थेरेपी से जुड़े 9 मिथ

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 10, 2014

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चारों ओर फैले मिथ के कारण मनोचिकित्‍सा बहुत ही पेचीदा विषय बन गया है। लगातार होने वाली गलतफहमी के कारण बीमार लोग भी मनोचिकित्सक के पास जाने से डरते हैं।
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    थेरेपी से जुड़े मिथ

    किसी मनोचिकित्सक द्वारा किसी मानसिक रोगी के साथ सम्बन्धपूर्वक बातचीत एवं सलाह मनोचिकित्सा कहलाती है। यह लोगों की व्यवहार सम्बन्धी विविध समस्याओं में बहुत उपयोगी होती है। इसमें मनोचिकित्सक कई तकनीकों का प्रयोग करते हैं। लेकिन अपने चारों ओर फैले मिथ के कारण मनोचिकित्‍सा बहुत ही पेचीदा विषय बन गया है। इसको समझ पाना बहुत ही मु‍श्किल काम है। लगातार होने वाली गलतफहमी के कारण बीमार लोग भी मनोचिकित्सक के पास जाने से डरते हैं। आधुनिक समय में मनोरोगियों की तादाद बढ़ती जा रही है। यह मानसिक स्थितियों के लक्षणों की गिरावट का परिणाम है। यहां थेरेपी से जुड़े सबसे आम मिथ और तथ्‍य दिये गये हैं।
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    मिथ : थेरेपिस्ट सिर्फ सुनता है।

    "आप कैसा महसूस करते हैं?" डॉक्‍टर की पहली लाइन यही होती है। और इसके बाद वह आपको सुनना और समझना चाहता है। डॉक्‍टर अपने मरीज से बात जरूर करता है। यह जान लीजिये कि मरीज से की जाने वाली बातचीत थेरेपी की प्रक्रिया का अहम हिस्‍सा है। इसके साथ ही चिकित्‍सक आपसे कुछ सवाल पूछता है। वह आपसे आपकी प्राथमिकतायें और लक्ष्‍य को निर्धारित करने को कहता है। वह आपसे बात करके परेशान करने वाली चीजों के प्रति आपका नजरिया बदलने को कहता है।
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    मिथ : थेरेपी बहुत महंगी होती है।

    अक्‍सर लोग थेरेपी को बहुत महंगा उपचार समझकर इससे दूर भागते हैं। अगर आप पैसे के संकोच के कारण थेरेपिस्‍ट के पास नहीं जाना चाहते तो इसके कई अन्‍य विकल्‍पों के बारे में भी आपको पता होना चाहिए। जैसे सरकारी अस्‍पतालों और सामुदायिक क्‍लीनिक में थेरेपिस्‍ट किफायती दरों पर इलाज करते हैं। यहां तक कि कई निजी डॉक्‍टर भी अपनी सेवाओं के लिए बहुत कम चार्ज करते हैं।
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    मिथ : इसमें सब कुछ आपके बचपन से जुड़ा होता है।

    कई लोगों का मानना हैं कि थेरेपी में सोफे पर बैठाकर सिर्फ बचपन के बारे में जानकारी हासिल की जाती है। लेकिन असली थेरेपी टीवी पर दिखने वाले काल्पनिक दृश्यों से बिल्‍कुल अलग होती है। कुछ स्थितियों को बेहतर तरीके से समझने के लिए थेरेपिस्‍ट अतीत के बारे में बात करता है। लेकिन व्‍यवहार को प्रभावित करने वाले कई अन्‍य कारक भी इसमें शामिल होते हैं। हाल के उपचार वर्तमान और भविष्य में समस्याओं को सुलझाने में मदद करते हैं।
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    मिथ : थेरेपिस्‍ट इलाज के लिए सिर्फ दवा लेने की सलाह देता है।

    सभी थेरेपिस्‍ट दवाओं पर जोर नहीं देते। हालांकि दवा रोगियों की विशिष्ट समस्याओं को निपटने के लिए थेरेपिस्‍ट की मदद करने वाले उपयोगी उपकरणों में से एक है। दवा का उपयोग लक्षणों की गंभीरता पर भी निर्भर करता है। हल्के अवसाद और चिंता का इलाज केवल थेरेपी से किया जाता है, दवाओं से नहीं।
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    मिथ : थेरेपी पागल लोगों के लिए होती है।

