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मां की इन बातों में छिपी है जिंदगी की ये 5 सीखें

By:Gayatree Verma , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jun 20, 2016
मां का प्यार हो या उसकी मार... दोनों में कुछ ना कुछ सीख छिपी होती है। लेकिन इस सीख की समझ आती है बड़े होने पर जब हम जिंदगी के कई पड़ावों को पार करते हैं। आइए इस स्लाइडशो में जानते हैं मां की इन बातों में छुपी सीख के बारे में।
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    मां का प्यार और उसकी मार

    मां का प्यार दुनिया में दोबारा कहीं नहीं मिलता। क्योंकि उसके प्यार में कई सीख छुपी होती है जो दुनिया के कई अलग-अलग तरह की स्थितियों का सामना करने की हिम्मत देती है। आपको जानकर हैरानी होगी की जिंदगी की ये सीख केवल मां के प्यार में ही नहीं बल्कि उसकी मार में भी छुपी होती है। आइए जानते हैं इन प्यार और मार में छुपी जिंदगी के सीख के बारे में विस्तार से जो हमारे भविष्य को संवारने का काम करती हैं।

    मां का प्यार और उसकी मार
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    उनकी केयर

    एक बच्चे को उसकी मां के अलावा शायद ही कोई प्यार करता होगा। और ऐसा केवल इंसान के बच्चों के साथ ही नहीं जानवरों के बच्चों में भी देखने को मिलता है। तभी तो इंसान हो या जानवर, दोनों जाति में मां... मां होती है जिसके ममता के कई किस्से कहनियों के द्वारा सुनने को मिलते हैं। हम चाहे कितने भी बड़े हो जाएं मां के प्यार और उसके केयरिंग नेचर में कोई बदलाव नहीं आता। बच्चे के बाहर काम करने के दौरान भी मां हमेशा फोन करके ये जरूर पूछती है कि खाना खाया कि नहीं, तबियत ठीक है या नहीं, किसी तरह की कोई परेशानी तो नहीं... आदि। भविष्य बनाने के संघर्ष और दुनिया से लड़ते हुए ये केयरिंग और ममता ही लड़ने का संबल प्रदान करती है।

    उनकी केयर
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    बनाती है जिम्मेदार

    मां के तौर-तरीके और उनका रहन-सहन ही एक इंसान को जिम्मेदार बनाने का काम करता है। मां का बचपन में किताब-कॉपी सही जगह पर रखने के लिए डांटना, टिफिन आधा खत्म करके लाने के लिए डांटना, नंगे पैर खेलने के कारण डांटना... आदि कई चीजों के लिए मां का डांटना ही आगे के लिए इंसान को जिम्मेदार बनाने का काम करता है। इसके अलावा हर महीने की पैरेंट्स मीटिंग अटेंड करना, एनुअल फंक्शन के लिए सारी तैयारी करना और रोज का होमवर्क कराने की जिम्मेदारी जिस तरीके से मां बिना थके पूरा करती है वो बच्चे के लिए एक रोल-मॉडल की तरह काम करती हैं। इससे हर बच्चे पर उसकी मां की छाप जरूर पड़ती है और बच्चा जिम्मेदार बनता है।

    बनाती है जिम्मेदार
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    बात करने का सलीका

    लोगों के सामने पेश आने के तरीके और दूसरों से कैसे बात करनी है, का सलीका भी मां ही सीखाती है। नहीं तो दोस्तों के साथ रहकर तो हम हर वाक्य केवल साला से शुरू करना सीखते हैं। ऐसे में मां ही है जो हमेशा अदब से पेश आने का तरीका सीखाती है। अगर यूं कहें कि किसी इंसान के व्यवहार में उसके मां के व्यवहार का प्रतिबिंब नजर आता है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। क्योंकि बच्चे के शुरुआती साल में मां ही उसके पास सबसे अधिक होती है। और बचपन में मिली सीख बच्चा कभी नहीं भूलता।

    बात करने का सलीका
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    अनुशासन

    सुबह समय पर उठकर स्कूल जाने के लिए तैयार करना औऱ सही जगह पर स्कूल ड्रेस उतार कर रखने की सीख बच्चों को जीवन के अनुशासन में रहने की सीख देती है। मां की कोशिश होती है कि वो इन छोटी-छोटी बातों में ही बच्चे को अनुशासन में रखें। इसलिए तो छुट्टी के समय सुबह जल्दी उठाकर जबरदस्ती खेलने के लिए भेजती है। जबकि उस समय हर बच्चा सोने का बहाना ढूंढता है। ऐसे ही छोटे-छोटे कामों से मां कब अनुशासन का पाठ सिखा देती है पता ही नहीं चलता। फिर हम जैसे-जैसे आगे बढ़ते जाते हैं ये सारी आदतें हमारे रोजाना के रुटीन में शामिल हो जाती है। इसलिए तो आज भी छुट्टी के दिन कई लोग जल्दी उठ जाते हैं जिसके कारण वो फिट भी रहते हैं।

    अनुशासन
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