सोशल एंग्जाइटी से निपटने के लिए जरूर बनाए रणनीति

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jul 02, 2014

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अगर आप बात-बात पर घबराते हैं, अच्छी तरह सो नहीं पाते हैं, और लोगों के बीच जाने और बोलने से डरते हैं तो यह सोशल एंग्जाइटी या फोबिया के कारण हो सकता है।
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    सोशल एंग्जाइटी एक बड़ी समस्या

    अगर आपका छोटी-छोटी बातों पर दिल घबराने लगता है या लोगों के बीच जाने पर अचानक आपके दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं, मन बेचैन हो उठता है और समझ में नहीं आता कि किया जाए, या फिर अगर रात को सोते समय आप करवटें बदलते रहते हैं और किसी भी तरह आपके मन को शांति नहीं मिलती तो ये सोशल एंग्जाइटी के लक्षण हो सकती है जिसे सोशल फोबिया भी कहते हैं। जिससे निपटने के लिए आपको सही रणनिति की जरूरत होती है।
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    एंग्जाइटी डिस्‍ऑर्डर

    सोशल एंग्जाइटी दरअसल एंग्जाइटी डिस्‍ऑर्डर का ही एक हिस्सा है। एंग्जाइटी डिस्‍ऑर्डर एक प्रकार का मानसिक विकार है जो आमतौर 13 से 35 साल के लोगों में अधिक देखने को मिलता है। एंग्जाइटी डिस्‍ऑर्डर में रोगी के स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम) में अनुकंपी तंत्रिका तंत्र (सिंपेथेटिक नर्वस सिस्टम) की वृद्धि हो जाती है। इस दौरान शरीर में कैटेकोल अमीब्स हार्मोंन बढ़ जाता है, जिस कारण घबराहट होने लगती है। सही समय पर इलाज न होने पर यह आगे चलकर फोबिया में बदल जाता है। बदलती जीवनशैली और बढ़ते तनाव के कारण लोगों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है।
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    क्या है फोबिया

    फोबिया एक प्रकार का रोग है, जिसमें इंसान को किसी खास वस्तु, कार्य एवं परिस्थिति के प्रति भय उत्पन्न हो जाता है। फोबिया में अपने डर की सोच भी व्यक्ति को इतना डरा देती है कि उसकी मानसिक व शारीरिक क्षमताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसमें इंसान का डर वास्तविक या काल्पनिक दोनों हो सकते हैं। आमतौर पर किसी भी तरह के फोबिया से ग्रस्त रोगी अपने डर पर पर्दा डाले रहते हैं। उनको लगता है कि अपना डर दूसरों को बताने से लोग उन पर हंसेंगे। इसीलिए वह अपने डर व उस परिस्थिति से सामना करने की बजाय बचने की हर सम्भव कोशिश करते हैं।
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    सोशल एंग्जाइटी या फोबिया

    सोशल फोबिया से ग्रस्थ इंसान कुछ विशेष परिस्थितियों से डरते हैं। उन्हें लगता है कि लोग उसके बारे में बुरा सोचते हैं और पीठ पीछे उनकी बुराइयां करते हैं। ऐसे में व्यक्ति समाज के सामने अपने आपको छोटा समझने लगता है और उसका आत्मविश्वास कमजोर पड़ता जाता है। लोगों के सामने वह बोल नहीं पाता है और डरा सा रहता है।
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    सोशल फोबिया के कारण

    सोशल फोबिया केवल 5 से 10 प्रतिशत लोगों में ही देखने को मिलता है। आमतौर पर यह रोग 20 साल की उम्र से पहले ही शुरू हो जाता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह रोग अधिक देखा जाता है। इस रोग के होने तथा बढ़ने में पारिवारिक और आस-पास के माहौल का महत्वपूर्ण योगदान होता है। यह अनुवांशिक भी हो सकता है या फिर किसी बुरी घटना का साक्षी होने की वडह से भी।
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    सोशल एंग्जाइटी डिस्‍ऑर्डर के लक्षण

    एंग्जाइटी डिस्‍ऑर्डर के लक्षणों में छोटी-छोटी बात पर घबरा जाना, लोगों के बीच जाने पर या बात करने पर दिल की धड़कन बढ़ना, पसीने छूटना, दिमाग का काम न करना, फैसला करने की क्षमता कम होना, बोलते हुए घबराहट, पेट में हलचल जैसी महसूस होना
    तथा हाथ-पैरों में कंपन होना आदि शामिल होते हैं।
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    इलाज

    सोशल फोबिया के इलाज में दवाओं और मनोचिकित्सा दोनों का ही प्रमुख योगदान और महत्व होता है। इस रोग के लिये दवाओं का चुनाव व्यक्तिकगत लक्षण के आधार पर किया जाता है। मनोचिकित्सा में रोगी के साथ-साथ उसके परिजनों की भी मदद ली जाती है।
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    मनोवैज्ञानिक थेरेपी

    सोशल एंग्जाइटी में होने वाली घबराहट का मनोवैज्ञानिक थेरेपी और दवाओं सहित विभिन्न हस्तक्षेपों के जरिये प्रभावी ढंग से इलाज हो सकता है। इसके जरिये इस समस्या के कारणों के अनुसार उनके निदान पर काम होता है।
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    साइकोथेरेपी

    अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के मुताबिक "अधिकांश विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि संज्ञानात्मक और व्यवहार जन्य थेरेपी का एक संयुक्त प्रयोग घबड़ाहट संबंधी विकारों के लिए सबसे बेह तर उपचार है। हालांकि कुछ मामलों में दवाएं भी कारगर साबित हो सकती हैं।" उपचार का पहला भाग काफी हद तक सूचना आधारित होता है लेकिन कई लोगों को केवल यह बात समझकर ही काफी फायदा हुआ है।
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    दिनचर्या और आदतों में सकारात्मक बदलाव

    अच्छे और सकारात्मक लोगों के दोस्ती करें, शराब का सेवन व धूम्रपान आदि न करें, रोज़ योग व व्यायाम जरूर करें सबसे जरूरी बात कि इस समस्या को किसी अभिशाप की तरह न लें। इसका सामना करें को इलाज कराएं। आपकी सकारात्मक भवना और हिम्मत ही आपको सोशल एंग्जाइटी से बाहर आने में सबसे ज्यादा मदद करती है।
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