महिला और पुरुष गर्भनिरोधक और उनकी प्रभाविकता

By:Pradeep Saxena, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Apr 25, 2014

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गर्भनिरोधकों के विभिन्‍न विकल्‍पों की जानकारी अनचाहे गर्भ और कई यौन संचारित रोगों से भी बचाते हैं। कुछ गर्भनिरोधकों और उनके प्रभावीपन को जानने की कोशिश करते हैं।
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    गर्भनिरोधक और उनका असर

    गर्भनिरोधकों के विभिन्‍न विकल्‍पों के बारे में जानकारी होना आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकता है। इससे आप न केवल अनचाहे गर्भ से बच सकती हैं, बल्कि ये आपको कई यौन संचारित रोगों से भी बचाते हैं। चलिए देखते हैं कि कुछ गर्भनिरोधक और जानने की कोशिश करते हैं कि वे कितने प्रभावी हैं। इससे आपको अपने लिए बेहतर गर्भनिरोधक चुनने में आसानी होगी। Image courtesy: Getty Images

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    कंडोम

    यह सबसे किफायती और आसानी से मिलने वाला गर्भ्रनिरोधक है। कंडोम लेटेक्‍स या प्‍लास्टिक के बने होते हैं। संभोग के दौरान पुरुष इसे अपने लिंग पर पहनते हैं। एक अनुमान के अनुसार यदि कंडोम सही प्रकार न पहना जाए तो 100 में से 15 महिलायें गर्भवती हो सकती हैं। वहीं कंडोम सही प्रकार पहनने के बाद भी 2 फीसदी महिलाओं के गर्भधारण की संभावना होती है। हालांकि, अब बाजार में महिला कंडोम भी मौजूद हैं।  Image courtesy: Getty Images

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    प्रोगेस्‍टिन-ओन्‍ली गोलियां

    गर्भनिरोधक गोलियां दो प्रकार की होती हैं, एक में प्रोगस्‍टिन और एस्‍ट्रोजेन दोनों होते हैं और एक में केवल प्रोगेस्टिन होता है। केवल प्रोगेस्टिन वाली गोलियां ऑव्‍युलेशन को रोकने का काम करती हैं। ये गोलियां आमतौर पर उन महिलाओं के काम आती हैं, जो एस्‍ट्रोजन का सेवन नहीं कर सकतीं। इसके अलावा स्‍तनपान करवा रही मांओं, धूम्रपान करने वाली महिलयों और 35 वर्ष से ऊपर की महिलाओं के लिए भी ये गोलियां कारगर होती हैं। Image courtesy: Getty Images

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    गोलियां, पैच अथवा रिंग

    ये उपाय अधिक कारगर होते हैं और इनका प्रभाव पलटा भी जा सकता है। इसका इस्‍तेमाल करने वाली 92 फीसदी महिलाओं को अनचाहे गर्भ का खतरा नहीं रहता। यदि इसे सही प्रकार पहना जाए तो ये काफी कारगर साबित होते हैं। सही प्रकार से इसका इस्‍तेमाल करने वाली केवल एक फीसदी महिलाओं को ही अनचाहे गर्भ का खतरा सताता है। इन गोलियों को हर दिन एक ही समय पर खाना जरूरी होता है। पैच को हर सप्‍ताह और रिंग को महीने में एक बार बदलने की जरूरत होती है। इन गर्भनिरोधकों का मेल अंडाणुओं को निकलने से रोकता है और साथ ही ऑव्‍युलेशन की प्रक्रिया भी नहीं होने देता। इसके साथ ही ये गर्भाश्‍य ग्रीवा के द्रव्‍य को गाढ़ा कर देते हैं, जिससे अंडाणुओं और शुक्राणुओं का मेल नहीं हो पाता। Image courtesy: Getty Images

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    इंप्‍लेनन (Implanon)

