महिलाओं के लिए जरूरी है इन 7 कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट की जानकारी

By:Shabnam Khan , Onlymyhealth Editorial Team,Date:May 12, 2015

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यूं तो कैंसर किसी को भी हो सकता है, लेकिन कैंसर के कुछ प्रकार ऐसे होते हैं जो केवल महिलाओं को ही होते हैं, समय पर निदान से इसका उपचार आसान हो जाता है, तो कैंसर का पता लगाने वाले स्‍क्रीनिंग टेस्‍ट के बारे में आपको पता होना चाहिए।
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    महिलाओं को होने वाले कैंसर की जांच

    कैंसर की चपेट में यूं तो कोई भी आ सकता है लेकिन इन दिनों इसकी चपेट में सबसे ज्‍यादा महिलाएं आ रही हैं। खासतौर पर 40 से 50 की उम्र की महिलाएं। कुछ कैंसर ऐसे हैं, जो खासतौर पर केवल महिलाओं को ही होते हैं। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की आप पुरुष हैं या महिला क्‍योंकि हम सब की जिंदगी किसी न किसी महिला से जरुर जुड़ी होती है। इसलिए इस बात की जानकारी आपको होना बहुत ही जरुरी है कि महिलाओं को होने वाले कैंसर का पता लगाने के लिए कौन से स्क्रीनिंग टेस्ट करवाने चाहिए।

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    घर पर ब्रेस्ट टेस्ट

    ब्रैस्ट कैंसर महिलाओं में सबसे आम है। इसका इलाज संभव तो है लेकिन जरूरी है समस्या वक्त रहता मालूम चल जाए। इसके लिए महिलाएं घर पर ही समय निकाल कर अपना टेस्ट करें। शीशे के सामने खड़े हो कर देखें कि दोनों स्तनों के आकार में कोई अंतर तो नहीं। सूजन और जलन को नजरअंदाज ना करें। यदि रिसाव हो, गांठ जैसा महसूस हो या दर्द हो तो डॉक्टर से जरूर मिलें। इस दौरान अगर स्किन का एक जगह इकट्ठा होना, सूजन, त्वचा में जलन, निपल में दर्द होना या उनका मुड़ना, निपल व ब्रेस्ट की स्किन का हिस्सा लाल होना, ब्रेस्ट के साइज में अंतर आना वगैरह में से कुछ भी महसूस करें, तो फौरन डॉक्टर से चेकअप करवाएं।

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    मैमोग्राम

    मैमोग्राम एक तरह के एक्स-रे को कहते हैं, जो कि ब्रेस्ट या स्तन में बीमारीयों के जांच में मदद करता है। मैमोग्राम से यह जानने का प्रय्तन किया जाता है कि ब्रेस्ट के अंदर कोई भी गांठ है कि नहीं। यह छोटे गांठ को 1 से 2 साल पहले पहचान सकता है, जो कि हाथ से महसूस नहीं होता है। इससे सबसे बड़ा लाभ यह है कि अगर सही में कोई कैंसर हुआ तो बहुत छोटे साईज में ही उसको पहचाना जा सकता है। समय से इलाज करवाने से जान भी बच सकती है। इसलिए महिलाओं को इसकी अच्छी प्रकार से जानकारी होनी चाहिए।

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    बीआरसीए जीन म्यूटेशन्स के लिए जेनेटिक टेस्टिंग

    एंजेलीना जोली दुनिया की उन पांच फीसदी महिलाओं में शामिल हैं, जिनके शरीर में बीआरसीए1 जीन में म्यूटेशन के कारण स्तन कैंसर की आशंका बहुत ज्यादा हो जाती है। इतना ही नहीं अंडाशय के कैंसर का भी उन्हें खतरा होता है। म्यूटेशन यानी जीन में गड़बड़ी सामान्य तौर पर आनुवांशिक होती है और बेटे बेटियों के शरीर में भी यह गड़बड़ी पहुंचती रहती है। ऐसे मामलों में जेनेटिक टेस्टिंग मददगार होती है। कई बीमारियों के लिए जीन टेस्टिंग अहम भूमिका निभाती है, लेकिन इलाज फिर भी नहीं हो पाता। हालांकि स्तन कैंसर के मामले में परीक्षण ही बचाव का मुख्य तरीका है।

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    पैप स्मीयर टेस्ट

    सर्वाइकल यानी गर्भाशय के कैंसर की जांच के लिए पैप स्मीयर टेस्ट होता है। इस कैंसर से हर साल दुनिया में ढाई लाख और भारत में 74 हजार महिलाओं की मौत हो रही है, यानी हर तीन में से एक मौत देश में हो रही है। शहर में पिछले पांच साल में पैप स्मीयर टेस्ट कराने को लेकर महिलाओं में अवेयरनेस बढ़ी है। इसमें राउंड स्पैचुला को यूटरस की आउटर लेयर पर धीरे से घिसने के बाद जमा हुए सेल्स की जांच की जाती है। माइक्रोस्कोप से यह चेक किया जाता है कि कहीं इन सेल्स में कोई एबनॉर्मल सेल्स तो नहीं है। इसमें यह भी पता चल जाता है कि नए सेल्स नॉर्मल स्पीड में बन रहे हैं या नहीं।

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    कोलोरेक्टल कैंसर क्रीनिंग

    एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि महिलाओं में कोलोरेक्टल कैंसर की सम्भावना शक्कर के सेवन से काफी बढ़ जाती है। कोलोरेक्टर कैंसर स्क्रीनिंक के लिए सबसे पहले ब्लड टेस्ट होता है। ये स्टूल में पाया जाने वाला ब्लड होता है जिसके लिए स्टूल का सैंपल लिया जाता है। इसमें शक सही निकलने पर कोलोनोस्कोपी होती है। जिसमें सैंपल लेकर कैंसर टेस्टिंग के लिए भेजा जाता है।

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    ओवेरियन कैंसर के लिए पीसीओएस

    इन दिनों कई महिलाओं की फाइब्रॉएड और पॉलीसिस्टिक ओवरी (पीसीओएस) होती है। यही अल्‍सर कुछ दिनों में एक ट्यूमर का रूप ले लेते हैं और घातक बन जाते हैं। कई गर्भाशय कैंसर का पता लगाना बड़ा मुश्‍किल होता है क्‍योंकि इनके कोई साफ लक्षण नहीं होते। ब्‍लड टेस्‍ट और अल्‍ट्रा साउंड स्‍कैन करवा कर इस बीमारी का पता चल सकता है। अगर आपमें पहले से ही पीसीओएस है और वजन ओरवेट है, तो आपको इसकी जांच जरुर करवा लेनी चाहिये।

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    यूटरिन कैंसर

    अगर आप कुछ समय से इस बात को नोटिस कर रहीं हैं कि आपके पीरियड्स ठीक समय पर नहीं आ रहें हैं, तो यह इस कैंसर का एक मात्र लक्षण होगा। यह गर्भाशय के भीतरी अस्‍तर का कैंसर होता है। जो कि एक छोटे से ट्यूमर के रुप में हो सकता है। अगर अल्‍ट्रासाउंड करवाने पर असामान्य खून बह रहा हो या मोटी एंडोमेट्रियल लेयर दिख रही हो, तो इसके होने का रिस्‍क हो सकता है। इस बीमारी का कारण, खराब दिनचर्या और खराब आहार खाना होता है।

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