अपनी चेतना से जुड़ने के सात तरीके

By:Shabnam Khan , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 04, 2014

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आध्यात्मिक मार्ग यानि शांति का मार्ग। इस मार्ग पर चलने के लिए अपनी चेतना से जुड़ना पूर्व-शर्त होती है। कई बार आप अपनी बाहरी गतिविधियों में इतने व्यस्त रहते हैं कि समझ नहीं पाते कि आपकी चेतना कुछ और चाहती है। चेतना के साथ जुड़ने के लिए आपको कुछ खास व आसान उपाय अपनाने की जरूरत होती है।
  • 1

    जुड़ें अपनी चेतना के साथ

    क्या आपको कभी ऐसा लगा है कि जो आपकी बाहरी गतिविधि और वर्तमान जीवन है, आप उससे कहीं ज्यादा कर सकते हैं? क्या आपने कभी महसूस किया है कि आपके अंदर एक महान प्रकाश और शक्ति मौजूद है? क्या आपको अपने वर्तमान जीवन के उद्देश्यों को देखकर ये लगता है कि आपके असली उद्देश्य इनसे ज्यादा गहरे और विशेष हैं? अगर इन सवालों के जवाब हां में हैं, तो आप अपनी चेतना को समझने के मार्ग पर निकल चुके हैं। अपनी चेतना या आत्म से जुड़ने से इंसान को ज्यादा खुशी, शांति और समृद्धि महसूस होती है। तो आइये जानें कुछ ऐसे तरीके जिनको अपनाकर आप अपनी चेतना से जुड़ पाएंगे।

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  • 2

    अपने आपको और दूसरों को माफ करें

    जो बीत चुका है उसे अपने आप से बांध कर न रखें। अतीत के बोझ को साथ लेकर चलने से आपको आगे बढ़ने में तकलीफ ही होगी। गलतियों के लिए अपने आपको और दूसरे लोगों को माफ कर दें। यही सबसे अच्छा तरीका है आगे बढ़ने का। लेकिन ये ध्यान में रखें कि माफ करने का मतलब भूल जाना नहीं होता है। आप माफ करने के बावजूद इस बात को हमेशा याद रख सकते हैं कि किस वजह से, या किस इंसान ने आपके साथ कुछ "गलत" किया था। माफ न करने से आप उस इंसान या अपने निम्न आत्म के साथ बंध जाते हैं। माफ कीजिए और अपने आपको भारमुक्त करके अपनी चेतना से जुड़ने का रास्ता साफ करें।

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  • 3

    सात दिन आत्म-मूल्यांकन करें

    जब भी आप किन्हीं गलत आदतों में लिप्त हों या फिर नकारात्मक ऊर्जा (जैसे कि गुस्सा, शंका, चिंता, निराशा, नाराजगी आदि) को महसूस करें, तो उन बातों को एक कागज पर लिख लें। मूल्यांकन के अंत में, उन आदतों की एक सूची बनाएं जो आपको सबसे ज्यादा बुरी लगती हैं। फिर एक एक करके उन पर विचार करें और उनका हल निकालने की कोशिश करें। अपनी इन बुरी आदतों से पार पाएं। अपने इरादे, दृढ़ संकल्प और एकाग्रता से आप किसी भी आदत से छुटकारा पा सकते हैं। ऐसा करने से आप अपने आपको बेहतर तरीके से जान पाएंगे। अपने आपको जानना ही चेतना से जुड़ने का सबसे आसान तरीका है।

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  • 4

    अपने आपको सीमित न करें

    हम अपने कुछ विश्वास चुन लेते हैं, और फिर उन्हीं विश्वासों तक अपने आपको सीमित कर लेते हैं। ऐसा करने से हम अपने आपको वो होने से रोक लेते हैं जो हम हो सकते थे। हमारे चुने हुए विश्वास हमें दर्द और दुख भी दे सकते हैं। उन विश्वासों को तलाशें जो वाकई आपसे जुड़े हुए हैं या आप जिनसे जुड़ कर संतुष्टि महसूस करते हैं। साथ में, अपने आप से ये सवाल पूछना न भूलें कि ये विश्वास/मत क्यों? इस बात को समझें कि कोई भी आपको किसी चीज पर विश्वास करने के लिए दबाव नहीं बना सकता। अपने दिमाग और सोच को खुला रखें। याद रखें अपने आपको सीमित करने से आप अपने आपको अपनी ही चेतना से जुड़ने में बाधा डाल रहे हैं।