    यह एक पतला, छोटा ओर प्रोगेस्टिन-ओन्‍ली गर्भनिरोधक उपाय है, जो कम से कम तीन सप्‍ताह तक काम करता है। इसे इस्‍तेमाल करने से पहले माचिस के आकार का एक कैप्‍सूल अपर आर्म पर लगाने के बाद इस्‍तेमाल किया जाता है। महिला गर्भनिरोध के अन्‍य उपायों की ही तरह इंप्‍लेनन ऑव्‍युलेशन को रोकता है और गर्भाशय ग्रीवा के द्रव्‍य को गाढ़ा कर देता है। इसके फेल होने की दर केवल एक फीसदी है। यह एक कारगर गर्भनिरोधक है। Image courtesy: Getty Images

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    डीपो प्रोवेरा शॉट (Depo Provera Shot)

    इसे 'द शॉट' के नाम से भी जाना जाता है। यह प्रोगेस्टिन-ओन्‍ली उपाय है, जिसमें इंजेक्‍शन लगाया जाता है। इसमें एस्‍ट्रोजन नहीं होता है और इसे लगाने वाली महिला को हर तीन म‍हीने में डॉक्‍टर के पास जाना पड़ता है। शॉट इस्‍तेमाल करने वाली महिलाओं को गर्भनिरोधक गोलियां खाने की आवश्‍यकता नहीं पड़ती। यह उपाय काफी कारगर है क्‍योंकि इसे सही तरीके से इस्‍तेमाल करने वाली हजार महिलाओं में से केवल तीन को ही अनचाहे गर्भ की शिकायत होती है। यदि मासिक धर्म के शुरुआती सात दिनों में इसका इस्‍तेमाल कर लिया जाए तो यह अधिकतम सुरक्षा देता है। Image courtesy: Getty Images

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    आईयूडी (IUD or Intrauterine Device)

    यह एक छोटा, टी के आकार का गर्भनिरोधक है, जो लचीले प्‍ल‍ास्टिक से बनाया जाता है। इसमें गर्भाग्रीवा के जरिये गर्भाशय में लगाया जाता है और योनि के अंतिम सिरे पर एक धागा लगा रहता है। महिला जब गर्भधारण करना चाहे वह इसे बाहर निकाल सकती है। आईयूडी दो प्रकार के होते हैं। पहले प्रकार के आईयूडी 12 वर्ष तक व दूसरा जिसमें प्रोगेस्टिन होता है, पांच बरस तक असरदायक रहते हैं। दोनों के प्रभाव को इच्‍छानुसार पलटा जा सकता है। इसके फेल होने की आशंका केवल एक फीसदी होती है। Image courtesy: Getty Images

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    डायफ्रागम (Diaphragm)

    यह गर्भनिरोधक उथला गुंबद के आकार का होता है, जिसके साथ एक लचीला रिम भी होता है। यह योनि में पूरी तरह फिट हो जाता है और गर्भाशय को ढंक लेता है। इससे पुरुष वीर्य गर्भाशय में प्रवेश नहीं कर पाता। इसका नियमित, किंतु सही इस्‍तेमाल न करने वाली 100 में से 15 महिलाओं के परिवार शुरू करने से पहले, अनचाहे गर्भधारण की आशंका होती है। वहीं, वे महिलायें जिनकी पहले से संतान है, उनके लिए यह आंकड़ा बढ़कर 25 फीसदी तक पहुंच जाता है। Image courtesy: Getty Images

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    आपातकालीन गर्भनिरोधक (EC or Emergency Contraception)

    असुरक्षित संभोग के 120 घंटे बाद तक यदि इन गोलियों का सेवन कर लिया जाए, तो महिला अनचाहे गर्भ से बच सकती है। हालांकि इन गोलियों को -मॉर्निंग ऑफ्टर' कहा जाता है, लेकिन इन्‍हें असुरक्षित संभोग के फौरन बाद से लेकर पांच दिन बाद तक लिया जा सकता है। इन गोलियों में प्रोगेस्टिन होता है जो ऑव्‍यूलेशन को रोकता है, जिससे अनचाहे गर्भ का खतरा कम हो जाता है। संभोग के 72 घंटे बाद लेने पर अनचाहे गर्भ का खतरा 85 फीसदी तक कम हो जाता है। गर्भवती महिलायें भी ये गोलियां खा सकती हैं, क्‍योंकि इनसे गर्भपात का खतरा नहीं होता। Image courtesy: Getty Images

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