दूध देना बंद कर चुकी गायें से भी होते हैं कई स्वास्थ्य लाभ

By:Gayatree Verma , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 09, 2016

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ऐसे समय में जबकि गाय को लेकर पूरे देश में बहस छिड़ी है तो ये सवाल उठना लाजिमी है कि उन गायों को पालने से आखिर क्या लाभ है जो दूध देना बंद कर देती हैं? तो आइए जानें कैसे दूध देना बंद करने वाली गायें भी होती हैं लाभदायक।
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    गाय के दुधारू ना रहने पर

    एक और पूरे देश में गायों को लेकर बहस और राजनीतिक छिड़ी है। गाय के दूध और मूत्र को पवित्र और जीवनदायी माना जाता है। लेकिन अक्सर ये सवाल पूछा जाता है कि उन गायों को पालने का क्या फायदा जो दूध देना बंद कर देती हैं। तो आइए स्लाइडशो में जानते हैं कि जब गाय दुधारू नहीं रहती फिर भी कैसे रहती हैं उपयोगी?

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    खाद (गोबर से बनने वाली)

    सबसे पहले हम प्राकृतिक खाद की बात करते हैं जो हमे केवल और केवल गाय से प्राप्त होती है - गोबर।
    गाय का गोबर पथरीली जमीन को उपजाऊ बना सकता है। आज के समय में जब जमीनें कृत्रिम खाद की वजह से अपना पोषक-तत्व खो चुकी हैं उस समय में गाय का गोबर जमीन की उर्वरा शक्ति को वापस दिलाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए आपको केवल पथरीली जमीन में गोबर की मोटी परत डालकर जोतने की जरूरत है।

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    गोबर गैस प्लांट

    गाय के गोबर को ईंधन या गोबर गैस के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। जैसे कि गोबर को जमा कर आप एक 85 घनमीटर का गोबर गैस प्लांट तैयार करते हैं तो उससे रोज करीब दो सिलेंडर गैस बनती है। इस गैस प्लांट का इस्तेमाल खाना बनाने के लिए किया जा सकता है।

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    कंडे या उपले

    मुख्य शहरी क्षेत्रों के दस किलोमीटर के बाद ही गरीबी और बस्तियां शुरू हो जाती हैं जहां बिजली और गैस जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं होतीं। ये लोग केरोसिन तेल या लकड़ी के चुल्हे में खाना बनाते हैं। केरोसिन तेल के महंगे होने के कारण लोग लकड़ी के चुल्हे का इस्तेमाल करना ही पसंद करते हैं। ऐसे में लकड़ी को जलाने से आंखों की समस्या हो जाती है, इस कारण कंडा जलाना लोग उचित मानते हैं। तो गाय का गोबर उपले बनाने के काम आ सकता है, जिसका कारोबार ग्रामीण महिलाएं काफी करती हैं।

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    आयुर्वेदिक औषधियों के लिए गौमूत्र

    हाल ही में वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में पाया था कि गुजरात के गिर की गायों के मूत्र में सोने के अंश पाए जाते हैं, जिससे पता चलता है कि गौमूत्र कितना स्वास्थ्य वर्द्धक होता है।
    गौमूत्र को अमृत तुल्य इसलिए माना जाता है क्योंकि ये बड़ी से बड़ी बीमारी ठीक कर सकता है। एनीमिया की समस्या को दूर करने के लिए गौमूत्र, त्रिफला और गाय का दूध मिक्‍स कर के पिएं। ये आपके खून में से सारी गंदगी समाप्त कर एनीमिया के साथ कई अन्य रोगों को भी दूर कर देगा। गौमूत्र पीने से दिल की बीमारियां भी ठीक होती हैं। इसके साथ ही गौमूत्र को विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों को निर्माण में भी प्रयोग किया जाता है।

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