चक्रों को उद्दीप्त करने के लिए आठ सरल चक्रासाइजेज़

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 29, 2014

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समय-समय पर चक्रों वाले स्थान पर ध्यान दिया जाए और चक्रासाइजेज़ अर्थात चक्रों को प्रबल करने की एक्सरसाइज की जाए तो स्वस्थ मानसिक, शारीरिक स्वास्थ्य और सुदृढ़ता प्राप्त की जा सकती हैं।
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    चक्रों को उद्दीप्त करने वाली एक्सरसाइज

    जब आपको सुस्त, भीतर से अवरुद्ध, यहां तक कि उदासी और निराशा का थोड़ा सा भी एहसास हो तो जानने की कोशिश करनी चाहिए कि भला शरीर में ये बेचैनी कहां मौजूद है? समय-समय पर चक्रों वाले स्थान पर ध्यान दिया जाए और चक्रासाइजेज़ अर्थात चक्रों को प्रबल करने की एक्सरसाइज की जाए तो स्वस्थ मानसिक, शारीरिक स्वास्थ्य और सुदृढ़ता प्राप्त की जा सकती हैं।   
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    मूलाधार चक्र एक्सरसाइज

    यह गुदा और लिंग के बीच चार पंखुड़ी वाला 'आधार चक्र' होता है। इसका ही दूसरा नाम मूलाधार चक्र है। यहां वीरता और आनन्द भाव का निवास है। यह भोग, निद्रा और संभोग पर संयम रख कर ध्‍यान लगाने व प्रार्थना करने से जाग्रत होने लगता है।
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    स्वाधिष्ठान चक्र

    छ: पंखुड़ी वाला स्वाधिष्ठान चक्र लिंग मूल में होता है। इसको जाग्रत करने पर क्रूरता, गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, अविश्वास आदि बुरे गुणों का नाश होता है। इसे दृश्य, दूर त क देख पाने की शक्ति बढ़ा कर और विशद सपने देखकर उद्दीप्त किया जा सकता है।   
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    मणिपुर चक्र

    दस दल कमल पंखुरियों से युक्त नाभि के मूल में स्थित रक्त वर्ण तीसरा चक्र है। जिस व्यक्ति की चेतना या ऊर्जा यहां एकत्रित है उसे काम करने की धुन-सी रहती है। इसे पेट से श्वास लेकर, नमक के पानी के गरारे कर व गायन या चिल्लाकर जाग्रत किया जा सकता है।  
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    अनाहत चक्र

    बारह पंखुड़ियों वाला अनाहत चक्र हृदय स्थान में होता है। स्विमिंग (ब्रेस्टस्ट्रोक), पुश अप व गले लगने से इस चक्र की एक्सरासाइज होती है और यह जाग्रत होता है। हृदय पर संयम करने व ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होता है। विशेषकर रात को सोने से पहले इस चक्र पर ध्यान लगाने के अभ्यास से ये जल्द ही जाग्रत होने लगता है।
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    विशुद्धख्य चक्र

    सोलह पंखुड़ी वाला विशुद्धख्य चक्र कण्ठ में सरस्वती का स्थान होता है। यहां सोलह कलाएं विद्यमान हैं। नृत्य इस चक्र के लिए अच्छी एक्सरासइज है। इसके अलावा कंठ में संयम करने और ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है।
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    आज्ञाचक्र

    आज्ञाचक्र भू्रमध्य में होता है। आज्ञा चक्र के जाग्रत होने से कई शक्तियां जाग उठती हैं। पेल्विक को भीतर की ओर करने व पेल्विक मूवमेंट से इस चक्र का व्यायाम होता है। इसके अलावा भृकुटी के मध्य ध्यान लगाते हुए साक्षी भाव में रहने से भी यह चक्र जाग्रत होता है।
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    सहस्रार चक्र

    सहस्रार की स्थिति मस्तिष्क के मध्य भाग में होती है। यहां से जैवीय विद्युत का स्वयंभू प्रवाह शुरू होता है। मूलाधार से होते हुए सहस्रार तक पहुंचा जा सकता है। लगातार ध्यान करने से यह चक्र जाग्रत हो जाता है।
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    ओरा (दिव्यज्योति)

    ओरा के व्यायाम के लिए खारे पानी से स्नान, स्टीम बाथ तथा गहरी शांसों से भीतर की सफाई करनी चाहिए। इसके अलावा नियमित ब्रीदिंग एक्सरसाइज व हाथों को आपस में रगड़कर भी ओरा की सफाई होती है और वह बेहतर बनता है।  
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