हेल्‍थ संबंधी जानकारी के लिए सब्‍सक्राइब करें

Like onlymyhealth on Facebook!

इन 5 ब्रीदिंग एक्‍सरसाइज की मदद से कम होगा वजन

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 13, 2015
अगर आपको लगता है कि वजन कम करना सांस लेने की तरह सरल हैं! तो यह सच है! दरअसल जब हम सांस लेते हैं तो हमारे शरीर के भीतर पहुंचने वाली ऑक्सीजन खून के माध्यम से शरीर की कोशिकाओं को पोषण देती है। सही तरह से गहरी सांस लेने और छोड़ने मात्र से ही हमें कई तरह के फायदे होते हैं। उनमें से एक है मोटापे से मुक्ति।
  • 1

    वजन कम करें ब्रीदिंग तकनीक

    अपना बढ़ा वजन कम करने के लिए लोग क्या-क्‍या नहीं करते। और भला करें भी क्यों ना, मोटापा न सिर्फ आपकी सुंदरता को खराब करता है बल्कि तमाम तरह की बीमारियों का कारण भी बनता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ ऐसी ब्रीदिंग एक्‍सरसाइज हैं, जिन्‍हें नियमित दिनचर्या में शामिल कर आप आसानी से मोटापे से निजात पा सकते हैं। तो चलिये वजन घटाने के लिए किये जाने वाली ब्रीदिंग एक्‍सरसाइज व इन्हें करने की विधि के बारे में जानें इस स्‍लाइड शो में।
    Image: Getty

    वजन कम करें ब्रीदिंग तकनीक
  • 2

    ब्रीदिंग तकनीक

    जब हम सांस अंदर लेते हैं तो हमारे शरीर के भीतर पहुंचने वाली ऑक्सीजन रक्त के माध्यम से शरीर की कोशिकाओं को पोषण देती है। हजारों साल पहले से सांसों को लेने और छोड़ने का महत्व रहा है जिसे आचार्यों ने प्राणयाम के अभ्यास के रूप में पेश कियाI केवल गहरी सांसों को लेने और छोड़ने से ही हमें कई लाभ प्राप्त होते हैं। तो सोचिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज का कितना लाभ होगा।
    Image: Getty

    ब्रीदिंग तकनीक
  • 3

    कपालभाती प्राणायाम योग

    मस्तिष्क के अगले भाग को कपाल कहा जाता है। कपालभाती प्राणायाम करने के लिए सिद्धासन, पद्मासन या वज्रासन में बैठकर सांस को बाहर छोड़ने की क्रिया करें। सांसों को बाहर छोड़ते समय पेट को अंदर की ओर धकेलने का प्रयास करें। लेकिन ध्यान रहे कि श्वास लेना नहीं है क्योंकि इस क्रिया में श्वास खुद ही भीतर चली जाती है। यह प्राणायाम का नियमित अभ्यास करने से न सिर्फ मोटापे की समस्या दूर होती है बल्कि चेहरे की झुर्रियां और आंखों के नीचे का कालापन दूर होता है और चेहरे की चमक बढ़ाता है। इसके अभ्यास से दांतों, पेट और बालों के सभी प्रकार के रोग दूर हो जाते हैं। शरीर और मन के सभी प्रकार के नकारात्मक भाव और विचार दूर होते हैं।
    Image: eyogaguru.com

    कपालभाती प्राणायाम योग
  • 4

    भस्त्रिका प्राणायाम

    भस्त्रिका प्राणायाम करने के लिए पद्मासन में बैठकर, दोनों हाथों से दोनों घुटनों को दबाकर रखें। इससे पूरा शरीर (कमर से ऊपर) सीधा बना रहता है। अब मुंह बंद कर दोनों नासापुटों से पूरक-रेचक झटके के साथ जल्दी-जल्दी करें। आप देखेंगे कि श्वास छोड़ते समय हर झटके से नाभि पर थोड़ा दबाव पड़ता है। इस तरह बार-बार इसे तब तक करते रहना चाहिए जब तक कि थकान न होने लगे। इसके बाद दाएं हाथ से बाएं नासापुट को बंद कर दाएं से ज्यादा से ज्यादा वायु पूरक के रूप में अंदर भरें। आंतरिक कुम्भक करने के बाद धीरे-धीरे श्वास को छोड़ें। यह भस्त्रिका प्राणायाम होता है। लेकिन हृदय रोग, फेंफडे के रोग और किसी भी प्रकार के अन्य गंभीर रोग होने पर में यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
    Image: thecompleteyoga.com