    हालांकि थेरेपी व्यापक रूप से गंभीर मानसिक विकारों के उपचार में प्रयोग की जाती है, लेकिन इससे दैनिक समस्याओं का इलाज भी प्रभावी रूप से किया जा सकता है। थेरेपी के लाभ के लिए किसी व्‍यक्ति का मानसिक विकार के रूप में निदान नहीं किया जाता। थेरेपी लेना का यह मतलब नहीं है कि आप मानसिक रूप से बीमार हैं। थेरेपी लोगों को शांत करने, परेशानी का कारण समझने और तर्क से समस्‍याओं का हल करने में मदद करती है।
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    मिथ : दोस्तों या परिवार के किसी सदस्य से बात करना।

    समस्‍या होने पर दोस्‍तों या परिवार के किसी सदस्‍य से बात करना, थेरेपी की तुलना में बेहतर काम करता है। सामाजिक समर्थन मानसिक स्वास्थ्य के लिए और परिवार और दोस्‍तों से बात करना प्रेरणा और ज्ञान की पेशकश के द्वारा लोगों की तनाव और चिंता से निपटने में मदद कर सकती है। लेकिन थेरेपिस्‍ट अत्यधिक प्रशिक्षित होते हैं और किसी भी समस्‍या का निदान भावनात्मक और व्यवहार अनुभव के आधार पर करते हैं। वह अपना समय आपको सुनने में समर्पित करते हैं और समस्‍याओं का इलाज तरीके से करने के लिए तैयार रहते हैं। थेरेपिस्‍ट आपके के साथ पूरी तरह से खुलकर विचारों और भावनाओं को एक दोस्‍त की तरह सुलझाते हैं। इसके अलावा थेरेपी पूरी तरह से गोप‍नीय होती है। यह आपको अपने जीवन की निजी जानकारी को साझा करते समय भी पूरी तरह से सहज महसूस कराती हैं।  
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    मिथ : सोच के अनुसार बताता है थेरेपिस्‍ट।

    बहुत से लोगों का मनाना है कि थेरेपिस्‍ट आपको बेहतर महसूस कराने के लिए प्ररेक सलाह प्रदान करता हैं। थेरेपिस्‍ट उत्‍साहजनक और हमदर्द होते हैं लेकिन आप इनसे केवल ऐसी प्रतिक्रियाओं प्राप्‍त नहीं कर सकते। इसके साथ-साथ थेरेपिस्‍ट चुनौती को समझने वाले और सहनशील होते हैं। और जीवन में आने वाली गलतियों को समझने और दूर करने की कोशिश करते हैं।
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    मिथ : थेरेपी हमेशा लेनी पड़ती है।

    यह सही है कि कुछ लोगों को थेरेपी फायदेमंद लगती है, विशेष रूप से लंबे समय से मानसिक बीमारियों से पीड़ि‍त लोगों को। और इसके लिए उन्‍हें लंबे समय तक थेरेपी लेनी पड़ती है। लेकिन कुछ व्यवहार और जीवन शैली से जुड़ी समस्‍याओं को तो कुछ हफ्तों या महीनों की थेरेपी की जरूरत होती है।
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    मिथ : थेरेपी की मांग कमजोरी की निशानी है।

    यह दुर्भाग्‍य की बात है कि भावनात्मक या संज्ञानात्मक समस्‍याओं से निपटने के लिए थेरेपी की मांग करने वाले व्यक्ति को कमजोर माना जाता है। लेकिन सच्चाई यह है कि अपनी समस्याओं के लिए मदद की मांग कर    ना साहस का काम है। बहुत से सफल लोग निर्णय लेने और अन्य भावनात्मक समस्याओं की मदद के लिए थेरेपिस्‍ट की सलाह लेते हैं, तो क्यों किसी को भी वैसा करने पर  शर्म आनी चाहिए।
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