एडीएचडी के सात लक्षण बिगाड़ सकते हैं शादीशुदा जीवन

By:Nachiketa Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 03, 2014

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अटेंशन डिफिसिट हाइपरएक्टिव डिसऑर्डर का असर व्‍यक्ति के शादीशुदा जीवन पर पड़ सकता है, इसके कारण रिश्‍ते टूट जाते हैं, क्‍योंकि इसका रोगी रिश्‍तों को अहमियत नहीं समझ सकता और हमेशा आवेग में रहता है।
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    एडीएचडी और शादीशुदा जीवन

    अटेंशन डिफिसिट हाइपरएक्टिव डिसऑर्डर यानी एडीएचडी का असर आपके शादीशुदा जीवन पर भी पड़ सकता है, इसके कारण रिश्‍ते टूट भी जाते हैं। यह एक प्रकार की मानसिक बीमारी है जो पुरुषों और महिलाओं दोनों हो सकती है। इससे प्रभावित व्‍यक्ति अपने शादीशुदा जीवन में संतुलन नहीं बना पाता, जिसके कारण रिश्‍ते में टकराव, जिम्‍मेदारी न निभा पाना, पार्टनर का खयाल न रखना, चीजों को व्‍यवस्थित न कर पाने जैसी समस्‍यायें होती हैं। यह गंभीर बीमारी नहीं है जिससे कारण लोग इसे दिमाग की सामान्‍य समस्‍या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। अगर कोई इस बीमारी से ग्रस्‍त है तो इसके कुछ लक्षण दिखाई पड़ते हैं जो यह दर्शाते हैं कि इसका बुरा असर शादीशुदा जीवन पर भी पड़ सकता है।

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    क्‍या है एडीएचडी

    एडीएचडी दिमागी विकार है, यह ऐसी बीमारी है जो बच्‍चों और बड़ों दोनों को हो सकता है। लेकिन बड़ों की तुलना में बच्‍चों को यह रोग होने की संभावना अधिक होती है। इस बीमारी में मरीज का व्‍यवहार बदल जाता है और उसकी याद्दाश्‍त भी कमजोर हो जाती है। अगर हम इसे दूसरे शब्‍दों में कहे तो अटेंशन डेफिसिट हायपरएक्टिविटी का मतलब है, किसी चीज या वस्‍तु पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता का सही इस्तेमाल न कर पाना। ऐसा माना जाता है कि कुछ रसायनों के इस्तेमाल से दिमाग की कमजोरी की वजह से ये कमी होती है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों में यह बीमारी अधिक देखी जाती है। इसका असर सभी प्रकार के रिश्‍ते पर पड़ता है।

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    ध्‍यान की कमी

    शादीशुदा जीवन को बेहतर तरीके से चलाने के लिए ध्‍यान देने की बहुत जरूरत होती है। ध्‍यान केंद्रित किये बना आप अपने पार्टनर को समझ नहीं सकते हैं। ध्‍यान देकर ही आप अपने पार्टनर के व्‍यवहार, उसकी बातों, उसकी आदतों, आदि बातों को समझ सकते हैं। शादी के बाद पति-पत्‍नी के बीच बेहतर तालमेल हो इसके लिए इन बातों पर ध्‍यान देना बहुत जरूरी है। जबकि एडीएचडी से ग्रस्‍त व्‍यक्ति ध्‍यान देने में अक्षम होता है। इसके कारण न तो वह अपने ऊपर और न ही अपने पार्टनर के ऊपर ध्‍यान दे पाता है जिसके कारण घर में कलह और तनाव की स्थिति आ जाती है। इसके कारण रिश्‍ते टूट सकते हैं।

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    मूड में बदलाव

    जो लोग एडीएचडी बीमारी से ग्रस्‍त होते हैं एक ही दिन में उना मूड कई बार बदलता है, मूड के साथ उनके व्‍यवहार में भी बदलाव आता है। इस स्थिति में व्‍यक्ति एक पल में कुछ और अगले पल में दूसरी बात करने लगता है। सुबह के वक्‍त अगर कोई योजना बना ली है तो थोड़ी ही देर में उसे वह भूल भी जाता है। अगर आपने अपनी पत्‍नी से कोई वादा कर लिया है तो अगले ही पल आप उसे भूल जाते हैं, यह कलह का कारण बनता है। वक्‍त दर वक्‍त बदलते मूड के मिजाज को नियमित रूप से आपका पार्टनर बर्दाश्‍त नहीं कर सकता है। ऐसे में रिश्‍ते का टूटना और अलगाव ही आखिरी विकल्‍प होता है।