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  • 5

    सकारात्मक बल बढ़ाएं

    आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले लोगों के पास सकारात्मक बल होना जरूरी है। ये आपको आपकी उच्च चेतना के साथ जोड़ने में मदद करेगा। हर रोज अपने उस सकारात्मक बल पर ध्यान लगाएं, जिस पर आप काम करना चाहते हैं। पूरे दिन अपने इस विचार पर दृढ़ रहें और अपने आपको समझाते रहें कि आप जो कर रहे हैं वो आपकी आध्यात्मिक प्रगति के लिए आवश्यक है। कोशिश करें कि ऐसे लोगों के बीच रहें, जो सकारात्मक बल पर विश्वास करते हों। ये आपके फैसले को समर्थन देगा। सद्भाव रखने में मदद करें। ज्यादा से ज्यादा खुश रहने की कोशिश करें। दूसरों की मदद करें। ये सब आपकी मदद करेंगे जिससे कि आपका सकारात्मक बल बढ़ेगा।

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  • 6

    सबके प्रति कृतज्ञ रहें

    क्या आपने कभी उस खूबसूरत फूल का धन्यवाद किया है, जो रोज आपके आंगन में खिलता है और आपकी सुबह में रगं भर देता है? अगर नहीं, तो आप कृतज्ञ होना नहीं जानते। अपने रोजमर्रा के जीवन में उन सबके प्रति कृतज्ञ रहें जो आपके जीवन को संपूर्ण बनाते हैं। खूबसूरत फूल और पौधें, सूर्य का प्रकाश, आपका परिवार, अपने बच्चे के चेहरे की मुस्कुराहट, आपके जीवनसाथी की अच्छी सेहत। आप किसी भी सजीव और निर्जीव वस्तु के प्रति कृतज्ञ हो सकते हैं, जिसने आपके जीवन को संपूर्णता दी है। नियमित तौर पर ऐसा कीजिए और फिर देखिये, कि आपके व्यक्तित्व में कितना अंतर आ जाएगा। कृतज्ञता की भावना चेतना का दरवाजा खोलती है।

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  • 7

    सद्भावना बनाए रखें

    अपने चेतना को जगाने और आध्यात्मिकता के सच्चे मार्ग के लिए सद्भावना अत्यंत आवश्यक बिंदु है। सद्भावना सिर्फ एक बाहरी अभिव्यक्ति नहीं है। सद्भावना एक आंतरिक गुण है जो कि व्यक्ति विशेष के दिल से उत्पन्न होता है। सद्भावना में अपनी भावनाओं के मामलों में माहिर होना शामिल है। भावनाओं को अपने ऊपर नियंत्रण न करने देना शामिल है। सद्भावना में आपकी इच्छाएं शामिल हैं। जितना संभव हो अपने दिल को सद्भावना के लिए खोल दें। जब आप सद्भावना बनाए रखेंगे तो आपके और आपसे जुड़े लोगों के जीवन में वास्तविक शांति स्थापित होगी। शांति की स्थिति में ही चेतना से जुड़ना संभव है।

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  • 8

    वर्तमान को जियें

    ज्यादातर दुख हमें इसलिए होते हैं क्योंकि हम अपने आज में नहीं जीते। जब हम एकाग्र होते हैं तो हमारा मन अविश्वसनीय रूप से शक्तिशाली हो जाचा है, लेकिन वर्तमान में न जीने की वजह से वह शक्ति खो जाती है। वर्तमान में ही आपकी शक्ति मौजूद है। और सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात ये कि आप अपनी चेतना से तभी जुड़ सकते हैं जब आप अपने वर्तमान में जी रहे हों। अतीत को भूलना सीखें और भविष्य को ध्यान में रखिये। चिंता करने से आप वर्तमान से दूर होते चले जाते हैं। शांति और सुख आज में है, अभी में है। बस इस बात को हमेशा अपने मन में रखें।

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