यीस्‍ट और कवक के विभिन्‍न प्रकार की रक्षा ढा़ल को नष्‍ट करने में मदद करते है। साथ ही दोनों एंजाइम सूनज और जलन को दूर करते है। इस प्रकार से पपीता दाद संक्रमण के इलाज का एक बहुत ही अच्‍छा उपाय साबित हो सकता है।
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    नमक

    नमक का पानी एक बहुत ही अच्‍छा एंस्‍ट्रीजेंट है, जो घावों के उपचार को गति प्रदान करता है। जब आप नमक के पानी में घाव को भिगोते है, यह दाद के पैच को सूखाकर, प्रभावित हिस्‍से को रोगाणुओं से मुक्‍त कर देता है। अगर आप नमक के पानी का इस्‍तेमाल नहीं करना चाहते तो आप समुद्री नमक के पेस्‍ट का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। कुछ लोगों दाद के लिए सिरका और नमक के पेस्ट का उपयोग भी करते हैं।
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    लेमनग्रास

    लेमनग्रास जड़ी-बूटी में प्राकृतिक रूप से एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-सेप्टिक गुण होते है। भारत, श्रीलंका, चीन, और यहां तक ​​कि ब्राजील जैसे देशों में, मेडिकल उपयोग के लिए इस जड़ी बूटी का उपयोग प्राचीन काल से किया जा रहा है। इसका इस्‍तेमाल आंतरिक रूप से लेमनग्रास टी के रूप में सेवन से किया जाता है और बाहरी रूप से इसका इस्‍तेमाल करने के लिए इसका पेस्‍ट बनाकर सीधा प्रभावित हिस्‍से पर लगाया जाता है। इसका प्राकृतिक एंटीसेप्टिक गुण घाव को पूरी तरह से भरने और प्राकृतिक एंटी-बैक्‍टीरियल गुण संक्रमण को रोकने में मदद करते है। दाद और एथलीट फुट के लिए लेमनग्रास को पेस्‍ट या तले को लगाना ज्‍यादा बेहतर रहता है।
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    एलोवेरा

    एंटी-फंगल, एंटी-इंफ्लेमेंटरी, एंटीसेप्टिक और एंटीबायोटिक गुणों के कारण एलोवेरा त्‍वचा और संक्रमण के लिए एक बहुत ही अच्‍छी जड़ी बूटी मानी जाती है। एलो वेरा का अर्क हर तरह के फंगल इन्फेक्शन को ठीक कर देता हैं । इसे तोड़कर सीधे दाद पर लगा लीजिये ठंडक मिलेगी। हो सके तो रात भर लगा कर रखें।
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