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भारत की सात खतरनाक जानलेवा बीमारियां

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 26, 2014
कई घातक बीमारियों को अब दवा और चिकित्‍सा उपचार की मदद से जड़ से दूर किया जा सकता है। लेकिन अभी भी कुछ घातक बीमारियों का सामना हम कर रहे हैं, इन पर ध्‍यान देने की जरूरत है।
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    जानलेवा बीमारियां

    चि‍कित्‍सा क्षेत्र में प्रगति के साथ-साथ, भारत में स्‍वास्‍थ्‍य की स्थिति में भी बदलाव आया है। कई घातक बीमारियों को दवा और चिकित्‍सा उपचार की मदद से जड़ से दूर किया गया है। लेकिन अभी भी कुछ घातक बीमारियों का सामना हम कर रहे हैं, इन पर ध्‍यान देने की जरूरत है। और भारतीय स्वास्थ्य प्रणालियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए मजबूत बनाने की कोशिश की जानी चाहिए। ऐसी ही कुछ जानलेवा बीमारियों की जानकारी यहां दी गई है।   
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    जानलेवा बीमारियां
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    हृदय रोग

    भारत देश में लगभग 24.8 प्रतिशत मौते हृदय रोग के कारण होती है। हालांकि यह परिहार्य है लेकिन दिल की बीमारी से मरने वाली की संख्‍या में हर साल इजाफा जारी है। जोखिम कारकों और सावधानियों की सही जानकारी के अभाव ने बीमारी और लोगों के बीच मौत की संभावना को बढ़ा दिया है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने 2015 तक भारत में लगभग 60 लाख से अधिक लोगों में हृदय रोग होने की आंशका का अनुमान लगाया है। हृदय रोग के प्रमुख कारणों में तम्बाकू धूम्रपान, मोटापा, अस्वास्थ्यकर आहार, शारीरिक निष्क्रियता, उच्च कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर और आनुवंशिकता शामिल हैं। दिल की बीमारी को स्वस्थ आहार, स्वस्थ वजन और गलत आदतों को छोड़कर रोका जा सकता है।   
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    हृदय रोग
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    सांस की बीमारियां

    सांस की बीमारियों के चलते भारत में हर साल लगभग 10.2 प्रतिशत लोग मौत के शिकार होते हैं। सांस की बीमारियों के मुख्‍य कारणों में वायु प्रदूषण, धूम्रपान, एस्बेस्टॉसिस, आदि शमिल है। व्यावसायिक खतरों से परहेज, स्‍वस्‍थ आहार अपनाना, शुद्ध हवा में सांस लेना और धूम्रपान छोड़ना, सांस की बीमारियों को रोकने के सबसे प्रभावी तरीके हैं।
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    सांस की बीमारियां
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    क्षय रोग (टीबी)

    तपेदिक, क्षयरोग या टीबी एक आम और कई मामलों में घातक संक्रामक बीमारी है जो माइक्रो बैक्टीरिया, आमतौर पर माइको बैक्टीरियम टीबी के विभिन्न प्रकारों के कारण होती है। टीबी आम तौर पर फेफड़ों पर हमला करता है, लेकिन यह शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता हैं। यह हवा के माध्यम से तब फैलता है, जब वे लोग जो सक्रिय टीबी संक्रमण से ग्रसित हैं, खांसी, छींक, या किसी अन्य प्रकार से हवा के माध्यम से अपना लार संचारित कर देते हैं। हर साल भारत में लगभग 10.1 प्रतिशत लोग इस जानलेवा बीमारी का शिकार बनते हैं। क्षय रोग को टीकाकरण, स्वस्थ आहार और जीवन शैली और नियमित रूप से निवारक परीक्षण से रोका जा सकता है।
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    क्षय रोग (टीबी)
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    पाचन विकार और डायरिया

