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गर्भावस्‍था में मछली के सेवन से बच्‍चे में एडीएचडी का संबंध

By:Nachiketa Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 05, 2014
गर्भावस्‍था के दौरान अधिक मछली का सेवन करने से बच्‍चों को एडीएचडी नामक बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है, यह एक प्रकार की मानसिक बीमारी है जो उम्र बढ़ने के साथ बढ़ती है।
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    गर्भावस्‍था में खानपान

    गर्भवती महिला के लिए खानपान का ध्‍यान रखना बहुत जरूरी होता है क्‍योंकि वह जो भी खाती है उसका सीधा असर बच्‍चे के स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ता है। गर्भावस्‍था के समय महिला को अधिक मात्रा में प्रोटीन के सेवन की सलाह दी जाती है, क्‍योंकि मां को स्‍वस्‍थ रखने के साथ बच्‍चे के अंगों के समुचित विकास के लिए प्रोटीन जरूरी होता है। प्रोटीन मछली में बहुतायत में पाया जाता है, लेकिन मछली के सेवन से बच्‍चे की याद्दाश्‍त पर असर पड़ता है।

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    गर्भावस्‍था में खानपान
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    गर्भावस्‍था में मछली का सेवन

    मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड और प्रोटीन पाया जाता है। गर्भावस्‍‍था में मछली के सेवन से बच्‍चे को सभी आवश्‍यक तत्‍व तो मिल सकते हैं। लेकिन इससे बच्‍चे के दिमाग पर सबसे नकारात्‍मक असर पड़ता है। इसके कारण बच्‍चा एडीएचडी (अटेंशन-डिफिसिट/हाइपरएक्टिव डिसऑर्डर) का शिकार हो सकता है।

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    गर्भावस्‍था में मछली का सेवन
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    क्‍या कहता है शोध

    गर्भावस्‍था के दौरान बच्‍चे को एडीएचडी नामक दिमागी समस्‍या हो सकती है। हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आयी है। अगर गर्भवती मां मछली का सेवन अधिक करती है तो इसके कारण बच्‍चे को एडीएचडी नामक बीमारी हो सकती है।

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    क्‍या कहता है शोध
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    मछली और एडीएचडी में संबंध

    ऑर्काइव ऑफ पेडियाट्रिक्‍स एंड एडोलसेंट मेडिसिन नामक पत्रिका में छपे शोध की मानें तो, अगर गर्भवती महिला सप्‍ताह में दो दिन मछली का सेवन करती है तो गर्भ में पल रहे बच्‍चे को एडीएचडी होने का खतरा 60 प्रतिशत तक कम होता है।

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    मछली और एडीएचडी में संबंध
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    अधिक मछली खाना नुकसानदेह

    इसी शोध में यह बात भी छपी है कि अगर गर्भावस्‍था के दौरान अधिक मात्रा में मछली का सेवन करे तो इसके कारण बच्‍चे को दिमागी सक्रियता की कमी, आवेग की समस्‍या, जल्‍दी क्रोधित होने जैसे दिमागी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। टूना और स्‍वोर्डफिश मछली खाना नुकसानदेह है क्‍योंकि इसमें मर्करी का स्‍तर सामान्‍य से अधिक होता है।

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    अधिक मछली खाना नुकसानदेह
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    उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है खतरा

    मैसाचुसेट्स में हुए इस शोध में गर्भवती महिला पर 1993 से 1998 तक शोध किया गया, इसमें प्रसव के बाद भी बच्‍चों के मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर शोध जारी रहा। इस शोध में 788 बच्‍चों और उनकी मांओं को शामिल किया गया। जब बच्‍चा 8 साल का हुआ तो अध्‍ययन के दौरान उनमें एडीएचडी के लक्षण दिखाई देने लगे।

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    उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है खतरा
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    क्‍या है एडीएचडी

    एडीएचडी यानी अटेंशन डिफिसिट हाइपरएक्टिव डिसऑर्डर एक प्रकार की मानसिक बीमारी है जो बच्‍चों और बड़ों दोनों को हो सकती है, लेकिन बच्‍चों में होने की संभावना अधिक होती है। इस बीमारी के होने पर आदमी का व्‍यवहार बदल जाता है, याद्दाश्‍त कमजोर हो जाती है और बच्‍चा किसी भी चीज पर ध्‍यान केंद्रित नहीं कर पाता है।

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    क्‍या है एडीएचडी
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    कैसे करें बचाव

    बच्‍चे को एडीएचडी जैसी मानसिक बीमारी से बचाव के लिए जरूरी है कि गर्भावस्‍था के दौरान मछली का सेवन कम मात्रा में किया जाये। मछली के सेवन से मर्करी की मात्रा अधिक न हो, इसलिए गर्भवती महिलायें सप्‍ताह में दो दिन ही मछली का सेवन करें। समुद्र से आई मछलियों से बेहतर है कि आपपास के तालाब या नदी से पकड़ी जाने वाली मछलियों का सेवन कीजिए। स्‍वार्डफिश, किंग मैककेरल और शार्क का सेवन करने से गर्भावस्‍था के दौरान बचना चाहिए। तालाब की रोहू, कातला और हिल्‍सा अच्‍छी होती हैं।

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    कैसे करें बचाव
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