अस्‍पताल से आप घर पर लाते हैं ये बीमारियां!

By:Aditi Singh , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Feb 12, 2016

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अस्‍पताल ऐसी जगह हैं जहां हर बीमारी का उपचार होता है, फिर भी यहां की कुछ जगहें ऐसी भी हैं जो आपको संक्रमित कर सकती हैं, इसलिए अस्‍पताल जायें या फिर अस्‍पताल में भर्ती हैं तो आपके साथ ये बीमारियां भी बाहर निकलती हैं।
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    अस्पताल से बीमारी

    इलाज के लिए अस्पताल जाते समय भी सावधानी रखें। अगर सावधानी नहीं रखी तो हो सकता है कि अस्पताल से एक बीमारी को लेकर ही आ जाए। जी हां अस्पताल में रहने के दौरान आप हॉस्पिटल अक्वायर्ड इंफेक्शन यानी एचएआई का शिकार भी हो सकते हैं। हाइजीन के अभाव में ये संक्रमण आपको चपेट में ले सकता है। एचएआई के बढ़ते मामलों का दूसरा सबसे प्रमुख कारण है एंटीबायोटिक्स का अत्यधिक इस्तेमाल, जिससे संक्रमण से बचाव कठिन हो गया है।  
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    अक्वायर्ड इंफेक्शन यानी एचएआई

    अक्वायर्ड इंफेक्शन (एचएआई) यानी अस्पताल में जाने से होने वाला संक्रमण एक ऐसा संक्रमण है, जो स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं के स्टाफ या वहां के वातावरण से फैलता है। अस्पताल  के वातावरण में बैक्टीरिया, वायरस या फंगस जैसे रोगाणु मौजूद होते हैं, जो आसानी से शरीर में पहुंच जाते हैं। अस्पताल में भर्ती कई मरीजों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, इसलिए वे आसानी से एचएआई की चपेट में आ जाते हैं।
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    एचएआई कैसे फैलता है

    कॉन्टैक्ट ट्रांसमिशन यानी संपर्क संचरण एचएआई का सबसे सामान्य माध्यम है। मरीज रोगाणुओं के सीधे संपर्क में आते हैं, तब इनसे संक्रमित होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।ड्रॉपलेट ट्रांसमिशन का संचरण तब होता है, जब किसी संक्रमित व्यक्ति से रोगाणु युक्त छोटी बूंदें (ड्रॉपलेट) हवा के जरिये थोड़ी दूरी तय करती हैं और किसी मरीज के शरीर पर जमा हो जाती हैं।एयरबोर्न ट्रांसमिशन, संक्रमित व्यक्ति से निकले रोगाणु लंबे समय तक लघु कणों के रूप में हवा में तैरते रहते हैं। जब कोई रोगी इनके संपर्क में आता है तो ये उसे संक्रमित कर देते हैं।कॉमन वहिकल ट्रांसमिशन, यह संक्रमण हॉस्पिटल की टेबल, कुर्सियों, पलंग, यंत्रों और उपकरणों के माध्यम से फैलता है।
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    इसके लक्षण पहचाने

    इसके लक्षणों में प्रमुख हैं सूजन, बुखार, फोड़े होना, दर्द, संक्रमण वाले स्थान पर उत्तेजना, स्किन रैशेज, मल और मूत्र के रंग में बदलाव आ जाना आदि। इसमें सबसे अधिक मूत्र मार्ग का संक्रमण (यूटीआई), आंत में जलन (गैस्ट्रोएन्टराइटिस), प्रासविक ज्वर (प्यूअर्परल फीवर), श्वसन मार्ग के निचले भाग का संक्रमण होने का खतरा रहता है।इनमें मूत्रमार्ग का संक्रमण सबसे प्रचलित प्रकार है।
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    कैसे करे बचाव

    एचएआई के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ-साथ आम लोगों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। इनकी रोकथाम के लिए डॉक्टरों, हॉस्पिटल प्रशासन, मरीजों और उनके साथ हॉस्पिटल में आने वाले लोगों को भी प्रयास करने होंगे।स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में क्यूए/क्यूसी उपायों को लागू करना। इसके अंतर्गत उन उत्पादों की गुणवत्ता पर बल दिया जाता है, जिनका उपयोग अस्पताल  में किया जाता है।अस्पताल  के अंदर की हवा की गुणवत्ता पर नियंत्रण और जांच आवश्यक है।
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