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    बातों को न समझ पाना

    एडीएचडी से पीड़ित व्‍यक्ति बातों को सुनने के बाद भी उसे अच्‍छे तरीके से समझ नहीं पाता, ऐसे व्‍यक्ति को कोई बात समझाने में बहुत समस्‍या होती है। इस विकार के कारण वह अपने साथ को यह भी बोल सकता है कि उसकी बात का उसके ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। इसका परिणाम निर्णय लेने के समय दिखाई देता है, क्‍योंकि जब आप किसी बात को समझ नहीं पायेंगे तो उसका निर्णय भी नहीं कर पायेंगे। अगर उन्‍हें बच्‍चे हैं तो उनके स्‍कूल और कॉलेज संबंधी निर्णय लेने में भी वह अक्षम होता है। पार्टनर के साथ किये गये सामान्‍य व्‍यवहार के बाद भी वह निष्‍कर्ष निकालने में अक्षम होता है।

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    भुलक्‍कड़ होना

    एडीएचडी बीमारी से ग्रस्‍त होने के बाद व्‍यक्ति की याद्दाश्‍त कमजोर हो जाती है, वह व्‍यक्ति भुलक्‍कड़ हो जाता है। शादीशुदा जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए भुलक्‍कड़पन होना सही नहीं, इसका नकारात्‍मक असर होता है। एडीएचडी से पीड़ित कोई व्यक्ति अपकी पत्नी का जन्मदिन या अपनी शादी की सालगिरह याद नहीं रख पाता है। ऐसे इनसान अगर अपने पार्टनर से कोई वादा भी कर लें तो उन्‍हें पूरा नहीं कर पाते हैं, वे उन वादों को भूल जाते हैं। इसके कारण उनके रिश्‍ते में खटास पड़ना स्‍वाभाविक है।

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    आवेग में रहना

    शादीशुदा जीवन के लिए आवेग या क्रोध का होना नकारात्‍मक है। यह ऐसी प्रवृत्ति है जिसके कारण आप अपने ऊपर आपा तो खोते हैं साथ ही आपके सामने खड़े इनसान की वैल्‍यू भी आप भूल जाते हैं। इस भावना से ग्रस्‍त होने के बाद आप केवल अपनी बातों और जिद मनवाने पर जोर देते हैं, पार्टनर की भावनाओं और इच्‍छाओं का दमन करने में आप जरा भी संकोच नहीं करते हैं। इस स्थिति में पार्टनर खुद को असहज महसूस करता है। आवेग में आप जो निर्णय लेते हैं वे भी गलत होते हैं, क्‍योंकि आप जल्‍दबाजी में क्रोधित होकर निर्णय लेते हैं जो आपकी शादीशुदा जीवन को बर्बाद कर सकता है।

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    जिम्‍मेदारी का अभाव

    एडीएचडी से ग्रस्‍त व्‍यक्ति जिम्‍मेदारियों का निर्वहन नहीं कर पाता है और वह जिम्मेदारियों को निभाने में अक्षम भी हो जाता है। ऐसे व्‍यक्ति सामान्‍य जिम्‍मेदारी जैसे - बिलों का भुगतान करना, बच्चे को स्कूल से लाना, घर का सामान लाने जैसी सामान्‍य जिम्‍मेदारियों को करने से बचते हैं। बच्‍चों के साथ बाहर जाने पर भी इन्‍हें बच्‍चों की  जिम्‍मेदारी का एहसास बिलकुल नहीं रहता है। इनका व्‍यवहार आवेगपूर्ण हो जाता है, इनका ध्‍यान आसानी से किसी भी चीज से हट जाता है, ये कोई भी काम योजनाबद्ध तरीके से नहीं करते हैं।

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