    घंटों एक ही जगह बैठ कर काम करना, जल्दी-जल्दी खाने के चक्कर में फास्ट फूड या जंक फूड खा लेना, बिगड़ी हुई दिनचर्या, कम शारीरिक श्रम करना, काम का तनाव और पूरी नींद नहीं लेना आज के लोगों की आदतों में शुमार हो गया है। इनकी वजह से अधिकांश लोगों का पाचन तंत्र ठीक से काम करना बंद कर देता है। इसके साथ ही डायरिया के प्रमुख कारणों में अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थ, जीवाणु संक्रमण, दवा, स्टेरॉयड और सल्फा दवाओं का उपयोग शामिल है। डायरिया में उल्टियां और लूज मोशन होने से शरीर का पानी और नमक निकल जाते हैं। भारत में लगभग 5.1 प्रतिशत लोग हर साल पाचन विकार और लगभग 5.0 प्रतिशत लोग डायरिया का शिकार बनते हैं। स्‍वस्‍थ आहार और जीवनशैली के विकल्‍पों को बनाये रखकर इन समस्‍याओं को रोका जा सकता है।   
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    पाचन विकार और डायरिया
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    कैंसर

    कैंसर एक ऐसी जानलेवा बीमारी, जिसकी चपेट में आकर हर साल हजारों लोग मौत की दहलीज पर खड़े होते हैं। भारत में लगभग 9.4 प्रतिशत लोग इस घातक ट्यूमर की चपेट में आते हैं। कैंसर ट्यूमर के विकास के कारणों में केमिकल और विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आना और रोगजनक, जीन और विकिरण शामिल हैं। कैंसर को खतरे को कम करने के लिए तंबाकू के सेवन से बचना, स्‍वस्‍थ वजन और जीवन शैली को बनाए रखना, नियमित मेडिकल चेकअप और एंटीऑक्‍सीडेंट से भरपूर स्‍वस्‍थ आहार खाना बहुत महत्‍वपूर्ण होता है।
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    कैंसर
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    आत्म नुकसान/डिप्रेशन

    आत्महत्या 15-29 आयु वर्ग के भारतीयों में मौत का दूसरा सबसे आम कारण है। भारत में कुल मौतों में से लगभग 3.0 प्रतिशत मौतों को कारण आत्‍महत्‍या है। आत्महत्या अक्सर निराशा के चलते की जाती है, जिसके लिए अवसाद, द्विध्रुवीय विकार, शराब की लत या मादक दवाओं का सेवन जैसे मानसिक विकारों को जिम्मेदार ठहराया जाता है। तनाव के कारकों में वित्तीय कठिनाइयां या पारस्परिक संबंधों में परेशानियों जैसी समस्‍याओं की भी भूमिका होती है। रोकथाम के तरीकों में तनाव राहत उपचार, पुनर्वास और परामर्श शामिल हैं।
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    आत्म नुकसान/डिप्रेशन
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    मलेरिया

    मलेरिया एक वाहक-जनित संक्रामक रोग है जो प्रोटोजोआ परजीवी द्वारा फैलता है। मलेरिया के परजीवी का वाहक मादा एनोफि‍लेज मच्छर है। इसके काटने पर मलेरिया के परजीवी लाल रक्त कोशिकाओं में प्रवेश कर बहुगुणित होते हैं जिससे एनीमिया के लक्षण जैसे  चक्कर आना, सांस फूलना, हृदय की धड़कन में असामान्य तेजी इत्यादि उभरने लगते हैं। इसके अलावा बुखार, सर्दी, उबकाई और जुकाम जैसी लक्षण भी देखने को मिलते हैं। गंभीर मामलों में मरीज मूर्च्छा में जा सकता है और मृत्यु भी हो सकती है। भारत में हर साल रोगों से होने वाली मौतों में लगभग 2.8 प्रतिशत लोग मलेरिया के शिकार बनते हैं। शोधों के अनुसार, देश की आबादी का लगभग 95 प्रतिशत लोग मलेरिया स्‍थानिक क्षेत्रों में रहते है। मलेरिया से बचाव के लिए अस्वास्थ्यकर स्‍थानों में रहते समय सावधानियां लेनी चाहिए और मच्‍छर को काटने से रोकने के लिए मच्‍छर भगाने वाले उपकरणों को उपयोग करना चाहिए।  
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    मलेरिया
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