    भस्त्रिका प्राणायाम
  • 5

    अनुलोम–विलोम प्रणायाम

    अनुलोम–विलोम प्रणायाम में सांस लेने व छोड़ने की विधि को बार-बार दोहराया जाता है। इस प्राणायाम को 'नाड़ी शोधक प्राणायाम' भी कहा जाता है। इसे नियमित रूप से करने से शरीर की सभी नाड़ियों स्वस्थ व निरोग रहती है। इस प्राणायाम को किसी भी आयु का व्यक्ति कर सकता है। इस प्रणायाम को सुबह-सुबह खुली हवा में बैठकर करना चाहिए। अनुलोम–विलोम प्रणायाम करने के लिए दरी बिछाकर उस पर सुविधानुसार पद्मासन में बैठ जाएं। अब अपने दाहिने हाथ के अंगूठे से नाक के दाएं छिद्र को बंद करें और नाक के बाएं छिद्र से सांस अंदर भरें और फिर ठीक इसी प्रकार बायीं नासिका को अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियों से दबा लें। इसके बाद दाहिनी नाक से अंगूठे को हटा दें और सांस को बाहर फैंके। इसके बाद दायीं नासिका से ही सांस अंदर लें और दायीं नाक को बंद करके बायीं नासिका खोलकर सांस को 8 तक गिनती कर बाहर फैंकें। इस क्रिया को पहले 3 मिनट और फिर समय के साथ बढ़ाते हुए 10 मिनट तक करें।
    Image: www.onlymyhealth.com

    अनुलोम–विलोम प्रणायाम
  • 6

    भ्रामरी प्राणायाम

    भ्रामरी प्राणायाम करते समय भ्रमर अर्थात भंवरे जैसी गुंजन होती है, इसी कारण इसे भ्रामरी प्राणायाम कहते हैं। इस अभ्‍यास को करने के लिए सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन, वज्रासन में बैठें। फिर अपने दोनो अंगुठे से कान पूरी तरह बन्द करके, दो उंगली को माथे पर रख लें। अब अपनी सारी उंगलियों को दोनो आंखो पर रख लें। फिर लंबी सांस लेकर गले से भवरें जैसी आवाज निकालें। इसे करने से मन शांत और तनाव दूर होता है। इस ध्वनि के कारण मन इस ध्वनि के साथ बंध जाता है, जिससे मन की चंचलता समाप्त होकर एकाग्रता बढ़ने लगती है। यह मस्तिष्क के रोगों में भी लाभकारी होता है।
    Image: api.ning.com

    भ्रामरी प्राणायाम
  • 7

    अर्ध मत्स्येन्द्रासन

    अर्ध मत्स्येन्द्रासन विशेष रूप से आपके फेफड़ों की सांस लेने और ऑक्सीजन को अधिक समय तक रोकने की क्षमता को बढ़ाने का काम करता है। साथ ही यह रीढ़ को आराम देता है और पीठ दर्द या पीठ संबंधी परेशानियों से निजात दिलाता है। अर्ध मत्स्येन्द्रासन को करने के लिए दोनों पैरों को सामने की ओर फैलाकर बैठ जाएं। अब बाये पैर को घुटने से मोड़कर इसकी एड़ी को दाये नितम्ब के नीचे रखिए। तत्पश्चात दाये पैर को घुटने से मोड़कर इसके पंजे को बाये घुटने के पार रखिए तथा दाये घुटने को सीने की तरफ रखिए। अब बाये हाथ को दाये पैर के घुटने के पास रखते हुए दाये पंजे के पास ले जाएं। दाये हाथ को पीठ के पीछे रखकर धड़ तथा सिर को भी दायी तरफ यथासंभव मोड़ें। इस स्थिति में आरामदायक अवधि तक रुककर वापस पूर्व स्थिति में आएं। यही क्रिया दूसरी तरफ भी कीजिए।
    Image: www.yogaenred.com

    अर्ध मत्स्येन्द्रासन
  • 8

    सावधानी

    "ताओ ऑफ ब्रीदिंग" के लेखक डेनिस लुईस के अनुसार सांसों को लेना और छोड़ना निश्चित रूप से वजन घटाने के कार्यक्रम में मदद करता है। हालांकि यह विशेष रूप से वजन कम करने के लिए बनी एक्‍सरसाइज को शारीरिक, मानसिक या आध्यात्मिक हानि के कारण हतोत्‍साहित करती है। लुईस इसलिए वजन कम करने के लिए स्‍वाभाविक रूप से सांस लेने, पर्याप्‍त एक्‍सरसाइज और संतुलित आहार लेने की सिफारिश करते हैं।
    Image: Getty

    सावधानी
Load More
X
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर